Thursday, November 14, 2019 02:14 PM

अनवांटेड ले गए मजा…स्पेशल बुलाए गेस्ट को मिली सजा

इन्वेस्टर्स मीट के शुभारंभ सत्र से कई मेहमानों को रहना पड़ा बाहर, पास की बंदरबांट से भाजपामय हुआ ग्राउंड

धर्मशाला — इन्वेस्टर्स मीट के दूसरे दिन मौजूद गणमान्य

धर्मशाला - निवेश के लिए शिखर की ओर का रास्ता दिखाने वाले इस इवेंट ने कई निराशा भरी यादें भी छोड़ी हैं। शानदार मेजबानी के बीच बाहर से बुलाए कई निवेशकों और मेहमानों को प्रधानमंत्री के शुभारंभ सत्र से बाहर रहना पड़ा। गेस्ट पास की बंदरबांट के कारण सभा स्थल पूरी तरह भाजपामयी को गया। इसके अलावा राज्य सरकार के सैकड़ों ऐसे अधिकारी कर्मचारी मुख्य सभागार में डेरा जमाकर बैठ गए। इस वजह से कई निवेशकों को एसपीजी के धक्के खाकर लौटना पड़ा। शानदार प्रबंधन के बावजूद सरकारी तंत्र की कमजोरी ने कई खामियां उजागर कीं। इस कारण डेढ़ हजार मेहमानों के लिए सजे पंडाल में पांच हजार से ज्यादा लोग घुस आए। इस कारण निवेशकों से लेकर अति वशिष्ट मेहमानों को एसपीजी ने धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। चायपान से लेकर लंच-डिनर की मेजबानी के लिए गजब का प्रबंध था। बावजूद इसके अनवांटेड  मेहमानों की भीड़ से आयोजन स्थल में भगदड़ मच गई। इस कारण जुगाड़ से पास देकर अंदर भेजे लोगों ने ठाठ-बाठ के साथ सभी सुविधाओं का मजा ले लिया। इसके विपरीत निवेशकों तथा बाहर से बुलाए दूसरे मेहमानों को डाइनिंग हॉल में भी धक्के खाने पड़े। राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम को शिखर तक ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुभारंभ समारोह में पहुंचने से यह इवेंट धरातल से शिखर की ओर उड़ान भरने में सफल हो गया।

इवेंट कवर करने में पिटा सरकारी तंत्र

इवेंट की सफलता को मीडिया तक पहुंचाने के लिए सरकार का सरकारी तंत्र पूरी तरह हांफ गया। इस कारण निवेशकों के उत्साह और निवेश की सूचना खबरनवीसों तक ही नहीं पहुंच पाई। इस इवेंट का जिम्मा कई निजी कंपनियों को दिया था, लेकिन मीडिया में कवरेज का दायित्व सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पास था। यही कारण है कि सरकारी तंत्र इस समारोह की खूबियों को मीडिया तक पहुंचाने की बजाय दूसरे कामों में व्यस्त रहा।

डटी रहीं निजी कंपनियां

निजी कंपनियों ने चौतरफा आलोचना के बावजूद इस इवेंट में अपनी काबिलियत को साबित किया है। खासकर इवेंट पार्टनर आइस कंपनी ने तूफान और भयंकर बारिश के बावजूद इवेंट को कैरी ऑन रखा। भीड़ तथा भगदड़ के बावजूद इवेंट कंपनी ने अंतिम क्षण तक मैदान नहीं छोड़ा। इसी तरह दूसरी कंपनियों ने भी अपना रोल बखूबी निभाने का प्रयास किया। इस पूरे इवेंट में सिर्फ सरकारी तंत्र की कमजोरी सामने आई है।