Saturday, September 21, 2019 04:24 PM

अपने स्वार्थ को पक्ष-विपक्ष एक

डा. विनोद गुलियानी, बैजनाथ

गत दिनों लेखक अनुज आचार्य के ‘न्यू पेंशन स्कीम में सुधार जरूरी’ सराहनीय लेख में कर्मचारी पेंशन विसंगति का कारण होना देश-विदेश की आर्थिक मंदी ही साफ झलकती है। जिसका कारण स्पष्ट करते हुए दिव्य हिमाचल के संपादकीय ‘खरे-खोटे के बीच निवेश’ में हर देश प्रेमी की आत्मा को झकझोरते हुए मानों गागर में सागर भर दिया हो। उपरोक्त लेखों के अतिरिक्त चारों ओर से फिजूल खर्ची पर लगाम लगाने के स्पष्ट संकेतों का धुआं उठना आरंभ हो गया है। धन की बंदर बांट से अब ऐसे लगने लगा है कि मानों ‘पक्ष-विपक्ष’ का विलय अब महापक्ष बन गया है और बाकि समूचा देश ही विपक्ष रह गया है। आज अपने वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए एकजुट हुआ पक्ष-विपक्ष व विकास के नाम पर चुनिंदा ठेकेदारों व विचौलियों को लाभ पहुंचाना हर देशभक्त को एक टीस सा दे रहा है। इस सच्चाई का आकलन कर हमारे माननीयों को स्वार्थ सिद्धि छोड़ते हुए कुछ न्याय संगत सोचना चाहिए।