Monday, June 24, 2019 05:30 PM

आज के संदर्भ में पुस्तक मेलों का औचित्य

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की ओर से धर्मशाला में पुस्तक मेले का आयोजन 27 अप्रैल से पांच मई तक किया जा रहा है। यह मेला पुलिस ग्राउंड, धर्मशाला में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि आठ बजे तक लगा करेगा। कांगड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से लगने वाले इस मेले में प्रवेश निशुल्क है तथा सभी पुस्तकों पर 10 प्रतिशत की छूट है। यह अवसर हमें पुस्तक मेलों के औचित्य पर पुनर्विचार का मौका देता है। संप्रति, आज पुस्तक मेलों का क्या औचित्य है, इसी प्रश्न की चीर-फाड़ करता यह आलेख:

पुस्तकों के प्रति पाठकों के घटते प्रेम के बीच आज बार-बार यह सवाल पूछा जाता है कि क्या पुस्तक मेले अपना औचित्य खो चुके हैं। इस नजरिए से देखें तो हम कह सकते हैं कि पुस्तकें अनमोल हैं। वे हमारी सबसे अच्छी मित्र हैं क्योंकि वे ज्ञान-विज्ञान की भंडार हैं। व्यक्ति आते हैं और चले जाते हैं, किंतु उनके श्रेष्ठ विचार, ज्ञान, उपदेश, संस्कृति, सभ्यता, मानवीय मूल्य पुस्तकों के रूप में जीवित रहते हैं। उनका विनाश नहीं होता। वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्राप्त होते रहते हैं। उदाहरण के लिए हमारे वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, हमारा इतिहास-सभी आज जीवित हैं, हमारे पास हैं। ये सभी ग्रंथ हजारों साल पहले रचे गए थे, परंतु आज भी वे हमें प्रकाश और प्रेरणा दे रहे हैं।

आज गांधी जी भौतिक रूप में हमारे सामने नहीं हैं, परंतु उनका इतना श्रेष्ठ साहित्य हमारे साथ है। वह सतत हमारा मार्गदर्शन करता रहता है। आज के इस युग में जहां जीवन-मूल्यों का हृस हो रहा है, चारों ओर नैतिक और सांस्कृतिक संकट के बादल छाए हुए हैं, सत् साहित्य का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे समय पर यह जरूरी हो जाता है कि हम पुस्तकों का प्रचार-प्रसार बढ़ाएं, उनके अध्ययन में रुचि लें और उनसे अधिकाधिक लाभ उठाएं। अच्छी पुस्तकों के अध्ययन का तात्पर्य है श्रेष्ठ व्यक्तियों और उनके विचारों को जानना-समझना, उनसे घनिष्ठ मित्रता स्थापित करना। उनसे अच्छा मित्र और कोई नहीं। इस परिप्रेक्ष्य में पुस्तक मेले हमारे लिए वरदान हैं। ये पाठकों और लेखकों के संगम होते हैं। यहां पर सभी विषयों पर सभी प्रकार की पुस्तकें सरलता से मिल जाती हैं। पाठक अपनी रुचि, योग्यता और आवश्यकता के अनुसार पुस्तकों का चुनाव कर सकते हैं। वे पुस्तकों के पृष्ठ उलट-पुलट कर उनकी गुणवत्ता, विषयसूची, विवरण आदि को देख-पढ़ सकते हैं।

विषय, मूल्य आदि की विविधता चुनाव को और भी सरल, सहज और सरस बना देती है। इसके अतिरिक्त एक पाठक दूसरे पाठक से विचारों का आदान-प्रदान कर सकता है व पुस्तक विक्रेताओं से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है। इन मेलों में पुस्तकों पर चर्चाएं और गोष्ठियां होती हैं। ये सभी पाठकों के लिए बहुत लाभदायक रहती हैं। दिल्ली में इंडिया गेट पर लगने वाले पुस्तक मेले की चर्चा करें तो इसमें दिल्ली के अतिरिक्त बाहर के अनेक पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक आते हैं। स्टालों पर पुस्तकें बड़े आकर्षक ढंग से सजी होती हैं। इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों पर पुस्तकें यहां मिल जाती हैं। देश की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं की पुस्तकें यहां आसानी से मिल जाती हैं। इनमें हिंदी व अंग्रेजी की पुस्तकें ज्यादा होती हैं। पत्र-पत्रिकाएं भी यहां पर मिल जाती हैं। अनेक स्कूलों के विद्यार्थी इस मेले में आते हैं। माता-पिता और दूसरे लोग भी यहां बड़ी संख्या में आते हैं। यहां बच्चे पुस्तकें खरीदने में व्यस्त रहते हैं। युवा व बुजुर्ग भी यहां पुस्तकें खरीदने आते हैं। सभी स्तर और रुचि के लोगों के लिए यहां यथेष्ट सामग्री रहती है। कई पुस्तक-विक्रेता नए वर्ष का कैलेंडर व डायरी आदि पुस्तकों के साथ उपहार में देते हैं। 

