Tuesday, October 15, 2019 10:07 AM

इमरान के मंत्री का कबूलनामा

पाकिस्तान के गृहमंत्री ब्रिगेडियर एजाज अहमद शाह का एक कबूलनामा सामने आया है कि पाकिस्तान की सरजमीं पर ही आतंकवाद पल रहा है। उन्होंने एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार दिया, जिसके जरिए यह कबूलनामा भी सार्वजनिक हुआ है। पाक गृहमंत्री ने कुछ खुलासे किए हैं। मसलन-दुनिया पाकिस्तान पर यकीन नहीं करती है, लेकिन भारत के कहे पर सभी भरोसा करते हैं। इमरान हुकूमत ने आतंकी सरगना हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा पर करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। पाकिस्तानी गृहमंत्री का कहना है कि अब आतंकियों को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें रोजगार और पैसा दिया जाना चाहिए। गृहमंत्री ने सबसे गौरतलब खुलासा यह किया है कि सत्ताधारी लोगों ने ही जनरल जिया उल हक से लेकर इमरान खान तक, पाकिस्तान का नाम खराब किया है और उसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वजीर-ए-आजम इमरान खान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में रैली से ऐन पहले गृहमंत्री का यह कबूलनामा सामने आया है। एजाज अहमद शाह कोई सामान्य शख्सियत नहीं हैं। वह पाक की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया भी रहे हैं, लिहाजा आतंकवाद पर उनके कबूलनामे को खारिज नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री इमरान ने अपने बाद सबसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील महकमा उन्हें दिया है। अक्सर प्रधानमंत्री के बाद गृहमंत्री की ही कैबिनेट में सबसे मजबूत मौजूदगी मानी जाती है। यकीन नहीं होता कि गृहमंत्री ने अपने वजीर-ए-आजम की मंज़ूरी के बिना ही यह कबूलनामा सार्वजनिक किया होगा, क्योंकि यह पाकिस्तान की पराजय का कबूलनामा लगता है। यह लाचार, असहाय और अलग-थलग पाकिस्तान का कबूलनामा लगता है। यह पाकिस्तान की एक गैर-जिम्मेदार देश की छवि का कबूलनामा लगता है। यह ऐसा कबूलनामा भी है, जिसके जरिए पाकिस्तान ने खुद को ‘आतंकिस्तान’ मान लिया है। इस कबूलनामे से पाकिस्तान या उसकी हुकूमत को हासिल क्या होगा? क्या इमरान खान गृहमंत्री पद से एजाज अहमद शाह को हटा पाएंगे या इस कबूलनामे के पीछे भी कोई रणनीति है? पाकिस्तान पर सबसे काली छाया तो फाट्फ  (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की है, जिसकी बैठक में तय होगा कि पाकिस्तान को काली सूची में डालना है या नहीं। यह अंतरराष्ट्रीय संगठन आतंकवाद से संबंधित ही है। आतंकी संगठनों और उन्हें दी जा रही फंडिंग पर किसी भी देश ने कितनी लगाम कसी है, उसका आकलन यह संगठन करता है। यदि फाट्फ  पाकिस्तान को काली सूची में डाल देता है, तो पाकिस्तान को दुनिया की आर्थिक एजेंसियां कर्ज नहीं देंगी। कई बड़े देश भी कर्ज देने से परहेज करेंगे। पाकिस्तान की कंगाली के हालात ऐसे हैं कि बिना कर्ज उसका गुजारा बेहद मुश्किल है। उस पर अरबों डालर का विदेशी कर्ज पहले से ही है। सवाल यह है कि गृहमंत्री के ऐसे कबूलनामे से भी पाकिस्तान फाट्फ  से कैसे बच सकता है? पाकिस्तान के हुक्मरान फाट्फ  को कैसे भरोसा दिलाएंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ  काफी गंभीर है? यह कबूलनामा पीओके जलसे से पहले वहां के अवाम को संतुष्ट और शांत कैसे कर सकता है? फिलहाल पाकिस्तान के लिए कश्मीर से अहम पीओके हो गया है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा खौफ  यही है कि भारत सरकार ने अपने पीओके को हासिल करने का एजेंडा घोषित कर दिया है। हमारे सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी सार्वजनिक बयान दिया है कि सेना पीओके में आपरेशन के लिए तैयार है, फैसला सरकार को लेना है। गौरतलब है कि मार्च, 2017 में ब्रिटिश सरकार ने संसद के एक प्रस्ताव में कहा था-गिलगित और बाल्टीस्तान भारत के हिस्से हैं। पीओके के संदर्भ में विदेशी सरकारों का रुख भी ऐसा ही रहा है। गिलगित आदि पीओके के ही हिस्से हैं। उससे बहुत पहले 22 फरवरी,1994 को नरसिंह राव सरकार के दौरान भारतीय संसद में ध्वनि मत से यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि पीओके भी हमारा कश्मीर ही है। उसे दोबारा लेकर रहेंगे। मोदी सरकार की आक्रामकता को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कई बार दोहरा चुके हैं कि भारत पीओके में बालाकोट से खौफनाक कार्रवाई कर सकता है। बहरहाल पीओके पर जो भी होना है, वह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन  गृहमंत्री के ऐसे कबूलनामे के मायने क्या हैं, वे स्पष्ट नहीं हैं।