Sunday, July 12, 2020 03:36 PM

अशोक चक्र विजेता मेजर वालिया को नमन

जन्मदिवस पर परिजनों ने अर्पित किए वीर बेटे को श्रद्धासुमन

पालमपुर -अशोक चक्र विजेता शहीद मेजर सुधीर वालिया के परिवार द्वारा गांव बनूरी में शहीद के जन्मदिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। शहीद मेजर सुधीर वालिया के पिता रुलिया राम वालिया, माता राजेश्वरी देवी, बहन आशा देवी, भाभी सिमरन वालिया, जीजा परवीन आहलूवालिया और बच्चों ने वीर सपूत को याद किया। शहीद मेजर सुधीर वालिया का जन्म 24 मई, 1968 को जोधपुर में हुआ था। 1978 में अपने गांव के स्कूल में आरंभिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद सुधीर ने सुजानपुर टिहरा के सैनिक स्कूल में दाखिला लिया था। यह सुजानपुर टिहरा सैनिक स्कूल का पहला बैच था। अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद सुधीर वालिया ने 1984 में खड़गवासला की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश पाया। सुधीर वालिया ने  4 जाट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन पाया। कमीशन पाने के तुरंत बाद  लेफ्टिनेंट सुधीर वालिया को भारतीय शांतिसेना का हिस्सा बना कर श्रीलंका में लिट्टे से लड़ने के लिए भेजा गया। श्रीलंका से वापस आने के बाद सुधीर वालिया स्पेशल फोर्स के लिए वालंटियर हुए । 9जी पैरा भारतीय सेना की एक खास टुकड़ी है, जो पर्वतीय आपरेशन के लिए जानी जाती है। मेजर सुधीर वालिया ने कश्मीर घाटी में बहुत से आपरेशन में इस टुकड़ी का नेतृत्व किया और घाटी में आतंकी संगठनों और उनके सरगनाओं का सफाया किया। ऐसे ही एक कामयाब आपरेशन के लिए उन्हें सेना पदक से नवाजा गया। मेजर सुधीर वालिया की अद्भुत कार्यशैली की वजह से अमरीका ने पैंटागन में अमरीकी सैनिकों को सम्बोधित करते का न्योता दिया, यह एक गैर अमरीकी सैन्य आफिसर के लिए बिरला मौका था। उन्होंने 25  जुलाई, 1999 को 9जी पैरा का नेतृत्व किया और एक दर्जन से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार कर जुलु पोस्ट पर कब्जा कर लिया। 29 अगस्त,1999 को मेजर सुधीर वालिया ने अपने पांच कमांडो के साथ आतंकियों के बहुत बड़े गिरोह पर हमला किया और बीस आतंकवादियों को मार गिराया। इस कार्रवाई में अदम्य साहस का परिचय देने के बाद सुधीर वालिया अमर हो गए। मेजर वालिया को इस अदम्य साहस और आत्म बलिदान के लिए राष्ट्र के सर्वोच्च  वीरता पुरस्कार अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया।