Tuesday, March 31, 2020 08:11 PM

अपनों का हालचाल जानने को बर्फ में कर रहे 35 किलोमीटर का सफर

केलांग -भारी बर्फबारी के बाद शेष विश्व से कटे लाहुल के लोगों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला से बाहर रह रहे अपनों का हालचाल जानने के लिए यहां करीब 35 किलोमीटर दूर पहुंच लोगों को मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध हो रहा है। या यूं कहें कि बर्फ के बीच जान जोखिम में डाल केलांग पहुंच कर इस घाटी के लोगों को दूरसंचार सुविधा उपलब्ध हो पा रही है। हम बात कर रहे हैं लाहुल की चंद्रा घाटी की। यहां पिछले दो सप्ताह से दूरसंचार व्यवस्था के ठप होने से जहां लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं सैकड़ों मिली दूर बैठे अपनों का हालचाल जानने के लिए लोगों को केलांग जाना पड़ रहा है। चंद्रा घाटी के स्थानीय निवासी अनिल सहगल का कहना है कि भारी बर्फबारी के बाद जहां जिला के अधिकतर क्षेत्रों का संपर्क हर जगह से कटा है, वहीं लोगों को के पास अपनों का हालचाल जानके के लिए दूरसंचार व्यवथा की एक मात्र साधन इस दौरान लाहुल में है। लेकिन बर्फबारी के बाद उसने भी लाहुल के ग्रामीणों का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि चंद्रा घाटी के ग्रामीणों को फोन पर बात करने के लिए जहां क्षेत्र से करीब 35 किलोमीटर दूर केलांग पहुंचना पड़ रहा है, वहीं यह हालात सरकार की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्र घाटी के अधिकतर छात्र जहां जिला से बाहर पढ़ रहे हैं, वहीं उनके परिजन अपने दिल के टूकड़ों का हालचाल जानने के लिए बर्फ में जान जोखिम में डाल घाटी से 35 किलोमीटर दूर जा फोन कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर घाटी में दूर संचार व्यवस्था बहाल होती तो ग्रामीण घर बैठे ही अपनों का हालचाल जान सकते थे। उन्होंने बताया कि चंद्रा घाटी से केलांग तक के रास्ते में जहां ग्लेशियरों के गिरने का खतरा बना रहता है, वहीं लोगों को जाना जोखिम में डाल केलांग पहुंचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केलांग में ही जहां मोबाइल नेटर्वक उपलब्ध हो पा रहा है, वहीं ग्रामीणों की केलांग पहुंचना मजबूरी बन गया है। उल्लेखनीय है कि जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति भारी बर्फबारी के बाद शेष विश्व से कटा हुआ है, वहीं यहां जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है। ऐसे में घाटी में दूरसंचार व्यवस्था ही एक मात्र साधन है, जिस के माध्यम से लोगों अपनों का हालचाल जान सकते हैं, लेकिन वह भी अधिकतर क्षेत्रों में ठप पड़ी हुई है। ऐसे में लोगों को जान जोखिम में डाल बर्फीले रास्तों को तय कर जिला मुख्याल पहुंच कर अपनों का हालचाल जाना पढ़ रहा है। स्थानीय लोगांे का कहना है कि यह पहला अवसर नहीं है, जब लोगों को करीब 35 किलोमीटर दूर जा कर मोबाइल नेटर्वक की सुविधा उपलब्ध हो रही है। सर्दियों में हर साल ऐसे ही हालात यहां देखने को मिलते हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन व सरकार को जहां पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए न कि हर साल हालात खराब करने चाहिए। लोगों का कहना है कि खासकर सर्दियों में लाहुल के हर क्षेत्र में सरकार को दूरसंचार व्यवस्था की सुविधा ग्रामीणों को उपलब्ध करवानी चााहिए। बहरहाल चंद्रा घाटी के लोगों को 35 किलो मीटर का सफर तय कर अपनों का हालचाल जानना पड़ रहा है।