Tuesday, September 17, 2019 03:48 PM

आईएएमडी सेंटर बना वरदान

सोलन - देश का एकमात्र आईएएमडी रिसर्च सेंटर कोंठो मस्कुलर डिस्ट्रॉफी ग्रसित मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेश से भी यहां मरीज आ रहे हैं व रिसर्च सेंटर का लाभ उठा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रस्त मरीज को टिल्ट थैरेपी से उपचार दिया जाता है। गौर रहे कि देश के किसी भी निजी व सरकारी अस्पताल में अभी तक मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का उपचार नहीं है व प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक वर्ष करीब चार हजार बच्चे ऐसे पैदा होते हैं, जो इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं। हिमाचल प्रदेश में इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं। हिमाचल प्रदेश में इस बीमारी के रोगियों की संख्या करीब 500 है। कोंठो में स्थित इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रिसर्च सेंटर ने देशभर के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है। साथ ही इस सेंटर में उपचार के साथ-साथ शोध कार्य भी किए जा रहे हैं। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रिसर्च सेंटर कोंठो के संचालक विपुल गोयल ने बताया कि सेंटर द्वारा लगभग देशभर के 500 से अधिक मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्पेशल मीडिया के माध्यम से देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी मरीज उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़, हरियाणा, मुंबई, दिल्ली व अन्य राज्यों से लोग यहां उपचार के लिए आ रहे हैं व अब तक करीब 500 लोग इस रिसर्च सेंटर में उपचार ले चुके हैं।

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इनसान की शक्ति क्षीण हो जाती है तथा मसल्स कमजोर होने के साथ सिकुड़ने लग जाती हैं। बाद में यह टूटने लगती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह एक तरह का अनुवांशिक रोग है, जिसमें रोगी में लगातार कमजोरी आती है और उसकी मांसपेशियों का विकास रुक जाता है। इसके अलावा कंकालीय पेशियां (स्केलेटल मसल्स) नष्ट होने लगती हैं। इस बीमारी में मांसपेशियों की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। धीरे-धीरे इस बीमारी में मस्तिष्क और स्नायु तंत्र के मध्य सामंजस्य बिगड़ने लगता है तथा प्रोटीन बनने की क्रिया बाधित हो जाती है। इस कारण से मांसपेशियों का विकास रुक जाता है।