Sunday, July 25, 2021 09:07 AM

आंगनबाड़ी कुक्कुट विकास योजना का उठाएं लाभ

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — कुल्लू जिला कुल्लू की कलैहली पंचायत में शनिवार को 313 लोगों की कोविड टेस्टिंग की गई। गनीमत यह रही कि सभी लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पंचायत के साथ मिलकर लोगों का कोरोना टेस्ट किया। लोगों को इस दौरान कोविड से बचाव के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। यहां पर स्वास्थ्य विभाग की पीएचसी न्यूल की प्रभारी डा. उषा शर्मा व उनकी टीम ने लोगों के टेस्ट किए। पंचायत प्रधान फूला देवी सहित अन्य प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहे।

पंचायत प्रधान फूला देवी ने बताया कि कोविड.-19 के खतरे को कम करने के लिए पंचायत के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर विभिन्न स्थानों पर जाकर टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा किया है। इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को जागरूक भी किया और सरकार के निर्देशों की पालना करने को भी कहा। कलैहली पंचायत प्रधान फूला देवी ने बताया कि उन सभी लोगों के टेस्ट किए गए हैं। जिन्हें बुखार, जुखाम या दूसरे प्रकार के लक्षण है तो वही अन्य लोगों के कोरोना टेस्ट भी लिए गए हैं।

कलैहली-तलपीणी-पलालंग में सैकड़ों लोगों की हुई कोविड टेस्टिंग, दो सप्ताह तक चलेगा अभियान स्टाफ रिपोर्टर-भुंतर जिला कुल्लू के जरी खंड ने विभिन्न पंचायतों में जाकर कोरोना जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विभाग ने दो सप्ताह तक कोविड टेस्टिंग को लेकर शेड्यूल जारी किया है और इस बारे में संबंधित डाक्टरों व अन्य कर्मियों को भी निर्देश दिए हैं। लिहाजा, कोरोना पर काबू पाने के लिए विभाग अब फील्ड में पूरी तरह से उतरने के मूड में हैं। इसी कड़ी में जिला कुल्लू की पंचायतों में शनिवार को भी कोरोना टेस्ट लिए गए। जानकारी के अनुसार शनिवार को कलैहली के अलावा तलपीणी, खजियारी, कश्लाधी, टिपर व पलालंग में कोविड टेस्टिंग की गई। इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को जागरूक भी किया और सरकार के निर्देशों की पालना करने को भी कहा। कलैहली पंचायत प्रधान फूला देवी ने बताया कि उन सभी लोगों के टेस्ट किए गए हैं, जिन्हें बुखार, जुखाम या दूसरे प्रकार के लक्षण हैं तो साथ ही अन्य लोगों के टेस्ट भी लिए गए हैं। दूसरी ओर जरी की खंड स्वास्थ्य अधिकारी डा. सपना शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के खतरे को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न स्थानों पर जाकर टेस्ट की प्रक्रिया तेज कर दी है।

उन्होंने बताया कि इसके तहत 13 जून रविवार को पिपलागे में डा. पारूल वैद्य व जां-एक, जां-दो, धरमौर व छिंजरा में डॉ अमल ठाकुर की अगवाई में टेस्टिंग की जाएगी। इसके अतिरिक्त 14 जून को खणी पांधे में डा. नम्रता विद्यार्थी, शमशी में डा. प्रेम लाल, भोसा में डा. पारुल वैद्य, 15 जून को डिंग-डिंगी माशना में डा. नम्रता विद्यार्थी, मौहल में डा. प्रेम लाल, शियाह बिहाली में डा. पारुल वैद्य, 16 जून को कसोल में डा. अमन ठाकुर, लोट में डा. नम्रता विद्यार्थी, 17 को खानी व भूमतीर में, 18 को रुआड़-गड़सा, व दली, 19 जून को बागीसेरी, बजौरा व भुट्टी-रोपड़ी में, 20 जून को ओसन व छलाल कटागला में तथा 21 जून को पियाशनी में डा. पारुल, न्यूल में ऊषा शर्मा व ग्रामंग दो में डा. नम्रता विद्यार्थी की अगवाई में सैंपल एकत्रित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस बारे में सभी कर्मियों व फील्ड स्टाफ को सूचना दी गई है।

