Friday, October 18, 2019 06:04 PM

अफवाह की विभीषिका

-किशन सिंह गतवाल,सतौन, सिरमौर

अफवाह एक ऐसी बिना सिर-पैर की चीज है जो कि समाज का सुख-चैन और विश्वास छीन लेती है और बदले में कुछ नहीं देती। कभी अफवाह बच्चा चोर गिरोह के बारे में आती है तो लोगों में बेचैनी और अविश्वास हो जाता है। कोई कहता उसने अजनबी देखा, कोई कहता बच्चा-चोर का गिरोह होता है, वे सर्वत्र फैले होते हैं। कोई किस वेश में कोई किस वेश में, लोग हर किसी पर शक करते हैं और कई बार बेकसूर भी भीड़ के आक्रोश का शिकार हो जाते हैं। इसी प्रकार सैंकड़ों प्रकार की अफवाहें फैलती हैं और धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। ऐसी अफवाहें फैलाने का कुछ भी उद्देश्य हो पर समाज में उसका बुरा असर पड़ता है और लोग भ्रमित और आतंकित होते ही हैं। और हो सकता है कि असामाजिक तत्त्वों का यही मकसद रहा हो। लोगों का सुख-चैन छिन जाता है और समाज में बड़ा अवसाद फैल जाता है। इस प्रकार की अफवाहों की बारीकी से छान-बीन होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए।