Friday, October 18, 2019 11:25 AM

आसमान छूती सोने-चांदी की कीमतें

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

 

पिछले साल अगस्त 2018 में सोने के भाव प्रति 10 ग्राम 30,000 रुपए थे और चांदी प्रति किलोग्राम 30,000 रुपए के आसपास थी। इन महंगी धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मात्र एक साल के भीतर ही सोना 40 हजारी हो गया है तो चांदी के दाम भी पचास हजार के करीब पहुंचे चुके हैं। इस वजह से शादी की तैयारियों में जुटे अभिभावकों में भय और असमंजस का माहौल व्याप्त है...

हिमाचल प्रदेश के बड़े सर्राफा बाजारों में से एक बैजनाथ उपमंडल के व्यावसायिक शहर पपरोला के स्वर्णकारों में इन दिनों मंदी का आलम है। पिछले साल अगस्त 2018 में सोने के भाव प्रति 10 ग्राम 30,000 रुपए थे और चांदी प्रति किलोग्राम 30,000 रुपए के आसपास थी। इन महंगी धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मात्र एक साल के भीतर ही सोना 40 हजारी हो गया है तो चांदी के दाम भी पचास हजार के करीब पहुंचे चुके हैं। इस वजह से अपने बच्चों की शादी की तैयारियों में जुटे अभिभावकों में भय और असमंजस का माहौल व्याप्त है। सर्राफा व्यापारियों की मानें तो वर्तमान में सोने की कीमतों में तेजी आश्चर्यजनक और चौंकाने वाली है। इन दिनों सर्राफा बाजार पपरोला में सोने-चांदी के आभूषणों के कारोबार में 50 से 60 फीसदी की कमी दर्ज की गई है और स्वर्ण व्यापारी ग्राहकों के इंतजार में बैठे हैं। पपरोला शहर में 26 के करीब स्वर्णकारों की आभूषणों की दुकानें हैं जिनमें करीब डेढ़ सौ से ज्यादा कारीगर कार्यरत हैं। अधिकतर कारीगर बंगाल एवं महाराष्ट्र के हैं, जबकि कुछ स्थानीय युवकों ने भी अब अपने आपको स्वर्ण कारीगरी के हुनर से जोड़ा है। लगातार महंगी होती जा रही पीली धातु के कारण और खरीदारों की कमी के चलते इन कारीगरों के रोजगार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यही मुश्किलें हिमाचल के अन्य बड़े शहरों-कस्बों के स्वर्णकारों एवं कारीगरों को भी दरपेश आ रही हैं। भारतीय धर्म, संस्कृति एवं स्थानीय रीति-रिवाजों के हिसाब से भारतीयों में सदैव सोने के प्रति दीवानगी एवं आकर्षण पाया गया है। हमारे देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के श्रृंगार में हीरे-जवाहरात और सोने के आभूषणों का प्रयोग बहुतायत से देखा जा सकता है। भारतीय महिलाओं द्वारा शादी और धार्मिक अनुष्ठानों अथवा विशेष कार्यक्रमों में आभूषणों द्वारा अपना श्रृंगार करना अभी भी प्रचलन में है। यही वजह है कि शादी के मौके पर वर-वधु पक्ष द्वारा सोने की खरीदारी करना परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से आम नागरिकों की आर्थिक सेहत  में सुधार से और बेहतर रिटर्न के दृष्टिकोण से भी लोग सोने की खरीदारी कर उसमें अपना धन निवेश कर रहे हैं। इसकी वजह से भी भारत में सोने के दामों में बढ़ोतरी हुई है। सर्राफा विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में सोने -चांदी के दामों में और तेजी देखने को मिलेगी और दिवाली तक सोने के दाम 42,000 प्रति 10 ग्राम तक जाने के संकेत मिल रहे हैं जिस वजह से व्यापारी भी सकते में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के दामों में निरंतर हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते स्वर्ण व्यापारियों को भी इन महंगी धातुओं की खरीद-फरोख्त में कई बार घाटा उठाना पड़ रहा है तो वहीं वह अपने परंपरागत ग्राहकों को उधार पर आभूषण बेचने को लेकर भी असमंजस में हैं। सर्राफा व्यापारियों के अनुसार पहले लंबे समय तक इन कीमती धातुओं के दाम स्थिर रहते थे और सोने के व्यापारियों एवं खरीददारों में संतुष्टि का भाव रहता था कि जरूरत पड़ने पर खरीद लेंगे। लेकिन बीते कुछ वर्षों से इन धातुओं के अंतररराष्ट्रीय बाजारों और शेयर मार्केट के साथ सम्बद्ध होने के चलते इनके दामों में तेजी दर्ज की जा रही है। स्वर्ण कारोबारियों को इस बार धनतेरस और दिवाली में भी सोने की बिकवाली में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है। कीमतों में बढ़ोतरी से भारत में सोने की स्मगलिंग बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार वैश्विक स्वर्ण उत्पादन सालाना लगभग 3,000 टन है जबकि मांग ज्यादा है। भारत के मंदिरों में लगभग 3,000 टन और आम नागरिकों के घरों में ही 17,000 टन सोना जमा पड़ा है। भारत सर्वाधिक स्वर्ण भंडार वाले 10 देशों के क्लब में शामिल है। भारत में सोने की सालाना औसतन खपत 750 टन है। चीन 350 टन सोने के उत्पादन के साथ पिछले 7 वर्षों से लगातार सोने का बड़ा उत्पादक बना हुआ है और चीन में भी सोने की सालाना खपत 800 टन के आसपास है। 8134 टन स्वर्ण भंडार के साथ अमरीका पहले स्थान पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भी 2814 टन सोने का भंडार है जबकि फरवरी 2019 में भारत का कुल स्वर्ण भंडार 609 टन था।

आस्ट्रेलिया के गैलेक्सी गोल्ड माइंस के प्रबंध निदेशक निक स्पेंसर का मानना है कि भारत हर साल 200 टन सोने का उत्पादन कर सकता है और इस प्रक्रिया में देश के एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता है। सोने पर सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने और उस पर 3 प्रतिशत जीएसटी का लागू होना भी इस धातु के महंगा होने के पीछे एक बड़ा कारण माना जा रहा है। लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में सोने में निवेश किए जाने के कारण पिछले 75 दिनों में ही वायदा और स्पाट एक्सचेंज में सोने के भावों में 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है जबकि शेयर बाजारों में 7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। भारत में आरबीआई ने मार्च 2018 के बाद से 60 टन सोना खरीदा है। इसके अलावा डालर के मुकाबले रुपए की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी भी सोने के महंगा होने का एक बड़ा कारण है क्योंकि भारत 80 प्रतिशत सोने का आयात करता है जिस पर बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है। यदि आने वाले महीनों में इसी प्रकार सोने-चांदी के दामों में बढ़ोतरी होती रही तो निश्चित रूप से मध्यम और कम आय वर्ग वाले भारतीयों के लिए यह संकट का समय होगा।