कलैहली में 344 सैंपल लिए जिला कुल्लू की कलैहली पंचायत में शनिवार को कोविड टेस्टिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने 344 लोगों के सैंपल लिए। इस दौरान कोविड से बचाव के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। पीएचसी न्यूल की प्रभारी डा. उषा शर्मा व उनकी टीम ने लोगों के टेस्ट किए। पंचायत प्रधान फूला देवी सहित अन्य प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहे।

तीन साल में दस फीसदी काम पूरा नहीं कर पा रहा महकमा, गांव में पानी को हाहाकार स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर जिला कुल्लू के हवाई-शियाह के ग्रामीणों का पानी जलशक्ति विभाग और कार्य एजेंसियों की सुस्ती कारण गड़सा में फंस गया है। यहां के लिए करीब दो दशक पहले से उठाऊ जल योजना के तहत पानी उठाने का सपना दिखाया जा रहा है, लेकिन अभी तक यह नलकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। दूसरी ओर ग्रामीणों को पानी की बंूद-बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। लिहाजा, इस सुस्ती पर अब लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बता दें कि घाटी के लिए हवाई शियाह-मंझली पेयजल योजना का कार्य साल 2014 में आरंभ हुआ था। हालांकि योजना का खाका 2006-07 से बन रहा था, लेकिन 2021 आने पर भी स्कीम राम भरोसे है। करोड़ों रुपए की इस योजना का 90 फीसदी कार्य साल 2018 में ही हो चुका था। फरवरी, 2019 में स्थानीय विधायक ने जब इसका ब्यौरा मांगा था तो उस दौरान विभाग की ओर से यह जवाब दिया गया था कि कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन बचा हुआ दस फीसदी कार्य तीन अढ़ाई साल में भी पूरा नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार काम को लेकर जलशक्ति और बिजली बोर्ड के बीच ही सालों तक आपसी गुथमगुत्थी होती रही और एक-दूसरे पर काम को अधूरा होने के आरोप लगाते रहे। जानकारी के अनुसार बिजली बोर्ड ने ट्रांसफार्मर व मशीनों को लगाने सहित अपना कार्य पूरा कर लिया है और पानी छोडऩे को तैयार है, लेकिन जल शक्ति विभाग का कार्य अभी अधूरा बचा है।

जानकारी के अनुसार टैंकों व मेन पाइपलाइन का कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन टैंक से घर-घर के लिए बिछने वाली आधा इंच की पाइपलाइन का कार्य अधूरा बचा हुआ है। इस कारण से पानी की सप्लाई आरंभ नहीं हो पा रही है। काम को लेकर लेट लतीफी पर लोग अब विभाग सहित कार्य एजेंसी से खफा हंै तो सरकार से भी नाराजगी बढऩे लगी है। लोगों का कहना है कि अगर दस फीसदी काम करने में सालों लग रहे हैं तो यह चिंताजनक है। लोगों ने अब विभाग व सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर जल्द से जल्द इस योजना को आरंभ नहीं किया गया तो विभाग का घेराव किया जाएगा। वहीं, सरकार को भी इसका जवाब चुनावों में दिया जाएगा। उधर, जलशक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता रविंद्र कुमार शर्मा के अनुसार योजना का कुछ ही कार्य बचा है और इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पानी को बहाल कर दिया जाएगा। उधर, सुरेंद्र शौरी, विधायक, बंजार ने कहा कि योजना का कार्य अंतिम चरण में है और जलशक्ति विभाग को जल्द काम निपटाने को कहा गया है, ताकि लोगों की समस्या दूर हो सके।

