Monday, October 21, 2019 09:10 AM

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ  से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ  के पानी की बूंदें जगह-जगह टपकती रहती हैं...

हर साल लोगों में मन में भगवान शिव के इस धाम पर जाकर दर्शन करने की आस्था बढ़ती ही जाती है। भक्त और भगवान का अटूट संबंध इस बात का संकेत देता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़े, सच्चे भक्त कभी पीछे नहीं हटते। भोलेनाथ के इस धाम पर श्रद्धालु पूरी लगन और शिद्दत के साथ आते हैं। मन में बाबा बर्फानी के दर्शनों की चाहत उन्हें हर संकट से बचाती है।

अमरनाथ यात्रा इस साल 1 जुलाई से शुरू होगी और 15 अगस्त तक चलेगी। अमरनाथ हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 सहस्रमीटर दूर समुद्रतल से 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊंची है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ  से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ  के पानी की बूंदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूंदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ  का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ  का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है, जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग-अलग हिमखंड हैं।

इस साल 1 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है और 46 दिनों तक चलेगी। अमरनाथ यात्रा के लिए एडवांस पंजीकरण शुरू हो गया है। अब तक कई लाख श्रद्धालुओं ने देशभर में पंजीकरण करवा लिया है। सरकार की कोशिश होगी कि यात्री जम्मू से सुरक्षा दस्ते के साथ ही यात्रा पर जाएं। अधिकतर श्रद्धालु सीधे जम्मू में रुके बिना अपने वाहनों से पहलगाम व बालटाल पहुंच जाते हैं। अमरनाथ के दर्शन हर कोई नहीं कर सकता। 12 साल से कम और 75 साल से अधिक उम्र के श्रद्धालु इस यात्रा में हिस्सा नहीं लेते। इसके अलावा जो दिल के मरीज हैं, उन्हें भी यात्रा की इजाजत नहीं दी जाती। इस धार्मिक यात्रा के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों की टीम ही मेडिकल सर्टिफिकेट देती है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मामले में हेलीकॉप्टर से यात्रा करने की योजना बना चुके यात्रियों के लिए चॉपर टिकट ही पंजीकरण माना जाएगा। वहीं यात्रा मार्ग पर आक्सीजन सिलेंडर, जीवन रक्षक दवाइयां, डाक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ  की उपलब्धता, चौबीस घंटे एम्बुलेंस सेवा को सुनिश्चित बनाने का काम जारी है। बाबा बर्फानी की यात्रा धार्मिक दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण है ही यहां के रोचक नजारे भी सबका मन मोह लेते हैं। पांच किमी. की लंबी दुर्गम पैदल यात्रा करने के बाद जब व्यक्ति 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में हिमलिंग के दर्शन करता है, तो उसको एक अलग ही अनुभूति का एहसास होता है।