Tuesday, October 15, 2019 03:01 PM

अंगूर खट्टे हैं

पूरन सरमा

स्वतंत्र लेखक

मैं सरकार बदलने का ही इंतजार कर रहा था। चुनाव हुए और सरकार बदल गई। मेरी नजर प्रदेश साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद पर थी। मैं शासन सचिवालय के गलियारों में चक्कर लगाने लगा। पुराने ब्यूरोक्रेट्स से मिलना-जुलना प्रारंभ किया, लेकिन इससे बात बन नहीं रही थी। सभी का कहना था कि मैं सीएम से मिलूं तो बात बन सकती है। फाइनल सीएम साहब ही करेंगे। मैंने नजर फैलाई कि सीएम तक कैसे पहुंचा जा सकता है? यकायक दयाल जी का ख्याल आया। पुराने घाघ हैं राजनीति के, सौभाग्य से मुझे भी जानते हैं। उनकी शरण में गया तो बोले- ‘शर्मा, सही समय पर आए हो। नई सरकार बन गई है, चाहो तो प्रदेश की साहित्य अकादमी पर कब्जा कर सकते हो। तुम वैसे भी साहित्यानुरागी हो।’ ‘सर, आपके मुंह में घी-शक्कर। मैं इसी संबंध में आपसे बात करने आया था। लिखने-पढ़ने का तो मेरा अनुभव नहीं है, लेकिन साहित्यकारों में मेरी अच्छी उठ-बैठ है। मेरे नाम पर कोई विवाद भी नहीं होगा। तुष्टिकरण का गणित मैं भली प्रकार से जानता हूं। आप मेरा नाम सीएम साहब के कान में डाल दो तो आपके गुण गाऊंगा।’ मैंने कहा। दयाल जी मंद मुस्कान के साथ बोले- ‘भाई शर्मा, तुम्हारा नाम कान में क्या उनके मुंह में भी डाल देंगे, लेकिन पहले यह तो बताओ अकादमी का वार्षिक बजट कितना है?’ मैने कहा- ‘सर, अभी तो एक करोड़ का है, फिर और बढ़वा लेंगे।’ ‘वह तो ठीक है भाई। तुम तो जानते हो मेरे पास इस तरह की दलाली के अलावा और कोई काम नहीं है। खर्चे शाही हैं। महंगाई का समय है। मुझे कितना कर सकोगे, पहले यह खोल दो। बाकी समझ लो अध्यक्ष तो तुम बन ही गए।’ दयाल जी ने कहा तो मैं बोला - ‘सर, मेरे पास भी कोई काम नहीं है। इसीलिए भागा-दौड़ी कर रहा हूं। जितना बन पडे़ेगा आपके लिए अर्पित कर दूंगा। बीस पर्सेंट का मार्जिन मानकर चलें तो बीस लाख साल का होता है। बहुत है हमारे लिए। फिर सीएम साहब से परिचय हो गया तो बहुत सारे जनकल्याण के कार्य हाथ में लेकर उनमें कमा लेंगे।’ ‘यदि इस बात पर टिको तो मैं एप्रोच लगाता हूं, दयाल जी का आशीर्वाद लेकर मैं लौट आया। सातवें दिन तो अकादमी अध्यक्ष पद पर मेरी नियुक्ति की घोषणा हो गई। मैं लपक कर दयालजी के पास पहुंचा। आभार व्यक्त करने लगा तो बोले- ‘आभार से क्या होता है शर्मा? माल चाहिए। मैंने मेरा काम कर दिया, अब तुम्हारे वादे पूरा करने का समय है।’ ‘मैं अपने वादों पर कायम हूं सर। पांचों घी में है। पहली बार मलाई हाथ लगी है। चिंता न करें मिल-बांट कर सब सैट कर लेंगे।’ दयाल जी बोले- ‘भाई एक बार सीएम साहब से भी मिल लो, उनका आभार आवश्यक है। उनकी विचारधारा पोषित होगी तो वे और निहाल कर देंगे। उनकी गुड बुक में आना अब भाई तुम्हारे हाथ है।