इम्तिहान…बच्चों को न दें मार्क्स का टारगेट

एजुकेशन में अव्वल हिमाचल में शिक्षा बोर्ड की सालाना परीक्षाएं सिर पर हैं। दूसरे राज्यों के उलट इस पहाड़ी प्रदेश में पासिंग मार्क्स की जगह छात्रों पर मैरिट में आने का प्रेशर रहता है। साथ ही शिक्षा बोर्ड की तैयारियों पर भी हर किसी की पैनी नजर रहती है। आखिर कैसे इन परीक्षाओं से पार पाने में जुटे हैं प्रदेश के छात्र। परदे के पीछे कितना बड़ा रहता है पेरेंट्स और स्टूडेंट्स का रोल, बता रहा है इस बार का दखल... 

सूत्रधार

पवन कुमार शर्मा, नीलकांत भारद्वाज, सूरत पुंडीर, शालिनी राय भारद्वाज, आशुतोष डोगरा, सुरेंद्र ममटा, राजकुमार सेन, दीपिका शर्मा, मोनिका बंसल, अनिल पटियाल

परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के दबाव के कारण सबसे ज्यादा बच्चे तनाव में रहते हैं। इससे बचने के लिए मनोविशेषज्ञ डा. रवि शर्मा का कहना है कि परीक्षा के समय तनाव से बचने के लिए सबसे पहले अभिभावक और अध्यापक का सहयोग होना बेहद जरूरी है। कई बार बच्चे को तनाव देने में सबसे ज्यादा उसके अभिभावक और उसके शिक्षक ही होते हैं। डा. रवि शर्मा कहते हैं कि  यदि दोनों बच्चे की लगभग परीक्षा आने से पहले आधा घंटा भी काउंसिलिंग करें, तो उसे तनाव कतई नहीं हो सकता, जिसमें खासतौर पर बच्चे को यह विश्वास दिलाया जाए कि वह केवल अपने एक्ट पर ध्यान दे, रिजल्ट के बारे में न सोचे। यानी दोनों बच्चे को खासतौर पर एक बेहतर अंक लेने का टारगेट न बताएं। बच्चे को कहा जाए कि जो भी रिजल्ट लेकर आएगा, वे उसके साथ हैं, लेकिन छात्र को यह बताया जाए कि आपका प्रदर्शन रिजल्ट को सोचकर न हो। डा. रवि कहते हैं कि इसके लिए बच्चे को घंटों पढ़ाई के लिए बैठने का ज़रा भी दबाव न डालें।

बच्चों को बाहर खेलने भेजें

बच्चों के लिए पढ़ाई का एक सही टाइमटेबल तय करें, जिसमें बच्चे को आउटडोर गेम्स खेलने का भी समय तय करें। वहीं, पौष्टिक आहार लेने के लिए भी एक घर में एक लिस्ट तैयार करें, जिसमें दूध और ड्राई फ्रूट या फिर हरी सब्जियों का सेवन करवाएं।

ऐसी-ऐसी कहानियां सुनाएं

बच्चों को तनाव मुक्त करने के लिए एक प्रेरणा देने वाली कहानियां भी सुनाएं, जिसमें एक व्यक्तित्व के  बारे में बताया जाए, जो बहुत पढ़ाई करने के बाद फेल हो जाता है, लेकिन मेहनत नहीं छोड़ता और मंजिल पाता है।

यह गलती करते हैं पेरेंट्स

डा. रवि कहते हैं कि परीक्षा के समय बच्चों की एक-दूसरे से तुलना न करें। अकसर शिक्षक और अभिभावक यह गलती कर बैठते हैं।

दो लाख छात्र देंगे परीक्षा

दसवीं, जमा दो और एसओएस में करीब दो लाख छात्र परीक्षा में बैठ रहे हैं। 2227 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 53 परीक्षा केंद्र महिलाओं द्वारा चलाए जाएंगे। ये परीक्षा केंद्र सावित्री बाई फुले परीक्षा केंद्र के नाम से बनाए गए हैं। इसके लिए बाकायदा ऐसे केंद्रों के बाहर सावित्री बाई फुले के जीवन पर आधारित पोस्टर भी लगाए जाएंगे।

