Tuesday, November 19, 2019 02:56 AM

इन्वेस्टर मीट से उम्मीदें

सुखदेव सिंह

लेखक, नूरपुर से हैं

अतिथि देवो भव, ऐसी सभ्यता और संस्कृति की बदौलत ही आज हिमाचल प्रदेश की विश्व में अपनी अलग विशेष पहचान है। कंपनी निवेशक आज हिमाचल प्रदेश का कायाकल्प करने के लिए आ रहे हैं, इसलिए सभी को एकजुट होकर उनकी सराहना किए जाने की अब जरूरत है। केंद्र सरकार इन्वेस्टर मीट के लिए पांच करोड़ की आर्थिक सहायता मुहैया करवा कर पहाड़ के विकास में अपना नाम दर्ज करवाने जा रही है। सबसे अहम बात यह  कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस ग्लोबल इन्वेस्टर मीट का श्री गणेश करने धर्मशाला पहुंचने वाले हैं। ऐसे में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के नाम पर बजट की बर्बादी किए जाने के लगाए जा रहे तमाम आरोप निराधार लगते हैं...

बुराई के आज के दौर में प्रशंसा की जाती है और अच्छाई का जमकर विरोध। ऐसा भी संभव नहीं हो सकता कि प्रत्येक इनसान की कार्यप्रणाली की हर कोई वाहवाही ही करता रहे। धर्मशाला में अगले सप्ताह आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट को लेकर भी लोगों में संशय बरकरार है। अतिथि देवो भव, ऐसी सभ्यता और संस्कृति की बदौलत ही आज हिमाचल प्रदेश की विश्व में अपनी अलग विशेष पहचान है। कंपनी निवेशक आज हिमाचल प्रदेश का कायाकल्प करने के लिए आ रहे हैं, इसलिए सभी को एकजुट होकर उनकी सराहना किए जाने की अब जरूरत है। केंद्र सरकार इन्वेस्टर मीट के लिए पांच करोड़ की आर्थिक सहायता मुहैया करवा कर पहाड़ के विकास में अपना नाम दर्ज करवाने जा रही है। सबसे अहम बात यह  कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस ग्लोबल इन्वेस्टर मीट का श्री गणेश करने धर्मशाला पहुंचने वाले हैं। ऐसे में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के नाम पर बजट की बर्बादी किए जाने के लगाए जा रहे तमाम आरोप निराधार लगते हैं। बिना रिस्क लिए अब पहाड़ की तकदीर बदलना आसान काम न होगा जब सरकारों के कंधों पर करोड़ों रुपए का कर्जा सिर पर हो। प्रयास किए जाने से पहले ही उसके बारे नकारात्मक सोच रखना इनसान के व्यक्तित्व की पहचान करवाता है। हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने के बावजूद सरकारें युवाओं को रोजगार दिलाए जाने में आज दिन तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाई हैं। हिमाचल प्रदेश का पर्यटन की दृष्टि से विकसित न हो पाने की वजह से सरकारें कर्जे के बोझ दबे उठ नहीं पा रही हैं। पहाड़ में रोजगार के अवसर किस तरह सृजित किए जाएं आज हर किसी को सोचने की जरूरत है। हिमाचल प्रदेश में पूर्व वर्षों में भी राजनीतिक दलों की सरकारें सत्तासीन रही हैं। मगर जिस तरह की दूरदर्शिता का प्रमाण देकर जय राम ठाकुर की सरकार इन्वेस्टर मीट करवाने जा रही है, उसके सार्थक सकारात्मक परिणाम जल्द ही देखने को मिलेंगे। हिमाचल प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर्यटन को विकसित किए जाने के प्रति गंभीर नजर आए हैं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की टीम ने विदेशों में जाकर वहां की कंपनियों को इन्वेस्टर मीट में बढ़-चढ़ कर अपनी भगीदारी सुनिश्चित किए जाने की अपील की है। विदेशों खासकर खाड़ी देशों में ज्यादातर भारतीय कारोबारियों का ही दबदबा है। प्रदेश सरकार के आग्रह पर कंपनी प्रबंधकों की ओर से इन्वेस्टर मीट में हिस्सा लेने जाना बिलकुल तय है। दुबई में जिस तरह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उद्योगमंत्री विक्रम ठाकुर का कंपनी प्रबंधकों ने भव्य स्वागत किया था, ठीक उसी बात को मद्देनजर रखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता कि कंपनी प्रबंधक हिमाचल प्रदेश में अपना कारोबार फैलाने के लिए आतुर नजर आते हैं। दुबई में कई भारतीय नामी कंपनियों ने इस इन्वेस्टर मीट में हिस्सा लेने वाली जो पहाड़ का आगामी भविष्य बदलने में सहमति जता चुकी हैं। यूएई में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आगमन पर वहां रहने वाले हिमाचलियों में पहाड़ की तकदीर बदलने का विशेष जज्बा भी देखने को मिला है। रोजी-रोटी संघर्ष के लिए यूएई में रहने वाले हिमाचली स्वयं चाहते है कि अब उन्हें अपने प्रदेश में ही रोजगार तलाश करने की जरूरत है।

