Wednesday, December 11, 2019 05:16 PM

ईद पर ‘चांद’ बनकर आए एम्स के डाक्टर

शिमला -दस वर्ष के लंबे इंतेजार के बाद आईजीएमसी मंे दो मरीजा़ंे का सोमवार को किडनी ट्रंासप्लांट सफल हो गया है। एम्स से आए डॉ संजय अग्रवाल, डॉ बीके बंसल, डॉ कृष्णा, डॉ आदित्य ने इस ऑपरेशन को सफल करने मंे आईजीएमसी का हाथ थामा है। वहीं आईजीएमसी यूरोलोजी की टीम डॉ पंपोश रैना, डॉ गीरिश, डॉ कै लाश और डॉ मंजीत की टीम इन ऑपरेशन को सफल करने के लिए शामिल थी। वहीं नेफ्रोलॉजी मंे डॉ संजय और अजय जरियाल के नाम शामिल है। बहरहाल अभी एम्स से दोबारा से टीम आईजीएमसी आएगी। जिसमंे अन्य दो ऑरपरेशन करने भी तय रखे गए हैं। जिसके बाद आईजीएमसी के डॉक्टर अपने स्तर पर ट्रंासप्लांट करेंगें। जानकारी के मुताबिक अभी ये ऑपरेशन पर एम्स के डॉक्टर फुल चैक रखंेगें। जिसमंे इन मरीज़ांे की केयर दस दिन तक दिन रात देखी जाएगी।  मध्यम वर्ग से संंबंध रखने वाले परिवारांे का अभी ऑपरेशन प्रदेश सरकार के स्पेशल बजट से किया गया है जिसमंे 15 लाख का स्पेशल बजट आईजीएमसी को दिया गया था लेकिन बाद मंे प्रदेश की अहम स्वास्थ्य योजना हिमकेयर के माध्यम से भी किडनी ट्रंास्प्लांट हो पाएंगें।  गौर हो कि आईजीएमसी पर किडनी ट्रंासप्लांट करने का अब सरकार का भारी दबाव था। जानकारी के मुताबिक विधानसभा सत्र से पहले अस्पताल मंे किडनी ट्र्रंासप्लांट का ऑपरेशन किया जाना तय किया गया था। जिसमंे 12 अगस्त का समय निर्धारित किया गया। अस्पताल मंे पहले ट्रंासप्लांट की तस्वीर देखंे तो आईजीएमसी मंे किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती किया गया मरीज़ ही मौत के मुंह मंे पिछले माह चला गया था। भले ही कारण ये रहा कि उसके लिए न तो डोनर का इंतेजाम हो पाया और नहीं एम्स से डॉक्टर पहुंच पाए लेकिन आईजीएमसी मंे एक ऐसी उम्मीद हार गई  जो जीवन की आस लगाई बैठी थी। लेकिन इस बार आईजीएमसी का प्रयास सफल रहा है।

पहले बीस आपरेशन करेेगी एम्स की टीम

पहले बीस ऑपरेशन एम्स से आने वाली टीम करेगी। उसके बाद आईजीएमसी स्वयं ऑपरेशन करेगा। आईजीएमसी एमएस डॉ जनक का कहना है कि अब आईजीएमसी भी इस ओर पूरी कोशिश करेगा कि बीस ऑपरेशन के बाद अस्पताल अपना बेहतर प्रदर्शन क रेगा।

सीएम ने बजट भाषण में की थी घोषणा

गौर हो कि वर्ष 2018-19 के बजट भाषण मंे प्रदेश सरकार ने गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए चार करोड़ का बजट प्रस्तावित किया था लेकिन अभी तक ये योजना सफल ही नहीं हो पाई थी।विशेषज्ञांे का कहना है कि जो किडनी दान देता है उसक ा स्वास्थ्य भी ठीक रहता है लेकिन इसके लिए प्रदेश मंे एक अहम काउंसलिग अभियान चलाना भी जरूरी दिख रहा है। हर वर्ष प्रदेश मंे सौ से अधिक किडनी प्रभावित लोगांे को ट्रंासप्लांट की आवश्यक्ता पड़ रही है।