ये टिप्स अपनाएं

* तनाव से बचने के लिए एक्सरसाइज-योग करें

* पौष्टिक आहार-अच्छी नींद जरूर लें

* हर दिन हरी सब्जियां व ताजा खाना ही खाएं

* सोशल मीडिया से पूर्णतयः दूरी बनाएं रखें

* टाइम टेबल बनाएं और उसी के अनुसार पढ़ाई करें

* इस दौरान जंक फूड बिलकुल न खाएं

एजुकेशन बोर्ड के बॉस का दावा छात्रों के हिसाब से सेट किए हैं पेपर

डा. सुरेश सोनी, अध्यक्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड (हिप्र)

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश सोनी का कहना है कि इस बार की बोर्ड परीक्षाएं देने के लिए छात्र तनाव मुक्त हो जाएं। बोर्ड अध्यक्ष का दावा है कि छात्रों की सुविधाओं के हिसाब से ही प्रश्न पत्र तैयार किए हैं। पहली बार छात्र सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेपर का पैटर्न बदला गया है। बाकयादा अंक विभाजन कर पेपर सेट किया गया है। इस बार प्रश्न पत्रों में 40 अंकों की परीक्षा सामान्य होगी। ऐसा उन छात्रों को ध्यान में रखकर किया गया है, जो दसवीं की परीक्षा पास कर अपना कारोबार करना चाहते हैं, उन्हें निराश न होना पड़े और न ही इसके लिए वे नकल के फार्मूले निकालकर अन्य छात्रों को परेशान करें। सभी छात्र बिना तनाव के परीक्षा दे सकें, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। 40 फीसदी एवरेज तरह की परीक्षा रखी गई है। जो मध्यम दर्जे के छात्र मेहनत करके आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए एवरेज तरह का प्रश्न पत्र सेट किया गया है। जो छात्र बड़ा लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। अगले 20 अंकों का पेपर उनके हिसाब से सेट किया गया है। ऐसे में इस बार हर तरह के छात्रों को ध्यान में रखकर मिश्रित प्रश्न पत्र तैयार किए गए हैं।

परीक्षा केंद्रों में खास इंतज़ाम

परीक्षा केंद्रों में तनाव मुक्त वातावरण देने के लिए भी बोर्ड ने इस बार विशेष प्रबंध किए हैं। हर सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जो नकल करने ही नहीं, करवाने वालों पर भी नजर रखेंगे।

नहीं डराएगी फ्लाइंग स्क्वायड

परीक्षा केंद्रों में शांत एवं तनाव मुक्त वातावरण बनाने के लिए एक केंद्र में मात्र दो फ्लाइंग स्क्वायड ही भेजने की योजना है। फ्लाइंग में जाने वाले लोग भी आग्रह भाव से ही परीक्षा केंद्र में जाएंगे। भय का माहौल छात्रों पर नहीं बनने दिया जाएगा। 

ऑल दि बेस्ट स्टूडेंट्स

बोर्ड अध्यक्ष ने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए बिना स्ट्रेस के परीक्षा केंद्रों में जाने का संदेश दिया है। विद्यार्थी विश्वास की भावना से पहुंचें। बोर्ड व शिक्षा विभाग मिलकर बेहतर वातावरण देने का प्रयास कर रहे हैं। नकल रोकने के लिए सीसीटीवी के बजाय प्रदेश के शिक्षक वर्ग का अहम रोल है। अभिभावक भी बच्चों को साकारात्मक माहौल व शांत मन से परीक्षा देने के लिए प्रेरित करें।