गौरव की बात यह कि खाड़ी देशों में भी हिमाचल के लोगों ने अपने कारोबार स्थापित कर रखे हैं जो अब धीरे धीरे इसे आगे फैलाना चाहते हैं। बढ़ते कंपीटीशन के चलते आज विदेशों में भी आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है। कंपनी प्रबंधक अब अपना कारोबार चलाने के लिए नई जगहों का चयन करके वहां स्थापित होना चाह रहे हैं। सरकार की ओर से अब कंपनी निवेशकों को खुला निमंत्रण दिए जाने के चलते अब पहाड़ के दिन फिरने वाले लगते हैं। पहाड़ में धार्मिक पर्यटन को और भी बढ़ाने की अत्यधिक जरूरत है। वैसे तो देवभूमि का भ्रमण किए जाने को हर कोई लालायित रहता है। यही वजह है कि यहां मौजूद मंदिरों में वर्ष भर श्रद्धालु अपना शीश नवाने के लिए आते हैं। इस पुनीत कार्य से पहले ही हिमाचल प्रदेश की सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है। सड़कों के किनारे बनी इमारतों की दीवारों पर पहाड़ी सभ्यता और संस्कृति की छाया अंकित करके उसे शोभनीय बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश की सरकार के विदेशी कंपनियों के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत होने की वजह से बेरोजगारी की दर कम होने की पूरी संभावनाएं हैं। सच्चाई यह भी कि आज के दौर में हर राज्य के लोग रोजगार कमाने के लिए विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य के लोग अन्य राज्यों की तुलना में विदेशों में कम ही रोजगार कमाने के लिए निकले हैं। इन्वेस्टर मीट के बहाने जागरूकता बढ़ने की वजह से प्रदेश के बेरोजगारों को विदेशों में भी रोजगार मिल पाएगा। निकटतम भविष्य में पहाड़ में नामी शॉपिंग मॉल खुलने वाले है, इसमें कोई दोराय नहीं है। शॉपिंग मॉल में इनसान की जरूरत की हर चीज एक ही जगह में मिल जाएगी तो कौन फिर अन्य राज्यों के शॉपिंग मॉल में जाना पसंद करेगा। गर्व की बात यह कि आज भारतीय कंपनियां लूलू हाईपर सुपर मार्केट, लैंड मार्क आदि कई नामी कंपनियां विदेशों में अपना कारोबार करके कई लोगों को रोजगार मुहैया करवा रही हैं। आज जब ऐसी कंपनियों को हिमाचल प्रदेश में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए न्योता दिया जा रहा है तो ऐसे में फिर कौन इनकार कर सकता है। हिमाचल प्रदेश में ऐसा क्या नहीं कि निवेशक आकर्षक हुए वगैर रह सकते हैं। प्रदेश सरकार को सड़कों की हालत में बहुत सुधार करने की जरूरत है। पहाड़ में अतिशीघ्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बने, रेल गाडि़यों को आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया जाए। पहाड़ में निवेश करने वाले उद्योगपतियों को विशेष रियायतें मुहैया करवाई जाएंगी तो प्रदेश सरकार की इस मुहिम को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।  

-संपादक