इस बार रूसा के तहत मिले केवल दो करोड़, वह भी एक ही कालेज को

शिमला - हिमाचल प्रदेश को इस बार राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत केवल दो करोड़ की ही राशि मिली है। अहम यह है कि केंद्र सरकार ने यह राशि भी केवल शिमला जिला के ठियोग डिग्री कालेज को ही जारी की है। वहीं सैकड़ों कालेजों को इस प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पैब) बैठक में रूसा की ग्रांट न मिलना प्रदेश शिक्षा विभाग को एक बहुत बड़ा झटका है। बता दें कि पहली बार ऐसा हुआ है कि केंद्र सरकार ने पैब की बैठक में केवल एक ही कॉलेज को दो करोड़ की राशि अप्रूव की है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार के साथ हुई पैब की बैठक में लगभग 90 करोड़ की राशि केंद्र सरकार ने हिमाचल के कालेजों को जारी की थी। बताया जा रहा है कि इस बार नैक से ग्रेड न मिलने की वजह से कई कालेजों को ग्रांट नहीं मिली है। वहीं, झंडूता, जुखाला, बिलासपुर जैसे कई ऐसे नैक एक्रिडेडिट कॉलेज हैं, जो केंद्र से बजट का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें भी इस बार निराशा हाथ लगी है। बजट न मिलने की वजह से रूसा सिस्टम में सुधार करने में कई बाधाएं इस बार आ सकती हैं। गौर हो कि प्रदेश के 60 से 70 कालेजों को इस बार भारत सरकार से फेस वन व टू के तहत रूसा बजट मिलना था। राज्य के कई ऐसे कालेज भी हैं कि जिन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रांट भी नहीं मिली है। हालांकि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष करीब 55 कालेजों को लाखों की इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रांट जारी की थी, वहीं 40 ऐसे कालेज है, जिन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रांट भी अभी तक नहीं मिल पाई है। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार द्वारा कालेजों को रूसा ग्रांट न देने के पीछे एक कारण यह भी है कि कालेजों ने पुराना यूसी सही ढंग से नहीं भेजा था। वहीं एमएचआरडी के मिशन डायरेक्टर द्वारा शिक्षा विभाग व कालेजों को हाल ही में निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुसार भी कार्य नहीं किया गया। हैरानी इस बात की है कि केंद्र सरकार ने पैब की बैठक में रूसा के तहत कोई नया कलस्टर विवि तक  खोलने की घोषणा नहीं की। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने फटकार लगाते हुए कहा है कि प्रदेश रूसा के बजट को सही ढंग से खर्च करे, वहीं समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेंजे, ताकि बजट की अगली ग्रांट मिल सके। गौर हो कि हिमाचल में रूसा सिस्टम का तीसरा चरण 2020 में शुरू होना है। अभी तक रूसा फेस टू का बजट तक अधिकतर कालेज सहित एचपीयू को नहीं मिला है। इस पैब की बैठक से सरकार व शिक्षा विभाग को उम्मीद थी कि केंद्र से रूसा फेस टू की ग्रांट अप्रूव हो जाएगी। फिलहाल ऐसा हो तो नहीं पाया है, ऐसे में देखना यह होगा कि बजट न मिलने के बाद अब हिमाचल सरकार व शिक्षा विभाग कालेजों पर क्या सख्ती दिखाते हैं। प्रदेश में वर्ष 2014 से यानी जब से रूसा सिस्टम लागू हुआ है, तब से अभी तक प्रदेश को 300 करोड़ का बजट मिल चुका है। इस बार का पहला झटका यह है कि इतने कालेजों को बजट देने से केंद्र सरकार ने रुचि नहीं दिखाई है।

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