स्टूडेंट्स कितने तैयार

न एग्जाम की टेंशन है, न सीसीटीवी कैमरे का स्ट्रेस

कुछ समय से स्टडी टाइमिंग बढ़ा दी है। जो टीचर्स बार-बार पढ़ा रहे हैं, उस पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूं और सिलेक्टिव से ज्यादा थोरोली स्टडी कर रहा हूं। टेंशन थोड़ी-बहुत रहती ही है, लेकिन क्योंकि हमारे टीचर ने शुरू से ही हमें इस तरह तैयारी करवानी शुरू कर दी थी कि अब ज्यादा स्ट्रेस नहीं है। खासकर नाइट क्लासेज जो हमारे स्कूल में लगती हैं, उनका बहुत फायदा हुआ है। पांच महीने से सभी छात्र रात 11 बजे तक स्कूल में रुकते हैं और स्टडी करते हैं। टीचर्स ने इतना तैयार कर दिया है कि न तो एग्जाम की टेंशन है और न ही सीसीटीवी का स्ट्रेस। इसके अलावा कुछ साल के प्रश्नपत्रों को स्टडी किया है               

     — ऋषभ ठाकुर, छात्र (बारहवीं) हमीरपुर

मुश्किल सब्जेक्ट्स के लिए ज्यादा मेहनत

बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर तैयारी मुकम्मल हो चुकी है। जो विषय थोड़े कठिन माने जाते हैं, उन पर ज्यादा देर तक फोकस है। अध्यापक भी लगातार गाइड कर रहे हैं। तनाव दूर करने के लिए योग का सहारा ले रहे हैं                — सारांश, छात्र, मंडी

खेलना-कूदना बंद, अब पढ़ाई पर ज़ोर है

बोर्ड परीक्षाओं को लेकर दबाव है, जिसके चलते अब खेलना-कूदना बंद कर पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। पूरे साल की गई पढ़ाई की परीक्षा अब आ गई है, जिसे पास करना ही उद्देश्य है

—  शशिपाल, छात्र (बारहवीं), ऊना                                                                                                       

सेशन शुरू होते ही स्टडी शुरू, अच्छे मार्क्स जरूर आएंगे

परीक्षा के दिनों में यदि मन को शांत, पढ़ाई पर जोर के साथ-साथ स्मार्ट वर्क किया जाए, तो कोई भी परीक्षा बिना तनाव से पास की जा सकती है और वह भी अच्छे अंकों के साथ। परीक्षा में अच्छे अंक लेने के लिए जरूरी है कि स्कूल का सेशन शुरू होने के पहले दिन से ही तैयारी शुरू कर लें और उसे अंत तक जारी रखें

—  याशिता शर्मा, मेडिकल स्टूडेंट (जमा दो), सोलन

परीक्षा का कोई तनाव नहीं है

परीक्षा का कोई तनाव नहीं है। साल के शुरू से ही पढ़ाई शुरू कर दी थी। प्रतिदिन न पढ़ने वाले बच्चे तनाव में आ जाते हैं। प्रतिदिन प्रत्येक विषय की पढ़ाई करें, तो तनाव नहीं आएगा। यदि तैयारी पूरी हो, तो बोर्ड के आदेशों की भी कोई परवाह नहीं होती है

—  अखिलेश ठाकुर, छात्र (बारहवीं), घुमारवीं

स्टार्टिंग से पढ़ी हूं, टेंशन नहीं है

परीक्षाओं की तैयारी समय से कर रही हूं, कोई टेंशन नहीं है। इसका कारण यह भी है कि पूरे साल भर से पढ़ाई कर रही हूं। इन दिनों सिर्फ रिवीजन कर रही हूं। हर सब्जेक्ट को प्रॉपर टाइम दे रही है। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई का शेड्यूल तैयार कर पढ़ती हूं। ऐसे में अब बोर्ड की परीक्षाओं का ज्यादा तनाव नहीं है। अध्यापकों ने समय से सारा सिलेबस पूरा करवाया और रिवीजन भी अच्छे से करवाई है

