Saturday, July 04, 2020 05:32 PM

आज भी मेजर सुभाष के आने का इंतजार

1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में दुश्मनों के छुड़ाए थे पसीने, पड़ोसी देश की लाहौर जेल में कैद धर्मशाला के जांबाज का आज तक नहीं लगा कोई पता, परिवार अभी भी देख रहा राह

धर्मशाला-हिमाचल प्रदेश के जांबाज मेजर सुभाष गुलेरी का 27 मई को जन्मदिन हैं। इनका जन्म 27 मई, 1939 को वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के वकील पंडित विशन दास गुलेरी के घर हुआ था। इनका संबंध भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी के परिवार से है। सुभाष कालेज की पढ़ाई पूरी कर सेना में भर्ती हो गए। इन्होंने 1965 के पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भी सीमा पर बढ़-चढ़कर भाग लिया था। इनके शेर दिल जैसे हौसले को देखते हुए इन्हें कई गैलंटरी अवार्ड भी मिले। 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भी मेजर सुभाष गुलेरी सीमा पर तैनात थे और शत्रुओं के छक्के छुड़ा दिए थे। फिर बाद में युद्ध में उनके शहीद होने की खबर परिवार को मिली। बाद में पता चला कि उन्हें लाहौर की लखपत जेल में बंद रखा गया है। पाकिस्तान के रेडियो से उनके जीवित होने का प्रसारण भी आया था। भारत सरकार के अनुसार 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की जेलों में 54 सैनिक युद्धबंदी हैं और उस सूची में मेजर गुलेरी का नाम नौवें क्रमांक पर है। पहले इन युद्धबंदियों को वापस लाने के प्रयास हुए थे पर फिर बंद हो गए, क्योंकि इन की पैरवी और चिंता करने वाले कोई नहीं थे। मेजर सुभाष गुलेरी 1971 में अपने विवाह के लिए छुट्टी पर आए हुए थे। विवाह के पांच दिन बाद ही उनको युद्ध के मोर्चे पर बुला लिया गया और उसके बाद आज दिन तक वापस न आए हैं। कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का एक सड़क दुघर्टना में देहांत हो गया था। मेजर गुलेरी के भतीजे एडवोकेट विवेक गुलेरी और परिवार के अन्य सदस्य आज भी उनके आने का नियमित रूप से इंतजार करते रहते हैं। विवेक गुलेरी कहते हैं कि उनके चाचा मेजर सुभाष गुलेरी जिस किसी भी हालत में हैं, वह हमें स्वीकार हैं और उन्हें पाकिस्तान से वापस लाया जाए। यदि वह अब जीवित नहीं हैं, तो उनके अंतिम अवशेष ही वापस लाकर दिए जाएं, ताकि हिंदू विधि विधान से उनकी मृत्यु बाद की क्रियाएं पूरी की जा सकें। 1972 के शिमला समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान के 92 हजार सैनिक युद्धबंदी पाकिस्तान को वापस भेज दिए, परंतु दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की नाकामी की वजह से हम अपने 54 युद्धबंदी वापस भारत न ला पाए। उसके बाद उन 54 युद्धबंदियों को वापिस लाने के प्रयास न के बराबर ही हुए। आज मेजर गुलेरी का परिवार,  मित्रवर्ग और संबंधीगण उनका जन्मदिन मना रहे हैं। हम भी इस जिंदा शहीद को जन्मदिन मना उन्हें स्मरण कर रहे हैं। उनके परिवार के सदस्यों और परिजनों ने सभी लोगों से अपील की है कि आओ हम सब मिलकर भारत सरकार पर दबाव बनाएं कि वह पाकिस्तान में बंद मेजर सुभाष गुलेरी सहित सभी 54 सैनिक युद्धबंदियों को वापस लाएं, जो जीवित हैं, उन्हें जीवित और जो अब जीवित नहीं है, उनके अवशेष ही वापस लाए जाएं।