Monday, June 01, 2020 02:34 AM

आत्मनिर्भर भारत का पैकेज!

प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। उनका दावा है कि इससे गरीब मजदूरों, घरेलू कामगारों, किसानों, रेहड़ी-फुटपाथ वालों से लेकर कुटीर, लघु, मझौले उद्योगों को आर्थिक संबल मिलेगा। इसके अलावा, देश के करदाता मध्यम वर्ग और उद्योग जगत, व्यापारियों की भी मदद होगी, जो बुनियादी तौर पर देश का आर्थिक सामर्थ्य हैं। सूक्ष्म और लघु उद्यमों में करीब 11 करोड़ कर्मचारी सक्रिय हैं। उनके अलावा होटल, पर्यटन और कपड़ा उद्योगों को भी लाभ होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। कोयला, खनन, आधारभूत ढांचा, रक्षा क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण सुधार किए जा सकते हैं। यकीनन कोरोना वायरस के इस आपदाकाल में यह बहुत बड़ी आर्थिक घोषणा है। यह न केवल जीडीपी का 10वां हिस्सा बताया गया है, बल्कि उत्साहवर्द्धक और उम्मीद जगा देने वाली घोषणा भी है। बेशक देश सिर्फ  प्रधानमंत्री की घोषणा पर यकीन करता है। हालांकि यथार्थ तब सामने आएगा, जब इस राशि का आवंटन किया जाएगा। आर्थिक पैकेज का विस्तृत ब्योरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देना शुरू किया है। हालांकि यह आलेख लिखने तक वित्त मंत्री का बयान नहीं आ सका था, लिहाजा उसका विश्लेषण अलग से करेंगे। फिलहाल देश के सामने प्रधानमंत्री के ही शब्द और आश्वासन हैं। प्रधानमंत्री का फोकस एक ही लक्ष्य पर रहा है-आत्मनिर्भर भारत। घोषित आर्थिक पैकेज उसकी बुनियाद है। आह्वान किया गया है कि इस आपदाकाल को ‘अवसर’ बनाया जाए और भारत ज्यादा आत्मनिर्भर बने। संकेत चीन को छोड़ कर बाहर आने वाली बड़ी कंपनियों की तरफ  है। वे कंपनियां विकल्प के तौर पर भारत को चुन सकें, उसके लिए पांच स्तंभों का उल्लेख प्रधानमंत्री ने किया है-अर्थव्यवस्था, आधारभूत ढांचा, तकनीकी व्यवस्था, आबादी और मांग। इस तरह आपूर्ति की व्यवस्था को इतना मजबूत किया जाए कि उसमें से मजदूर के पसीने की गंध आए। यह प्रधानमंत्री मोदी की चाहना है। भारत बुनियादी तौर पर आत्मनिर्भर देश है, लिहाजा विश्व की सबसे बड़ी छठी अर्थव्यवस्था है, लेकिन अब उसे और भी विस्तार देने का लक्ष्य है। गौरतलब आईएमएफ  का विश्लेषण भी है, जिसके मुताबिक कोरोना कहर के कारण चीन की पहली तिमाही में जीडीपी 6.8 फीसदी कम हुआ है और भारत ही ऐसा बड़ा देश है, जिसकी पॉजिटिव ग्रोथ होगी, लेकिन चीन से कंपनियां भारत में ही आएंगी, यह अलग विश्लेषण का मुद्दा है। फिलहाल अहं सवाल यह है कि क्या 20 लाख करोड़ रुपए की पूरी मदद देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को ही नसीब होगी? दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही 3-4 घोषणाओं या पैकेजों के जरिए आठ लाख करोड़ रुपए दे चुका है। क्या केंद्र सरकार उसे और भी पैसा जारी करने को बाध्य कर सकती है? इसके अलावा, वित्त मंत्री 1.70 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा कर चुकी हैं। उसमें से 70 हजार करोड़ रुपए का खर्च मान भी सकते हैं, क्योंकि किसानों और जन-धन खाताधारकों को आर्थिक मदद दी गई है। शेष एक लाख करोड़ रुपए की राशि बची। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि सभी पूर्व पैकेजों को मिलाकर ही कुल राशि 20 लाख करोड़ रुपए बनती है। इतनी राशि किस मद में से निकाली जाएगी या सरकार बाजार से उधार लेगी, अहं सवाल यह भी है। अंतिम तौर पर कितने लाख करोड़ रुपए का पैकेज बनता है, वह महत्त्वपूर्ण होगा। बहरहाल प्रधानमंत्री के संबोधन ने यह साफ  कर दिया कि हम कोरोना वायरस से भी लड़ेंगे और अपने लक्ष्य हासिल करने को काम भी करेंगे। लिहाजा इस बार लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा, तो आम आदमी भी सक्रिय  दिखेगा। बाजार भी गुलजार होते दिखेंगे और 7.5 करोड़ व्यापारी भी कुछ संतुष्ट होंगे। भारत अब कोरोना से पैदा सन्नाटों को पीछे छोड़ना तय कर चुका है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस बार लॉकडाउन नए रंग-रूप वाला होगा। आर्थिक पैकेज को लेकर पहली प्रतिक्रिया शेयर बाजार की उछाल के रूप में सामने आई। औद्योगिक संगठनों-फिक्की, सीआईआई, पीएचडी आदि-ने भी पैकेज का स्वागत किया है, क्योंकि उनकी भी मांग 10-16 लाख करोड़ रुपए की थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने उससे भी ज्यादा की घोषणा की है। अब पैकेज के लागू होने के बाद कोरोना और आम भारतीय की लड़ाई सीधी और तीखी हो जाएगी, क्योंकि यह अस्तित्व की जंग होगी और मनुष्य ने कभी हारना, थकना, टूटना नहीं सीखा। प्रधानमंत्री की इस सोच से हम भी इत्त़फाक रखते हैं।