Wednesday, May 27, 2020 11:31 AM

आज भी अर्पित किया जाता है जिंदा बकरा

श्रीरेणुकाजी- अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले में भगवान परशुराम की पालकी के सामने आज भी बकरे गुडने की प्रथा जारी है। गिरि नदी पर पहुंचे भगवान परशुराम चांदी की पालकी में विराजमान थे। ग्रामीण लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर उन्हें बकरे की भेंट दे रहे हैं। पहले इन बकरों की बलि चढ़ाई जाती थी, लेकिन समय बदलने के बाद इन बकरों को जिंदा ही चढ़ाया जाता है। धारटीधार के नरेश कुमार भगवान परशुराम मंदिर कटाहं मंदिर कमेटी के प्रधान अमर सिंह इत्यादि कई श्रद्धालुओं ने बताया कि परशुराम भगवान की कृपा से उनके कई काम हुए हैं। देवता के साथ आए जामूकोटी मंदिर के प्रधान बिंदू ने बताया कि सदियों पुरानी बकरे की बलि देने की प्रथा आज भी जारी है। सिर्फ अंतर आया है तो बकरा काटकर नहीं बल्कि जिंदा चढ़ाया जा रहा है। यह बकरे देवता के पुजारी ले जाते है। कंवर अजय बहादुर सिंह ने बताया कि देवता की गरणी के बाद ही बलि देने की प्रथा बंद की गई है जो आज के समय मंे प्रासंगिक नहीं है। रेणुका परशुराम मंदिर के पुजारी रमेश कपिला ने बताया कि लोग अभी प्राचीन संस्कृति से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते लोग बकरों की बलि अब नहीं चढ़ाते केवल जिंदे बकरे पालकी में चढ़ा दिए जाते हैं