रुना से जुंडवा सड़क पर आवाजाही बंद

स्टाफ रिपोर्टर — आनी पीडब्ल्यूडी के दलाश सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले रुना से जुंडवा सड़क मार्ग को चकाचक करने का कार्य इन दिनों जोरों पर है। जुंडवा से रुना की ओर शुक्रवार से टायरिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसके चलते 18 तक इस सड़क मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को बंद करने के आदेश दलाश सब-डिवीजन के एसडीओ के आग्रह पर एसडीएम आनी चेत सिंह ने जारी कर दिए हैं। आदेशों के अनुसार अब वाया निगाली कैंची होकर वाहनों की आवाजाही होगी। पीडब्ल्यूडी विभाग के जेई हिमांशु कटोच का कहना है कि यह टायरिंग कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का विभाग का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड के तहत कुछ सालों पहले बनकर तैयार हुई रुना से जुंडवा तक साढ़े पांच किलोमीटर लंबी इस सड़क में दूसरी स्टेज का काम चला हुआ है, जिसमें तीन करोड़ 26 लाख रुपए की कुल लागत से नालियां बनाने, कलवर्ट डालने, डब्ल्यू बीम रेलिंग लगाने, सुरक्षा दीवारें और डंगे लगाने और सड़क को पक्का करने आदि कार्य किए जा रहे हैं, जो 15 दिनों के भीतर पूरा कर दिए जाएंगे। आपको बता दें कि इस सड़क के बनने के बाद आनी से दलाश के बीच की दूरी घटकर करीब 13 किलोमीटर रह गई है, जबकि वाया चवाई होकर दलाश 28 किलोमीटर है, जबकि आनी बशता सड़क मार्ग होकर वाया निगाली कैंची दलाश की दूरी करीब 22 किलोमीटर है।

हीरा लाल ठाकुर — भुंतर कोरोना संक्रमण के बीच बाहरी राज्यों के कामगारों को रोजगार के सारे इंतजाम करने वाली सरकार मनरेगा में काम कर रहे अपनों को काम दिलाना भूल गई। केंद्र सरकार की जिस मनरेगा योजना से कोरोना काल में सबसे ज्यादा सहारा लोगों को मिला है, उसके कामों में कुल्लू जिला में लगने वाली सामग्री का करीब 2.92 करोड़ रुपए से अधिक का पैसा केंद्र ने रोक दिया है। पूरे प्रदेश की बात करें तो करीब 26 करोड़ की राशि का भुगतान न होने से योजना के कार्य लटके हुए हैं। जानकारी के अनुसार कुल्लू जिला में मनरेगा के तहत अब तक करीब 11 करोड़ रुपए का का कार्य हुआ है और जिला में 21598 परिवारों ने योजना में इस साल काम किया है, लेकिन योजना के लिए मैटीरियल न मिलने के चलते पिछले दो माह से हजारों लोग काम नहीं कर पा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार जिन 21598 लोगों ने रोजगार लिया है उनमें 18584 परिवार 30 दिनों से ज्यादा का रोजगार नहीं ले पाए हैं। कुल्लू में वर्तमान में मनरेगा के तहत 3.19 करोड़ का भुगतान होना बाकी है और इसमें 2.92 करोड़ मैटीरियल का है।

मैटीरियल का भुगतान न होने से टैंकों का निर्माण, सड़क को पक्का करने, पेवर लगाने व सामुदायिक भवन बनाने के कार्य नहीं हो पा रहे हैं। केवल भूमि सुधार और खुदाई संबंधित कार्य ही योजना के तहत वर्तमान में हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि भुगतान की समस्या उन पंचायतों को सबसे ज्यादा हो रही है, जिनके फंड ट्रांसफर ऑर्डर अर्थात एफटीओ देरी से प्रोसेस हुए हैं। ऐसी पंचायतों में काम रुक गए हैं, जबकि कुछ ही पंचायतों को शुरुआती काम करने के लिए मैटीरियल मिल रहा है। भुगतान न होने के कारण कामगारों के साथ पंचायत प्रतिनिधि व जिला के अधिकारी भी परेशानी में हंै। बता दें कि पिछले दो माह में कोरोना संक्रमण के हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने बड़े प्रयास किए हैं। इसके तहत बाहरी राज्यों के जो प्रवासी कामगार है, उनके लिए मैटीरियल की कमी न हो, इस खातिर हार्डवेयर की दुकानें खुलवाई, परंतु अपने कामगारों के लिए मैटीरियल का पैसा प्रदेश सरकार केंद्र से नहीं मांग पाई। इससे लोगों व पंचायत प्रतिनिधियों में सरकार के प्रति गुस्सा भी है। उधर, देवेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, कुल्लू खंड प्रधान संघ का कहना है कि मेटीरियल न मिलने के कारण काम रुक गए हैं और कामगारों को काम भी नहीं मिल पा रहा है। केंद्रीय मंत्री को भी इस बारे में पत्र लिखा गया है। (एचडीएम)

