Thursday, August 22, 2019 05:12 PM

इकोलॉजी में बनाएं करियर

पर्यावरण के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसमें जरा सा भी परिवर्तन हमारे जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने हमारे पर्यावरण को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। सूखा, बाढ़, भूकंप आदि इसी के परिणाम हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को इसकी भयावहता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में करियर के लिहाज से यह तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है...

मनुष्य पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि आज हर देश पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इकोलॉजी का अध्ययन आवश्यक है। इसके जरिए पर्यावरण के विभिन्न आयामों व उनके संरक्षण की विधिवत जानकारी मिलती है। पिछले कुछ वर्षों से यह तेजी से उभरता हुआ करियर साबित हो रहा है। पर्यावरण के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसमें जरा सा भी परिवर्तन हमारे जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने हमारे पर्यावरण को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। सूखा, बाढ़, भूकंप आदि इसी के परिणाम हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को इसकी भयावहता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में करियर के लिहाज से यह तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है।

क्या है इकोलॉजी

इकोलॉजी जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत जीवों व उनके वातावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इकोलॉजी को समझने के लिए मानव प्रजातियों का विधिवत अध्ययन आवश्यक है। इसके अलावा जलवायवीय कारक जैसे प्रकाश, ताप, वायु गति, वर्षा और वायुमंडल की गैसों आदि का अध्ययन भी जरूरी है।

विस्तृत है कार्यक्षेत्र

अर्बन इकोलॉजी

अर्बन इकोलॉजी इस क्षेत्र की सबसे नवीनतम विधा है, जिसमें शहरों में रहने वाले लोगों के जनजीवन व प्राकृतिक परिदृश्य को इसमें भलीभांति परखा जाता है।

फोरेस्ट इकोलॉजी

इसके अंतर्गत विभिन्न प्रजातियों के पौधों, जानवरों और कीड़े-मकौड़ों का अध्ययन व उनका वर्गीकरण किया जाता है। इसके अलावा जंगलों की भूमि और वहां के वातावरण पर मनुष्य और ग्लोबल वार्मिंर्ग के असर का अध्ययन भी करते हैं।

मरीन इकोलॉजी

इसके अंतर्गत जलीय जन्तुओं और उसमें रहने के दौरान वातावरण के असर को समझा जाता है।

रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट

ये प्रोफेशनल्स ऐसी जगह काम करते हैं, जहां परिस्थितिकी तंत्र खतरे में हों।

वाइल्ड लाइफ  इकोलॉजी

इसमें इकोलॉजिस्ट पशुओं व उनकी जनसंख्या तथा उनके संरक्षण का प्रमुखता से अध्ययन करते हैं।

एन्वायरनमेंटल बायोलॉजी

इसमें एन्वायरनमेंटल बायोलॉजिस्ट किसी विशेष वातावरण तथा उसमें रहने वाले लोगों की शारीरिक बनावट का अध्ययन करते हैं। इन पदों पर मिलता है काम रिसर्चर, इकोलॉजी साइंटिस्ट, नेचर रिसोर्सेज मैनेजर, वाइल्ड लाइफ  मैनेजर, एन्वायरनमेंटल कंसल्टेंट, रेस्टोरेशन इकोलॉजिस्ट।

आवश्यक स्किल्स

इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए जरूरी है कि प्रोफेशनल्स प्रकृति से प्रेम करना सीखें और उसके संरक्षण के लिए उनके दिल में दर्द हो। कार्यक्षेत्र व्यापक होने के कारण जिस क्षेत्र में जा रहे हों, उसका विस्तृत अध्ययन जरूरी है। इसके अलावा उनमें समस्या के त्वरित निर्धारण का गुण, कम्प्यूटर व मैथ्स की अच्छी जानकारी, प्रेजेंटेशन व राइटिंग स्किल, कार्य के प्रति अनुशासन व टीम वर्क आदि का गुण उन्हें लंबी रेस का घोड़ा बना सकता है।

रोजगार की संभावना

सफलतापूर्वक कोर्स करने के बाद छात्रों को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ता। कई सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियां, एनजीओ,फर्म व विश्वविद्यालय हैं, जहां इन प्रोफेशनल्स को विभिन्न पदों पर काम मिलता है। मुख्य रूप से प्रोफेशनल्स को रिसर्च सेंटर जैसे सीएसआईआर, एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, एन्वायरनमेंटल अफेयर डिपार्टमेंट, फोरेस्ट्री डिपार्टमेंट, नेशनल पार्क, म्यूजियम, एक्वेरियम सेंटर में काम मिलता है।

योग्यता

यदि कोई छात्र इकोलॉजी से संबंधित कोर्स करना चाहता है तो स्नातक में उसका साइंस बैकग्राउंड होना जरूरी है। खासकर बॉटनी, बायोलॉजी, जूलॉजी एवं फोरेस्ट्री संबंधी विषय सहायक साबित होते हैं। इसके बाद मास्टर कोर्स में दाखिला मिलता है। यदि छात्र रिसर्च, टीचिंग तथा अन्य शोध संबंधी कार्य करना चाहते हैं तो उनके लिए मास्टर डिग्री के बाद पीएचडी करना अनिवार्य है।

वेतनमान

पारिस्थितिकी के क्षेत्र में करियर आरंभ होने के बाद आरंभिक आय 15000 होती है। औद्योगिक क्षेत्र में कंपनियां लाखों का पैकेज भी देती हैं। वेतन आपकी योग्यता और अनुभव पर निर्भर करता है। बेशक यह नया विज्ञान है, पर संभावनाएं रोजगार के लिए बहुत ज्यादा हैं।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

* जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

* नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ  इकोलॉजी, जयपुर

* इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ  साइंस ;सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंस, बंगलूर

* नेशनल इंस्टीच््यूट ऑफ  एडवांस स्टडीज, बंगलूर

* इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ  इकोलॉजी एंड एन्वायरनमेंट, नई दिल्ली