—  ईशा बंसल, छात्रा (दसवीं),  शिमला

दस-दस घंटे चल रही है पढ़ाई

वार्षिक परीक्षा को प्री-बोर्ड की तरह ही लेती हूं। वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी नियमित रूप से शुरू से ही कर रही हूं। वार्षिक परीक्षा के लिए किसी भी तरह का तनाव तो नहीं है, परंतु इस दौरान विद्यार्थियों को एकाग्रता की आवश्यकता अधिक होती है। प्रतिदिन परीक्षा के लिए करीब दस घंटे पढ़ाई कर रही हूं

—  प्रिया शर्मा, छात्रा (मेडिकल, जमा दो), नाहन

प्रदेश भर में अव्वल रहने के लिए मेहनत

परीक्षा में अच्छे अंक लेकर स्कूल व परिवार का नाम रोशन कर सकें, इसलिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। करीब चार घंटे तक पढ़ाई कर रही हूं। प्रदेश भर में अव्वल रहने की सोच लेकर पढ़ाई कर

रही हूं               — शिल्पा ठाकुर, छात्रा (जमा दो), नग्गर, कुल्लू

स्कूल में रिवीज़न भी पूरा, छात्र तैयार हैं

छात्र परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। छात्रों का कई बार रिवीजन भी हो चुका है। इससे छात्र को मनोबल बढ़ा हुआ है। छात्रों को अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं...

— परसराम सैणी, प्रधानाचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) मंडी

समझें! बोर्ड परीक्षाएं नहीं, वार्षिक उत्सव है

बोर्ड परीक्षाओं को विद्यार्थी एक उत्सव के रूप में लें, न कि मानसिक दबाव के। यह तो एक प्रक्रिया है कि पढ़ाई के बाद परीक्षा तो होनी ही है, जिसका सभी को पहले ही पता होता है और हर छात्र को इससे गुजरना होता है। इसलिए तनाव न लें और जो नोट्स बनाए गए हैं, उनकी रिवीजन करें। साथ ही पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र भी हल करें, ताकि परीक्षा से पहले आपको पेपर की अच्छी तरह प्रैक्टिस हो जाए

— शकुंतला ठाकुर, प्रधानाचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, टक्का

सोशल मीडिया से दूर रहें, नींद जरूर पूरी करें

परीक्षा के दिनों में बच्चों को तनाव से मुक्ति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अभिभावकों और अध्यापकों की बनती है। सबसे जरूरी है कि जब परीक्षा सिर पर हो, तो बच्चे अपनी नींद पूरी करें। यदि नींद पूरी नहीं होगी, तो स्ट्रेस बढ़ेगा, जिससे वह अपनी परीक्षा सही से नहीं दे सकेगा। परीक्षा के दिनों में अहम यह है कि सोशल मीडिया से दूर रहें, ताकि उसका नकारात्मक असर न पड़े

— मासूमा सिंघा, प्रिंसीपल, एमआरए डीएवी स्कूल, सोलन

जो नोट्स बनाए हैं, उन्हें ही बारीकी से पढ़ें

दिल से पढ़ो, अपने ऊपर विश्वास रखो, सफलता कदम चूमेगी। परीक्षा के समय घबराए नहीं, पढ़ाई दिल से करो, अपना काम समझकर पढ़ें। जो नोट्स बनाए हैं, उन्हें बारीकी से पढें़। छह घंटे भी अपना काम समझकर पढ़ोगे, तो रिजल्ट आपके मुताबिक मिलेगा। एग्जामीनेशन हॉल में शांत बैठकर एग्जाम दें। परीक्षाओं के समय सेहत का भी पूरा ध्यान रखें। सात से आठ घंटे निंद्रा लें, जिससे परीक्षा में बच्चे बेहतरीन रिजल्ट ला सकते हैं

— प्रवेश चंदेल, प्रधानाचार्य, मिनर्वा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, घुमारवीं

रिलैक्स रहें; काम छोड़ें, पढ़ाई करें

पढ़ाई का प्रेशर न लें। उन छात्रों को परीक्षा का प्रेशर रहता है, जो परीक्षा सिर पर आने पर पढ़ाई करने की सोचते हैं। ऐसे में उन्हें यह समझ नहीं आता कि वे कहां से पढ़ाई शुरू करें। उन छात्रों को चाहिए कि रिलैक्स रहें और इन दिनों बाकी कामों के बजाय पढ़ाई को अधिक समय दें और हर एक विषय को टाइम दें

