Tuesday, November 19, 2019 03:00 AM

आवश्यक हैं प्री-बोर्ड परीक्षाएं

विकास गुप्ता

चंबा

भारत एक विकासशील देश है और किसी भी देश को विकसित होने के लिए आवश्यक है अच्छी शिक्षा। हमारे देश में शिक्षा व्यवस्था अतीत काल से सुदृढ़ रही है। तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालय इसके गवाह हैं जहां विदेशों से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। पिछले दो दशकों से शिक्षा में बहुत से प्रयोग हो चुके हैं, उसमें सबसे खराब स्थिति तब से हुई जब नो रिटेंशन पालिसी यानी आठवीं कक्षा तक फेल न करने वाला कानून आया। पहली कक्षा से आठवीं तक में यह स्थिति थी कि किसी ने 100 प्रतिशत पेपर किया वह भी अगली कक्षा में, जिसने 35 प्रतिशत पेपर किया, वह भी और जिसने कोरा कागज जमा करवा दिया, वह भी अगली कक्षा में पहुंच गया। इससे जो पढ़ने वाले बच्चे थे, उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा कि बिना पढ़े जब अगली कक्षा में पहुंच सकते हैं, तो पढ़ने का क्या फायदा। आज दशकों बाद यह हालात बन गए हैं कि नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं के कई बच्चे ढंग से प्रार्थना पत्र भी नहीं लिख सकते। इस बार यानी 2019-20 के सत्र से पांचवीं और आठवीं की बोर्ड द्वारा परीक्षाएं संचालित होंगी, जिससे छात्रों में पढ़ने की भावना जागी है। पिछले वर्ष से हिमाचल प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग ने सीबीएसई बोर्ड की भांति दसवीं और बारहवीं कक्षाओं में प्री बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत की, जिसके परिणामस्वरूप दिसंबर मास में ही बच्चों को पता चल गया कि वे कितने पानी में हैं और उन्होंने मार्च में होने वाली परीक्षाओं के लिए तैयारी शुरू कर दी। इस बार प्री बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्र  एससीईआरटी राज्य शिक्षा अनुसंधान केंद्र सोलन द्वारा तैयार किए जा रहे हैं, जो अपने आप में ही एक अनूठी पहल है, जिसके संभवतः सकारात्मक परिणाम निकट भविष्य में मिलेंगे। बच्चों को आत्ममंथन और आत्मआकलन करने का प्रर्याप्त समय मिल जाता है और समय रहते वे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं। उनको बोर्ड पैटर्न के प्रश्न पत्र और बोर्ड माहौल में परीक्षाएं देने का अनुभव भी हो जाता है।  निकट भविष्य में पांचवीं और आठवीं  कक्षाओं में प्री बोर्ड परीक्षा प्रणाली आरंभ करनी चाहिए।