Wednesday, May 22, 2019 12:57 PM

इंडिया पोस्ट भी घाटे में

 नई दिल्ली -घाटे में चल रहे कई सरकारी उपक्रमों के बीच अब सरकारी कंपनी इंडिया पोस्ट (भारतीय डाक) ने घाटे के मामले में बीएसएनएल और एयर इंडिया को भी पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2018-19 में इंडिया पोस्ट को कुल 15000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। पिछले तीन वित्त वर्ष में इंडिया पोस्ट के घाटे में 150 फीसदी की बढ़त हुई है। अब यह सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनी हो गई है। इस घाटे की वजह कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्ते देने के लिए होने वाले खर्च को बताया जा रहा है। इस मद पर इंडिया पोस्ट को अपने सालाना राजस्व का 90 फीसदी तक खर्च करना पड़ता है। घाटे के लिए बदनाम दूसरी सरकारी कंपनी बीएसएनएल को वित्त वर्ष 2018-19 में 7500 करोड़ रुपए और एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2017-18 में 5337 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। इंडिया पोस्ट को वित्त वर्ष 2018-19 में 18000 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ था, जबकि उसे वेतन और भत्तों में 16620 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। इसके अलावा बीएसएनल को पेंशन पर करीब 9782 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे, यानी उसकी कुल कर्मचारी लागत 26400 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी। कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020 में वेतन/भत्तों पर खर्च 17451 करोड़ रुपए और पेंशन पर खर्च 10271 करोड़ रुपए रहेगा। वहीं, इस दौरान आय सिर्फ 19203 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इससे साफ है कि आगे चलकर कंपनी की हालत और खराब होगी। उत्पाद लागत और कीमत एवं पारंपरिक डाक सेवाओं की तुलना में अधिक सस्ते और तेज विकल्प मौजूद होने की वजह से  इंडिया पोस्ट की परफार्मेंस सुधारने और इसकी आय बढ़ाने के प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा उत्पादों की कीमत बढ़ाने के अलावा कंपनी अपने 4.33 लाख कामगारों और 1.56 लाख पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क के दम पर ई-कॉमर्स और अन्य वैल्यू एडिड सर्विसेस में संभावनाएं खंगाल सकती है। इंडिया पोस्ट अपने हर पोस्ट कार्ड पर 12.15 रुपए खर्च करता है, लेकिन उसे सिर्फ 50 पैसे यानी लागत का चार फीसदी ही मिलता है। औसतन पार्सल सेवा की लागत 89.23 रुपए है, लेकिन कंपनी को इसका सिर्फ आधा ही मिलता है। बुक पोस्ट, स्पीड पोस्ट और रजिस्ट्रेशन आदि के साथ भी ऐसा ही होता है।