Tuesday, July 16, 2019 10:37 PM

इस बार आसान नहीं श्रीखंड यात्रा

श्रद्धालुओं को डरा रहे कई बड़े-बड़े ग्लेशियर, पार्वती बाग से आगे पूरा रास्ता बर्फीला

आनी  —भगवान तपस्या से मिलते हैं और आनी उपमंडल के निरमंड खंड की 18570 फुट की ऊंचाई पर श्रीखंड कैलाश पर्वत की चोटी पर बसे भोले बाबा भी 35 किलोमीटर की कठिनत, जोखिम भरी लेकिन रोमांचक यात्रा के बाद मिल पाते हैं। हालांकि इस बार श्रीखंड महादेव ट्रस्ट द्वारा आधिकारिक तौर पर यात्रा की तारीख 15 जुलाई से 31 जुलाई तक तय की गई है। लेकिन भक्तों को न तो मौसम रोक पाता है, न ही ट्रस्ट की तय की तारीखें। श्रीखंड महादेव के दर्शनों को होने वाली देश की कठिनतम, रोमांच और श्रद्धा से भरपूर यात्रा इस बार पहले से ज्यादा जोखिम भरी है। इस बार पार्वती बाग तक भले ही रास्ता ठीक है, लेकिन पार्वती बाग से आगे श्रीखंड तक पूरे रास्ते में बर्फ है और कई किलोमीटर तक रास्ते का नामो निशान तक नहीं है। आनी से श्रीखंड यात्रा से लौटे बुछैर के पूर्ण चंद और उनके साथियों ने बताया कि वे 29 जून को आनी से श्रीखंड यात्रा के लिए रवाना हुए थे और 2 जुलाई को  लौट आए। पूर्ण चंद ने बताया कि 29 को उन्होंने सिंहगाढ़ से थाचडू तक का सफर तय किया, 30 जून  को भीम डवारी  और पहली जुलाई को पार्वती बाग होते हुए श्रीखंड महादेव के दर्शन कर रात को थाचडू में विश्राम किया था। उन्होंने बताया कि पार्वती बाग तक  टेंट लग चुके हैं जहांखाने-ठहरने की व्यवस्था लोगों द्वारा की गई है। पूर्ण चंद का कहना है कि इस बार यात्रा सबके बस की बात नहीं है। पूरे रास्ते में बर्फ ही बर्फ होने के कारण चढ़ाई चढ़ पाना कठिन ही नहीं मुश्किल है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इंतजाम

श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के अनुसार सिंहगाढ़् बेस कैंप और कुंशा में मेडिकल सहायता कैंप के अलावा भीम डवारी, पार्वती बाग और थाच में कैंप बनाए गए हैं, जहां मेडिकल टीमें दवाइयां और ऑक्सीजन की व्यव्स्था के अलावा रेस्क्यू टीमें और पुलिस एवं होमगार्ड के जवान किसी भी आपात स्थिति से निपटने को तैयार रहते हैं।

15 जुलाई से शुरू होगी यात्रा

श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम आनी चेत सिंह ने हिदायत दी है कि ट्रस्ट की एक टीम ने भी श्रीखंड के रास्ते की रेकी की है और रिपोर्ट के अनुसार इस बार रास्ते मे बर्फ  ज्यादा है, जिसके कारण कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में यात्रा पर 15 जुलाई को आधिकारिक तौर पर यात्रा शुरू होने के बाद ही जाना सुरक्षित है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जान जोखिम में डालकर यात्रा न करें। उन्होंने बताया कि इस बार 14 साल या इससे कम उम्र के बच्चों को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ऐसे पहुंचें श्रीखंड

श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए   रामपुर से कुल्लू के निरमंड होकर बागीपुल और जाओं तक गाडियों और बसों में पहुंचना पड़ता है। इसके बाद करीब तीस किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है।

दर्शनीय स्थल

यात्रा के दौरान डंडाधार , थाचडू काली,  टॉप काली घाटी,  भीम तलाई कुंशा, भीम डवारी, पार्वती बाग, नैन सरोवर आदि दर्शनीय स्थल रास्ते में आते हैं।

श्रद्धालु इन बातों का रखें ध्यान

 श्रीखंड की यात्रा में शारीरिक और मानसिक रूप से फिट व्यक्ति ही जाएं।   बेस कैंप पर मोबाइल नंबर और पूरे पते सहित पंजीकरण करवाएं ।    यात्रा के दौरान जत्थों में ही जाएं श्रद्धालु  किसी भी प्रकार का नशा लेकर अपनी जान को जोखिम में न डालें।  यात्रा में जल्दबाजी न करें, बल्कि धीरे-धीरे चढ़ाई चढ़ें।   यात्रा के दौरान जरूरी दवाइयां, डंडा, गर्म कपड़े, अच्छी पकड़ वाले जूते अवश्य ले जाएं।

भीम डवारी से आगे ग्लेशियर ही ग्लेशियर

श्रद्धालू पूर्ण चंद ने बताया कि भीम डवारी और कुंशा से कुछ आगे ग्लेशियर शुरू हो जाते हैं हैं, जबकि पार्वती बाग के बाद केवल बर्फ  ही बर्फ  है, रास्ता गायब है, ग्लेशियरों की गिनती कर पाना संभव नहीं है।  श्रीखंड तक ग्लेशियर होने के कारण केवल बर्फ पर ही सफर कर सकते हैं। पूरा रास्ता उन्होंने एक नहीं बल्कि दो-दो डंडों  के सहारे पार किया।  इस बार नैन सरोवर होकर जाने वाला रास्ता भी बर्फ  में कहीं गायब है। लिहाजा बर्फ से ही जाना पड़ रहा है।

पार्वती बाग के बाद पानी का नामोनिशान नहीं

श्रद्धालुओं के अनुसार पार्वती बाग के बाद कहीं भी पीने का पानी नहीं मिल पाता, जबकि थक कर बैठना हो तो बर्फ  पर बैठना पड़ता है, जबकि बर्फीली  हवाएं शरीर के तापमान को गिराने का काम करती है, जबकि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से जूझना भी एक चुनौती है।  उन्होंने बताया कि श्रीखंड महादेव के आसपास बर्फ  इतनी ज्यादा है कि श्रीखंड की चोटी का चक्कर भी इस बार श्रद्धालुओं द्वारा लगाया नहीं जा सकेगा।   वापस आती बार यात्रियों को सावधानी बरतनी होगी।