Monday, April 06, 2020 06:31 PM

आरामदायक अवस्था

सद्गुरु  जग्गी वासुदेव

लोग जब थक जाते हैं तब स्वयं ही नींद में चले जाते हैं। पर कई लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं कि हरेक को प्रति दिन 8 से 10 घंटे सोना ही चाहिए। मान लीजिए आप 100 साल जीवित रहते हैं और रोज 8 घंटे सोने की बात मान लेते हैं, तो अपने अंत समय तक आप 33 से भी ज्यादा वर्षों का समय सिर्फ  सो कर ही बिता चुके होंगे...

हमारे शरीर को नींद की आवश्यकता नहीं है। इसको जरूरत है आराम की। अधिकतर लोगों के अनुभव में, वे जिस आरामदायक अवस्था को जानते हैं, उसका सबसे गहरा रूप नींद है, अतः वे नींद के बारे में बात करते रहते हैं। पर मूल रूप से, शरीर आप से नींद नहीं मांगता। वो आराम चाहता है। आप जब बहुत सारी गतिविधियां करते हैं, तो आप के शरीर में तनाव इकट्ठा होने लगता है, जिसके कारण कुछ समय बाद शरीर नींद लेना चाहता है। आजकल कुछ तथाकथित विशेषज्ञ हैं, जो नींद को बढ़ावा दे रहे हैं। मुझे लगता है कि नींद को बढ़ावा देने की कोई जरूरत नहीं है। लोग जब थक जाते हैं तब स्वयं ही नींद में चले जाते हैं। पर कई लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं कि हरेक को प्रति दिन 8 से 10 घंटे सोना ही चाहिए। मान लीजिए आप 100 साल जीवित रहते हैं और रोज 8 घंटे सोने की बात मान लेते हैं, तो अपने अंत समय तक आप 33 से भी ज्यादा वर्षों का समय सिर्फ  सो कर ही बिता चुके होंगे। लोगों ने इस आराम वाली बात को ठीक से समझा नहीं है। तो आज आप बस ये सरल सी चीज कीजिए। भोजन से पहले और बाद में अपनी नाड़ी को माप लीजिए। अब अगर आप ईशा क्रिया सीख लें, जो एक बहुत ही सरल क्रिया है और जिसके लिए आप को दिन के बस 12 मिनट लगेंगे, अगर आप इसे नियमित रूप से 4 से 6 सप्ताहों तक करें और फिर आप भोजन से पहले तथा बाद में अपनी नाड़ी का परीक्षण करें तो आप पाएंगे कि ये कम हो गई है। इसका अर्थ ये है कि आप की आरपीएम कम हो गई है। अगर आप अपनी कार को 5000 आरपीएम पर चलाते हैं, तो 2000 आरपीएम पर चलाने की अपेक्षा ये ज्यादा जल्दी खराब होगी। इसी तरह अगर आप लगातार ज्यादा आरपीएम पर काम करते रहते हैं, तो आप ज्यादा थक जाते हैं और फिर उसकी भरपाई के लिए ज्यादा नींद लेते हैं। अगर आप अपने आप को आरामदायक अवस्था में ले आते हैं, तो आप अपने सिस्टम को शांत बना लेते हैं। जब आप यहां पूर्ण शांति में होते हैं तो आप के शरीर में जो तनाव बनता है वो बहुत कम होता है। लगभग 27 वर्षों तक मैं प्रतिदिन औसतन अढ़ाई से तीन घंटे की नींद में काम चला लेता था। आजकल मैं थोड़ा ज्यादा आलसी हो रहा हूं, तो प्रतिदिन चार से साढ़े चार घंटे सो रहा हूं। आप को कितने घंटे सोना चाहिए यह तय करने की आप को कोई जरूरत नहीं है। जब आपको पर्याप्त आराम मिल जाए, तो आप को जाग जाना चाहिए। अगर शरीर और मन को जागरूकता और सजगता के एक खास स्तर पर रखा जाए, तो आप देखेंगे कि जैसे ही इसे पर्याप्त आराम मिल जाता है, यह पुनः कार्यरत हो जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि नींद को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं। शरीर को तरोताजा और सजग रखने के लिए आपको आराम की जरूरत होती है।