Friday, October 18, 2019 05:37 PM

आईजीएमसी में सीटू का हल्ला बोल, निशाने पर मैनेजमेंट

शिमला -शिमला के आईजीएमसी में कर्मचारियों में आपसी विवाद ज्यादा बढ़ गया है। इसी के तहत सीटू जिला कमेटी शिमला के आह्वान पर आईजीएमसी शिमला के विरूद्ध धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान जिला कमेटी ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन कर्मचारियों व मरीजों के विरुद्ध फैसला ले रहा है। सीटू जिला कमेटी ने चेताया है कि अगर आईजीएमसी प्रशासन ने अराजक तत्वों ने अपनी कार्यप्रणाली न बदली व मजदूरों को तंग करना बंद न किया तो सीटू आईजीएमसी में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर देगा। सीटू जिला कमेटी उपाध्यक्ष किशोरी ढटवालिया, विनोद बिरसांटा, जिला सचिव बालकराम, हिमी देवी, ने प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि आईजीएमसी व पुलिस प्रशासन से आईजीएमसी के पर्ची काउंटर के सामने वाले दरवाजे पर सीटू राज्याध्यक्ष पर हुए हमले पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए सभी सीसीटीवी वीडियो फुटेज कब्जे में लिए जाएं। उन्होंने कहा कि पिछले काफी महीनों से आईजीएमसी शिमला में निजी सिक्योरिटी सर्विस के प्रबंधन व उनके संरक्षण में कई सिक्योरिटी ऑफिसर अराजकता फैला रहे हैं। इस संदर्भ में सीटू जिला कमेटी ने 21 जून 2019 को चिकित्सा अधीक्षक से मुलाकात करके पूरे मसले की शिकायत की थी। उसके उपरांत भी टेलीफोन के माध्यम से सीटू राज्य नेतृत्व ने इस संदर्भ में उन्हें बार-बार सूचित किया था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इतनी बार शिकायत करने के बावजूद चिकित्सा अधीक्षक ने इन घटनाओं का कोई संज्ञान नहीं लिया। प्रदर्शन के दौरान महिला सुरक्षा कर्मचारियों संदीपा, रीता, हेमलता, सुरेंद्रा, नीलम, मीरा ने आईजीएमसी के प्रधानाचार्य के समक्ष रोकर अपनी व्यथा सुनाई कि चिकित्सा अधीक्षक के संरक्षण में कुछ अराजक सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा उन्हें लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानाचार्य व चिकित्सा अधीक्षक को एक ऑडियो भी सुनवाया, जिसमें देवराज बबलू कह रहा है कि मैं कुछ लड़कियों को आगे करके सीटू नेताओं को झूठे मुकद्दमों में फंसा दूंगा। यह सब चिकित्सा अधीक्षक के संरक्षण व शह के बिना संभव नहीं है। इस दौरान विधवा महिला व सिंगल लेडी संदीपा जिसके 6 व 8 साल के छोटे बच्चे हैं व जिसे जबरन नौकरी से निकाल दिया गया है, उस पर इन अराजक तत्वों ने हमला कर दिया, जिससे वह बेहोश होकर गिर गई। इस दौरान प्रधानाचार्य के हस्तक्षेप के बाद डा. राहुल गुप्ता को ड्यूटी रोस्टर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि सारे विवाद पर ही अंकुश लग जाए। यह भी तय हुआ कि अब ड्यूटियां मनमर्जी से नहीं बल्कि ड्यूटी रोस्टर के आधार पर होंगी। प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि आईजीएमसी में सभी तरह की अराजकता व अनुशासनहीनता पर रोक लगेगी।