Thursday, April 18, 2019 05:50 PM

आपराधिक मामलों वाले 175 नेता पहुंचे संसद

2014 के चुनावों में देश भर में 175 बने सांसद, प्रदेश के नौ प्रत्याशियों पर दर्ज थे केस

पालमपुर —देश के प्रबुद्ध मतदाताओं ने 2014 के चुनावों में 34 प्रतिशत ऐसे प्रत्याशियों को सांसद बनाया, जिन पर कोई न कोई आपराधिक मामला दर्ज था। यह आंकड़ा 2004 में सांसद बने उम्मीदवारों से 50 अधिक रहा, तो 2009 के मुकाबले में 17 ज्यादा ऐसे सांसद चुने गए। जानकारी के अनुसार 2004 के चुनावों में नामांकन भरने वाले कुल 3645 लोगों में से 486 ऐसे थे, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज थे। यह कुल उम्मीदवारों का 13 प्रतिशत था, जबकि जनता ने इनमें से कुल सांसदों के 24 प्रतिशत यानी 125 को संसद में पहुंचा दिया। इनमें से 60 सांसद ऐसे थे, जिन पर गंभीर श्रेणी के आपराधिक मामले थे। 2009 के चुनावों में नामांकन भरने वाले 7669 उम्मीदवारों में से 1110 यानी 14 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इस चुनाव में दर्ज आपराधिक मामलों वाले 158 उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे, जो कि कुल सांसद संख्या का करीब 30 प्रतिशत था, जबकि गंभीर आपराधिक मामलों वाले 86 यानी 17 फीसदी उम्मीदवार सांसद चुने गए थे। 2014 के चुनाव में कुल 8208 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे, जिनमें से 17 प्रतिशत पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इनकी कुल संख्या 1404 थी, जिसमें से 175 को जनता ने संसद में पहुंचाया था। पिछले लोकसभा चुनावों में 110 ऐसे उम्मीदवार सांसद बने, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। देश में सांसदों की कुल संख्या में से 2004 में 24 प्रतिशत, 2009 में 30 फीसदी और 2014 में 34 प्रतिशत ऐसे थे, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं, 2004 में 12 प्रतिशत, 2009 में 17 फीसदी और 2014 में 21 प्रतिशत ऐसे सांसद बने, जिन पर गंभीर श्रेणी के आपराधिक मामले थे। जानकारी के अनुसार इनमें से 10 पर हत्या, 17 पर हत्या का प्रयास करने, दस पर लूट और डकैती तथा सात पर अपहरण के मामले दर्ज थे।  

हिमाचल के हाल

2014 के चुनावों में प्रदेश में ऐसे नौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज थे। शिमला सीट से तीन उम्मीदवारों ने छह, हमीरपुर से दो उम्मीदवारों ने दस, कांगड़ा से एक प्रत्याशी ने एक तो मंडी से तीन उम्मीदवारों ने उनके खिलाफ  पांच आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी थी।