Wednesday, October 23, 2019 08:42 AM

असमंजस में कांग्रेसी, दिल्ली में डटे नेता

कार्यकारिणी में फेरबदल को नहीं मिल रही हरी झंडी, राठौर की प्रभारी से बातचीत

शिमला —राहुल गांधी की वजह से पूरा कांग्रेसी कुनबा असमंजस में है। प्रदेश में भी कुछ नेताओं ने नैतिक जिम्मेदारी लेकर अपने त्यागपत्र दिए, लेकिन इसके बाद यह सिलसिला ठप हो गया। यहां पर कांग्रेस की कार्यकारिणी में फेरबदल और दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव सामने है, लेकिन इस पर कांगे्रस पार्टी कोई फैसला नहीं ले पा रही है।  कांग्रेस के नेता पिछले दो दिन से दिल्ली में डटे हैं, जिनकी वहां पर बातचीत चल रही है, लेकिन कोई नतीजा अभी तक नहीं निकला है। बताया जाता है कि वहां पर पार्टी की प्रभारी रजनी पाटिल और अध्यक्ष कुलदीप राठौर के बीच बातचीत हुई है, जिसमें संगठन के कई मसलों पर चर्चा हुई। हालांकि दिल्ली जाने का एक मकसद राहुल गांधी को मनाने का ही है, जिन पर पूरे देश से दवाब डाला जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा। यहां पर दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं।  इन दोनों ही जगहों पर पहले से कांग्रेस नहीं है, क्योंकि यहां पर भाजपा के विधायक जीते थे और वे आज सांसद बन चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपनी वापसी का एक मौका यहां पर है, लेकिन उसके लिए समय पर रणनीति बनानी भी जरूरी है। लोकसभा चुनाव की तरह यदि कांग्रेस सुस्त रवैये से चलती रही, तो उपचुनाव में भी उसका क्या हश्र होगा यह समझा जा सकता है। इसके साथ यहां पर कार्यकारिणी में बदलाव पर भी चर्चा चल रही है। क्योंकि नए पदाधिकारियों की टीम राठौर ने अभी तक नहीं बनाई है और लोकसभा चुनाव के बाद इसकी अधिक जरूरत देखी जा रही है। क्योंकि चुनाव में पदाधिकारियों की सक्रियता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं, लिहाजा इसमें बदलाव करना जरूरी है, परंतु यह मामला भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ऐसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं और माना जा रहा है कि उनकी वापसी पर यहां संगठन आगे कदम बढ़ाएगा।

पार्टी ने सदस्यता अभियान भी भुला दिया

कांगे्रस अपना सदस्यता अभियान भूल चुकी है। अभियान के लिए उसने शक्ति एप चलाया था, लेकिन चुनाव के बाद उस शक्ति ऐप का क्या हुआ, इसका भी कोई पता नहीं है। फिलहाल कांग्रेस पूरी तरह से बैकफुट पर है और उसे फ्रंटफुट पर लाने के लिए संगठन को एकजुटता से आगे बढ़ाना होगा।