इस हफ्ते की फिल्म : स्त्री

नर्देशक : अमर कौशिक

कलाकार : श्रद्धा कपूर, राज कुमार राव, पंकज त्रिपाठी

रिलीज दिनांक : 31 अगस्त, 2018

दिव्य हिमाचल की रेटिंग : **/5

साल के चार ही दिन क्यों खास। ऐसा इन चारों दिनों में क्या है, जो और दिनों में नहीं। कौन सा अपना बदला पूरा करने के लिए स्त्री पुरुषों को ही उठाती है।  हम तो आज भूत-प्रेत की बातों को न सुनना पसंद करते हैं, न यकीन करते हैं, लेकिन फिर भी कुछ  चीजें ऐसी हो जाती हैं, जो हमें कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देती है। ऐसी ही कहानी है ‘स्त्री’।  इस फिल्म में कोई रूह स्त्री का रूप धर कर घर के मर्द का नाम लेकर दरवाजे पर दस्तक देती है और अगर कोई पुरुष दरवाजा खोल देता है, तो वह उसे अपने साथ ले जाती है। बाहर बस उसके कपड़े पड़े रह जाते हैं। इस डर के मारे गांव के लोगों ने घर के बाहर लिख देते हैं ‘ओ स्त्री कल आना’।  वह सोचती है घर पर कोई नहीं है, और वापस लौट जाती है।  फिल्म में कॉमेडी भी अच्छी है। डायरेक्टर अमर कौशिक ने कॉमेडी का भी तड़का लगा दिया है। विक्की (राजकुमार राव) मध्यप्रदेश के एक छोटे से कस्बे चंदेरी में एक टेलर है। चंदेरी में साल के चार दिन पूजा होती है। उन दिनों में स्त्री लोगों को अपना शिकार बनाती है, इसलिए इन दिनों वहां के लोग खासे सावधान रहते हैं। एक दिन उसकी मुलाकात एक अंजान स्त्री (श्रद्धा कपूर) से होती है। विक्की अपने दोस्तों बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) और जना (अभिषेक बनर्जी) को उसके बारे में बताता है।  इसी बीच विक्की का कोई दोस्त और दूसरा दोस्त जना एक के बाद एक करके स्त्री के शिकार बन जाते हैं। तब बिट्टू विक्की को स्त्री की अजीब हरकतों के बारे में समझाता है, तो वे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) की शरण में जाते हैं, तो वे स्त्री की पूरी सच्चई बाताते हैं। विक्की और उसके साथी स्त्री से कैसे छुटकारा पाते हैं। यह जानने के लिए आपको सिनेमा जाना होगा।

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