— नरेंद्र कुमार सूद, पिं्रसीपल, पोर्टमोर स्कूल, शिमला

खुश रहें, सालों से दे रहे हैं पेपर

वार्षिक परीक्षा से तनावमुक्त रहने का सबसे बड़ा सुझाव है कि विद्यार्थी परीक्षा के लिए किसी पर भी आश्रित न रहें। विद्यार्थी घर, स्कूल व परीक्षा केंद्र को एक समान महसूस करें और सहज भाव से परीक्षा दें। विद्यार्थी की स्वयं की तैयारियां व आत्मविश्वास सबसे जरूरी है

— केके चंदोला, चेयरमैन, आदर्श विद्या निकेतन, नाहन

जो पहले नहीं पढ़ा, उसे न छेड़ें

परीक्षाओं के दौरान स्टूडेंट्स को एक बात जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि वे उस चैप्टर या विषय को पहले न पढ़ें, जो उन्होंने साल भर न पढ़ा हो। केवल उन्हीं चीजों को रिवाइस करें, जो उन्होंने पहले पढ़ीं हों। इसके अलावा हर विषय के लिए टाइमटेबल बनाकर समय निर्धारित करें कि किस समस कौन सा विषय पढ़ना है। जिस विषय में थोड़े कमजोर हैं, उसे अधिक समय दें। छात्र खान-पान का ध्यान रखें। हल्का भोजन लें और फलों का अधिक प्रयोग करें। जब भी एग्जाम देने सेंटर में जाएं, तो एग्जाम से आधा घंटा पहले कुछ न पढ़ें

— नैना लखनपाल, प्रिंसीपल, हिम अकादमी, हमीरपुर

भूख-नींद कम हो गई है... ऐसे केसों से भरी रहती है ओपीडी

परीक्षा के दौरान बच्चों के तनाव बढ़ने को लेकर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई विशेष सर्वे तो नहीं किया गया है, लेकिन इस समय प्रदेश के अस्पतालों में यह जरूर देखा जाता है कि पीडियाट्रिक्स ओपीडी का यह ग्राफ एकाएक जरूर बढ़ जाता है, जिसमें प्रदेश के मेडिकल और जिला अस्पतालों में बच्चों का आंकड़ा बढ़ा देखा गया है, जिसके बारे में मनोविशेषज्ञ भी यह कहते हैं कि खासतौर पर उच्च तबके के बच्च्चों को ओपीडी में परीक्षा के दौरान परेशानी में देखा जा सकता है। खासतौर पर यह शिकायत की जाती है कि बच्चे की नींद और भूख कम हो गई है। इस दौरान सबसे ज्यादा अभिभावकों के  फोन चाइल्ड काउंसर को आते हैं, जिसमें वह बच्चे के तनाव के बारे में कहते हैं।

बाल कल्याण आयोग भी अलर्ट...

इस बार बाल कल्याण आयोग ने भी गंभीरता जाहिर की है, जिसमें शिक्षा विभाग के साथ एक बैठक आयोजित की गई है, जिसमें उन्हें स्कूलों में बच्चों की काउंसिलिंग को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के लिए कहा गया है। खासतौर पर उन कक्षाआें के लिए काउंसिलिंग अभियान चलाया जाने वाला है, जिसमें बच्चे बोर्ड की परीक्षा देने वाले हैं। बाल कल्याण विभाग के मुताबिक बच्चों की काउंसिलिंग के लिए इस बार शिक्षकों को खास जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पर इस बार एक गाइडलाइन भी तैयार की गई है, जिसमें बच्चों के खान-पान और उनके परीक्षा की तैयारी के टिप्स बताए गए हैं, जिसमें खासतौर पर तय समय में पाठ्यक्रम को बांटने के लिए कहा गया है।