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — कुल्लू पशुधन जिला कुल्लू के किसानों के जीवन का अह्म हिस्सा है। वर्तमान में जिला में गोधन की संख्या लगभग 1.56 लाख है, जो 40 हजार से अधिक परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बनी है। किसान गोवंश से न केवल दुग्ध उत्पादन कर आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि फसलों तथा बागानों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक खाद भी उपलब्ध हो रही है। बहुत से बागबान सेब, अनार व अन्य फलों को कीटों से बचाने के लिए गोमूत्र का छिड़काव करके इसका समुचित उपयोग करके कीटनाशकों रहित फसलें उगाकर अच्छे दाम अर्जित कर रहे हैं। विभाग के उपनिदेशक संजीव नड्डा का कहना है कि पशु पालन विभाग लोगों की आर्थिकी को संबल प्रदान करने के लिए अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है। विभाग द्वारा संचालित की जा रही आंगनबाड़ी कुक्कुट विकास योजना जिला कुल्लू में गरीब लोगों की आमदन का मुख्य स्रोत बनी है। योजना के अंतर्गत जिला में अधिक से अधिक पशु पालक आंगनबाड़ी कुक्कुट विकास योजना को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में इजाफा कर रहे हैं। जिला में योजना के तहत पशु पालकों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है तथा पशु पालक इसे निरंतरता प्रदान करते हुए स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं। इससे जहां उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही हैए वहीं घर द्वार पर पोषक तत्त्वों से भरपूर मीट, चिकन के अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं। पशु पालन विभाग कुल्लू द्वारा इस वर्ष जिला में आंगनबाड़ी कुक्कुट विकास योजना के अंतर्गत मई माह तक विभिन्न वर्गों के 1.179 लाभार्थियों को 65.442 चूजे वितरित किए गए हैं।

अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों के लिए संचालित की जा रही 200 चिक्स स्कीम के तहत अनुसूचित जाति के 40 हजार रुपए से कम आय वाले बीपीएल परविारों के 65 लाभार्थियों को 100 प्रतिशत अनुदान पर 200 चूजे, आहार तथा चूजों के लिए दाना खाने तथा पानी पीने के बरतन दिए गए। योजना के तहत मुर्गी पालकों को तीन दिन का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है तथा पशु चिकित्सालय पर आने-जाने के किराया के अतिरिक्त 200 रुपए प्रतिदिन दैनिक भत्ता भी प्रदान किया गया। पांच हजार ब्रॉयलर फार्म योजना में स्वयं रोजगार हेतु पांच लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अनुदान दिया गया। इन्हें तीन चक्रों में प्रति चक्र एक हजार ब्रॉयलर चूजे तथा 30 क्विंटल ब्रॉयलर आहार प्रदान किया गया। इसी प्रकार 600 ब्रॉयलर फार्म योजना में बेरोजगार युवकों, कमजोर वर्ग एवं महिलाओं के उत्थान हेतु लाभार्थियों को 100 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर लाभान्वित किया गया। इन्हें भी तीन चक्रों में प्रति चक्र 150 ब्रॉयलर चूजे तथा 5.25 क्विंटल ब्रॉयलर आहार दिया गया। इस वर्ष दो माह के दौरान सामान्य वर्ग के 1860 बीपीएल लाभार्थियों को उनकी गर्भित गायों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान पर 518.606 मीट्रिक टन गर्भाकाल आहार का वितरण कर लाभान्वित किया गया।