पुस्तक मेलों में विभिन्न प्रकार की किताबें बिक्री और प्रदर्शनी के लिए लाई जाती हैं। वास्तव में पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों के लिए महान उत्सव का अवसर माना जाता है। ये मेले आम तौर पर देश के प्रमुख शहरों में से अधिकांश में एक खुली जगह पर सर्दियों और गर्मियों के मौसम में आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही कई प्रकाशक शहीदी दिवस, विजय दिवस और स्वतंत्रता दिवस आदि पर पुस्तक प्रदर्शनियां भी लगाते हैं। यह भी माना जाता है कि पुस्तक मेले व प्रदर्शनियां लोगों में किताबें पढ़ने की आदत विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये संस्कृति, शिक्षा व ज्ञान का प्रसार करने में उपकरण की तरह काम करते हैं। ये जीवन पर हमारे दृष्टिकोण में परिवर्तन भी लाते हैं। ऐसे समय में जबकि पुस्तकें पढ़ने की परंपरा अब धूमिल होती जा रही है, क्या पुस्तक मेले कोई औचित्य रखते हैं, यह सवाल आज खासकर उभर रहा है। पुस्तकें पढ़ने के कम होते शौक को अगर फिर से जगाना है, तो पुस्तक मेलों व प्रदर्शनियों को इस दिशा में महती भूमिका अदा करनी होगी। पाठकों में इन मेलों व प्रदर्शनियों के जरिए पढ़ने का शौक और जज्बा पैदा किया जा सकता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि पुस्तक मेलों का औचित्य आज पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि घटते पुस्तक प्रेमियों के इस युग में उनमें जज्बा पैदा करने की भूमिका निभाने के लिए पुस्तक मेलों को अब तैयार हो जाना चाहिए।

किताबों पर अनमोल विचार

  1. किताबों में इतना खजाना छुपा है, जितना कोई लुटेरा कभी लूट नहीं सकता।
  2. पुस्तक एक बागीचा है जिसे जेब में रखा जा सकता है।
  3. किताब पढ़ना हमें अकेले में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी देता है।
  4. किताबें वह साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।
  5. किसी मूर्ख इनसान के लिए किताबें उतनी ही उपयोगी हैं जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।
  6. पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है।
  7. आज के लिए और सदा के लिए सबसे बड़ा मित्र है अच्छी पुस्तक।
  8. पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी अधिक है क्योंकि पुस्तकें अंतःकरण को उज्ज्वल करती हैं।
  9. बोलने से पहले सोचो, सोचने से पहले पढ़ो।
  10. किताबों के बगैर घर खिड़कियों के बिना कमरे के समान है।
  11. विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही अस्त्र हैं।
  12. नई पुस्तकों के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि वे हमें पुरानी पुस्तकें पढ़ने से दूर रखती हैं।
  13. किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं।
  14. अच्छी किताबें और सच्चे दोस्त तुरंत समझ में नहीं आते।
  15. एक अच्छी किताब पढ़ने का पता तब चलता है जब आखिरी पन्ना पलटते हुए आपको लगे कि आपने एक दोस्त को खो दिया।

पुस्तकों पर प्रसिद्ध टिप्पणियां

‘किताबों के बिना कमरा आत्मा रहित शरीर के समान है।’     -मारकस टुलियस सिसरो

‘अच्छी किताबें अच्छे दोस्तों के समान होती हैं।’                                 -मार्क ट्वेन

‘मैं कल्पना करता हूं कि स्वर्ग एक प्रकार का पुस्तकालय होगा।’        -जॉर्ज लुईस

‘अगर आप केवल वही किताबें पढ़ते हैं जो अन्य लोग पढ़ते हैं तो आप केवल वही सोच सकते हैं जो अन्य सोच रहे होते हैं।’

                                -हारुकी मुराकामी

‘उस व्यक्ति पर विश्वास मत करो जो अपने साथ किताब नहीं रखता है।’

                                                                        -लेमोनी स्निकेट

‘अगर कोई व्यक्ति एक  पुस्तक को बार-बार पढ़ने का मजा नहीं ले सकता तो वास्तव में इसे पढ़ने का कोई लाभ नहीं है।’

                                                                        -ऑस्कर वाइल्ड

‘पुस्तक जितना वफादार कोई मित्र नहीं होता।’                      -अर्नेस्ट हेमिंग्वे

‘किताब के भीतर जो शब्द होते हैं, उनमें हमें बदलने की शक्ति होती है।’

                                                                          -कैसांड्रा क्लेयर