Tuesday, May 21, 2019 06:18 AM

आंखें लाल हो रही हों तो समझो वायरल

ऊना—आंखें लाल होना एक बहुत जल्दी फैलने वाला रोग है। इससे आम तौर पर डाक्टरी भाषा में कंजेक्टीवाइटीज भी कहते हैं। बेशक आंखें लाल होना एक छूत का रोग माना जाता है, लेकिन फिर भी अच्छी व्यक्तिगत सफाई तथा स्वच्छ पर्यावरण से इस रोग की रोकथाम की जा सकती है। यह बात राष्ट्रीय अंधता निवारण संस्था हिमाचल प्रदेश शाखा के राज्य महासचिव कंवर हरि सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि आंखंे लाल होने का रोग अचानक शुरू हो जाता है। रोग होने के चार-पांच घंटे के भीतर यह गंभीर रूप धारण कर लेता है। उपचार में देरी करने से नेत्र ज्योति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। कंवर हरि सिंह ने कहा कि यह रोग बाल, वृद्ध, युवा, स्त्री व पुरुष किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह रोग पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे को शीघ्रता से फैलता है। उन्होंने कहा कि आंखों में खुजली होने से इस रोग की शुरुआत होती है। इससे आंखंे लाल हो जाती है, पलके सूज जाती है। प्रारंभिक अवस्था में ही आंखों में पनीला या पतला सफेद स्त्राव निकलता है। इसके बाद गाढ़ा सफेद अथवा पीलापन लिए स्त्राव आंख में जमा हो जाता है। पलके चिपक जाती है। रोगी को आंख खोलने में कठिनाई होती है और उससे तेज व चमकीला प्रकाश सहन नहीं होता। उन्होंने कहा कि आंखे लाल होने वाले रोगी द्वारा प्रयोग किए रूमाल, तोलिया व वरतन आदि दूषित वस्तुओं से समस्त व्यक्तियों में फैल जाता है। बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति का सूरमा स्वस्थ व्यक्ति की आंखों में लगाने से बीमारी फैल जाती हैं। धुंआ, धूल तथा नहाने धौने के गंदे पानी का प्रयोग करने से यह रोग फैल जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी बीमारी होने पर रोगी के इस्तेमाल में आने वाले रुमाल, तोलिया व वस्त्रों आदि का अन्य व्यक्ति प्रयोग न करें। इन्हें अलग रखे और उबलते पानी व साबुन से धोकर धूप में सुखा लें। भीड़ भाड़ से बचे। इन बच्चों की आंखों में ऐसा रोग है, उन्हें उपचार पूरा होने तक स्कूल न जाने दें। आंखों को तेज रोशनी और चमक से बचाने के लिए गहरे रंग का धूप वाला चश्मा पहने। रोगी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला धूप का चश्मा और न पहने। उन्होंने कहा कि ऐसा रोग होने पर घवराए नहीं, बल्कि अच्छी व्यक्ति गत सफाई व स्वच्छ पर्यावरण से इस रोग की रोकथाम की जा सकती है। इसलिए अच्छी व्यक्तिगत सफाई की जाए तथा आसपड़ोस साफ रखिए। मक्खियों का न बढ़ने दे और भीड़-भाड़ से बचें। आंखंे लाल होना एक बहुत जल्दी फैलने वाला रोग है। इससे आम तौर पर डाक्टरी भाषा में कंजेक्टीवाइटीज भी कहते हैं। बेशक आंखें लाल होना एक छूत का रोग माना जाता है, लेकिन फिर भी अच्छी व्यक्तिगत सफाई तथा स्वच्छ पर्यावरण से इस रोग की रोकथाम की जा सकती है। यह बात राष्ट्रीय अंधता निवारण संस्था हिमाचल प्रदेश शाखा के राज्य महासचिव कंवर हरि सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि आंखंे लाल होने का रोग अचानक शुरू हो जाता है। रोग होने के चार-पांच घंटे के भीतर यह गंभीर रूप धारण कर लेता है। उपचार में देरी करने से नेत्र ज्योति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। कंवर हरि सिंह ने कहा कि यह रोग बाल, वृद्ध, युवा, स्त्री व पुरुष किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह रोग पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे को शीघ्रता से फैलता है। उन्होंने कहा कि आंखों में खुजली होने से इस रोग की शुरुआत होती है। इससे आंखंे लाल हो जाती है, पलके सूज जाती है। प्रारंभिक अवस्था में ही आंखों में पनीला या पतला सफेद स्त्राव निकलता है। इसके बाद गाढ़ा सफेद अथवा पीलापन लिए स्त्राव आंख में जमा हो जाता है। पलके चिपक जाती है। रोगी को आंख खोलने में कठिनाई होती है और उससे तेज व चमकीला प्रकाश सहन नहीं होता। उन्होंने कहा कि आंखे लाल होने वाले रोगी द्वारा प्रयोग किए रूमाल, तोलिया व वरतन आदि दूषित वस्तुओं से समस्त व्यक्तियों में फैल जाता है। बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति का सूरमा स्वस्थ व्यक्ति की आंखों में लगाने से बीमारी फैल जाती हैं। धुंआ, धूल तथा नहाने धौने के गंदे पानी का प्रयोग करने से यह रोग फैल जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी बीमारी होने पर रोगी के इस्तेमाल में आने वाले रुमाल, तोलिया व वस्त्रों आदि का अन्य व्यक्ति प्रयोग न करें। इन्हें अलग रखे और उबलते पानी व साबुन से धोकर धूप में सुखा लें। भीड़ भाड़ से बचे। इन बच्चों की आंखों में ऐसा रोग है, उन्हें उपचार पूरा होने तक स्कूल न जाने दें। आंखों को तेज रोशनी और चमक से बचाने के लिए गहरे रंग का धूप वाला चश्मा पहने। रोगी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला धूप का चश्मा और न पहने। उन्होंने कहा कि ऐसा रोग होने पर घवराए नहीं, बल्कि अच्छी व्यक्ति गत सफाई व स्वच्छ पर्यावरण से इस रोग की रोकथाम की जा सकती है। इसलिए अच्छी व्यक्तिगत सफाई की जाए तथा आसपड़ोस साफ रखिए। मक्खियों का न बढ़ने दे और भीड़-भाड़ से बचें।