Tuesday, October 15, 2019 08:59 AM

आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे पौंग विस्थापित

जवाली-प्रदेश पौंग बांध समिति की एक महत्त्वपूर्ण बैठक रविवार को प्रधान हंसराज चौधरी की अध्यक्षता में राजा का तालाब के निजी पैलेस में संपन्न हुई। बैठक में केंद्र, राजस्थान व प्रदेश सरकार को लगातार पौंग बांध विस्थापितों के हितों से खिलवाड़ करने का आरोपलगाया गया। प्रधान हंसराज चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 1996 के उनके हक में किए गए निर्णय के बाद भी राजस्थान सरकार 1188 राज रक्कबों को अपने नियंत्रण में लेकर  पौंग बांध विस्थापितों को आबंटित नही कर पाई। अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं होना दर्शाता है कि किसी भी सरकार को विस्थापितों के मामले में कोई लेना-देना नहीं है। राजस्थान सरकार  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को भी नहीं मानती। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामपाल वर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट के उनके हक में किए गए निर्णय को  नहीं मान रही। सभी विस्थापितों को करो या मरो की नीति पर चलना होगा। ऐसे में सभी आंदोलन के लिए तैयार रहें। विस्थापितों को इसके लिए  पौंग डैम का पानी रोकना पड़ेगा। यातायात को रोकना पड़ेगा। अब तक के सभी प्रदेश मुख्यमंत्री विस्थापितों के मामले में कमजोर साबित हुए। रामपाल ने कहा कि चुप बैठने का वक्त निकल चुका है। अब सभी को आर-पार की लड़ाई में समझौते के अनुसार जिला गंगानगर में ही आरक्षित भूमि या मुआवजा के लिए लड़ना पड़ेगा। श्री वर्मा ने सरकार को एक बड़े आंदोलन का सामना करने के लिए भी चेताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार कहती है कि प्रथम चरण में जगह नहीं, जबकि 1188 मुरब्बों पर अवैध कब्जे हैं। विस्थापितों के 1500 मुरब्बों को वहां की सरकार ने लाल गढि़यों को दे रखा है। प्रदेश सचिव एचसी गुलेरी ने कहा कि सभी सरकारों का रवैया विस्थापितों के प्रति अच्छा नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि समिति को अगर अपने हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ेगा , तो भी वह अपने हक की लड़ाई के लिए पीछे नहीं हटेंगे। अपना हक लेकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि 2.20 लाख एकड़ आरक्षित भूमि या 1188 मुरब्बों से ही विस्थापितों के लिए भूमि आबंटन मान्य होगा। पौंग बांध विस्थापितों की युवा पीढ़ी ने कहा कि अब तो आंदोलन ही एक रास्ता है। इसके लिए जल्द ही जगह-जगह चक्का जाम किया जाएगा, वहीं धरना-प्रदर्शन करके पौंग बांध का पानी रोका जाएगा। इसके लिए वह जान तक की बाजी लगा देंगे।