Tuesday, March 31, 2020 07:16 PM

इस्लामी आतंकवाद पर ट्रंप

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और उसके प्रधानमंत्री को जो प्रमाण-पत्र दिए हैं, जो कसीदे पढ़े हैं,उनसे बड़ी मुबारकबाद नहीं हो सकती। पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत को 'महाशक्ति माना है। भारत की अंतरिक्ष में कामयाबी का जिक्र किया। भारत को 'ज्ञान का भंडार भी माना और उसकी विविध एकता को विश्व के लिए प्रेरणा करार दिया। यह भी गौरतलब है कि हमारे देश में 'असहिष्णुता को लेकर एक पूर्वाग्रही प्रचार चलता रहा है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को एक 'सहनशील देशÓ कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को कठोर मेहनत की मिसाल कहा, उन्हें 'सच्चा दोस्त माना और उन्हें एक सख्त वार्ताकार करार दिया है। यानी प्रधानमंत्री मोदी के साथ कोई भी डील करना मुश्किल है, क्योंकि वह राष्ट्रीय हितों को लेकर अड़े रहते हैं। बहरहाल यह प्रशंसा न तो सियासी है और न ही इसका कूटनीति से कोई लेना-देना है। इसमें भारत का महज एक विराट बाजार समझने की सोच भी नहीं है। अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत-अमरीका की दोस्ती को अधिक गहरा और मजबूत करने के मद्देनजर भी ऐसे कसीदे पढ़े हैं। उन्होंने कई बार दोहराया कि अमरीका भारत का निष्ठावान दोस्त बना रहेगा, लेकिन मौजूदा कालखंड और संदर्भों में अमरीकी राष्ट्रपति ने इस्लामी आतंकवाद और विचारधारा पर साफ  बयान दिया और पाकिस्तान को कड़े लफ्जों में संदेश दे दिया। ट्रंप ने भारत में किसी भी सार्वजनिक मंच से पहली बार कहा है कि भारत-अमरीका ने इस्लामी आतंकवाद को झेला है, लेकिन अब उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के साथ अपने अच्छे संबंधों का जिक्र किया, लेकिन यह दावा भी किया कि अमरीका की कोशिशों से पाकिस्तान कुछ सुधरा है, लेकिन उसे और भी सुधारेंगे। ट्रंप ने पाकिस्तान को आदेश के लहजे में कहा कि उसे आतंकवाद और आतंकी संगठनों का खात्मा करना होगा। ट्रंप ने पाकिस्तान को फिलहाल खुशफहमी में रखा है,क्योंकि उसके जरिए ही तालिबान के साथ बातचीत और समझौता संभव है। यदि अफगानिस्तान में  तालिबान ने मौजूदा युद्धविराम को जमीन पर जारी रखा,तो 29 फरवरी, को अमरीका और तालिबान गुट बातचीत की मेज पर आ सकते हैं। यदि समझौता हो गया, तो अमरीका अफगानिस्तान से अपने सैनिक हटा लेगा। फिर तालिबान और मौजूदा गनी सरकार मिलकर तय करेंगे कि वहां की प्रशासनिक व्यवस्था कैसे चलेगी। दरअसल अमरीका के लिए यह सामरिक रणनीति का दौर है और अफगानिस्तान,पश्चिम एशिया के संदर्भ में टं्रप का इस्लामी आतंकवाद वाला ऐलान बेहद महत्त्वपूर्ण है। यह सिर्फ  पाकिस्तान के लिए ही चेतावनी नहीं है, बल्कि ईरान और उसके समर्थित देशों के लिए भी स्पष्ट संकेत है। अमरीकी राष्ट्रपति ने इस्लामी आतंकवाद के संदर्भ में ही आईएसआईएस का भी जिक्र किया कि उसका 100 फीसदी खात्मा किया जा चुका है। उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण बात भी कही कि जो लोग सरहद पर आतंकियों और कट्टरपंथियों के साए में जी रहे हैं, उनके लिए बड़े फैसले लिए गए हैं। अब हम घुसपैठियों को अपने देश में घुसने नहीं देंगे। हरेक देश को अपनी सीमाओं की रक्षा करने और घुसपैठियों को रोकने के लिए कानून बनाने की स्वतंत्रता है। हालांकि उन्होंने सीएए या एनआरसी का शाब्दिक जिक्र भी नहीं किया, लेकिन भारत सरकार के ऐसे फैसलों पर परोक्ष मुहर लगा दी। टं्रप ने इस्लामी आतंकवाद का जिक्र करते हुए एक बार भी कश्मीर का नाम नहीं लिया, लिहाजा पाकिस्तान की छाती पर सांप बिलबिला रहे होंगे। बहरहाल दो देशों के शासनाध्यक्ष मिलते हैं, तो संधियां और समझौते होते ही हैं। कारोबार भी किए जाते हैं, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, धरोहर, उसके सौंदर्य, सामाजिक-राष्ट्रीय प्रभाव पर बहुत कुछ बोला और खूब तालियां बटोरीं। ऐसी आत्मीयता किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति ने नहीं दिखाई। जब दोनों देशों के नेता आपस में बैठकर सौदों और समझौतों पर बात करेंगे, तो बेशक रक्षा, तेल, गैस, ऊर्जा के क्षेत्रों में लेन-देन पर बात होगी। उनका विश्लेषण अलग से किया जाएगा। हमारे लिए पाकपरस्त आतंकवाद का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और  उसमें अमरीका भागीदार बन रहा है। इससे गंभीर दोस्ती और क्या हो सकती है।