अर्थशास्त्र में अभिजीत को नोबेल पुरस्कार

भारतीय मूल के अमरीकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है। राजदीप सरदेसाई से खास बातचीत में अभिजीत ने कहा कि वे हाल में भारत में कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से निराश हुए हैं। उन्होंने कहा कि वेलफेयर स्टेट में अमीरों पर टैक्स लगाना और उससे गरीबों की भलाई के लिए काम करना उचित ही है। बनर्जी ने कहा कि अमीरों पर ऊंचा टैक्स लगाने और गरीबों को राहत देने की व्यवस्था सुचारु तरीके से चलती रही है, इसमें कहीं भी विरोधाभास नहीं है। सरकार को यह देखना होगा कि इकोनॉमी अच्छे से चले और गरीबों के प्रति उदार रहे। मुझे नहीं लगता है कि हाई टैक्स रेट से अमीर हतोत्साहित होते हैं। सरकार अमीरों पर ऊंचा टैक्स लगाकर सही काम कर रही है। हमें वेलफेयर स्टेट के लिए ज्यादा टैक्स लगाना होगा, ताकि अर्थव्यवस्था स्थिर हो, लोगों का रोजगार न छिने। इसलिए कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से मैं निराश हूं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को जिस यंग वेल एजुकेटेड शहरी युवा से खास समर्थन मिला है, वह गरीबों को राहत के खिलाफ  नहीं है। चुनाव इस मसले पर नहीं लड़ा गया। लोगों ने यह देखा है कि देश को मजबूती कौन दे रहा है।

प्रारंभिक जीवन : बनर्जी का जन्म कलकत्ता, भारत में हुआ। उनकी माता निर्मला बनर्जी, सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज, कलकत्ता में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर थीं और पिता दीपक बनर्जी, एक प्रोफेसर और कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कालेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख थे। उन्होंने साउथ प्वाइंट हाई स्कूल में पढ़ाई की। स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने साल 1981 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंसी कालेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। बाद में, उन्होंने 1983 में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अर्थशास्त्र में एमए किया।

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