ईमानदारी, दृढ़ निश्चय की मिसाल टीएन शेषन

हरि मित्र भागी 

सकोह, धर्मशाला

श्री टीएन शेषन जो इस नश्वर शरीर को छोड़ कर दस नवंबर 2019 को इस संसार से उन यादों को छोड़ कर परलोक गमन कर गए जो भारत लोकतंत्र में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएंगी। उन्होंने उन प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए वह छाप छोड़ी कि यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी, दृढ़ निश्चय, आत्म विश्वास से अपना कर्त्तव्य पालन करता हुआ केवल ईश्वर को समक्ष रखकर कार्य करें तो दुनिया की कोई भी शक्ति उसे अडिग नहीं कर सकती। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त में जो कार्य किया वह उन्होंने इन्हीं आदर्शों के मद्देनजर रखते हुए किया उनके आगे आने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल व लिंगडोह इत्यादि इसी राह पर चले। उन्होंने चाटुकारिता को दरकिनार करते हुए अपनी अंतरआत्मा के अनुसार निर्णय लिए। कोई राजनीतिक दबाव उन पर असर नहीं डालता था। वे स्वयं कहा करते थे कि मुझे कहा जाता है कि मैं नेताओं को खाता हूं, परंतु मैं उसी कानून से कार्य करता हूं, जो पहले से बने हुए हैं व मैं उन्हें कार्यान्वित करता हूं, व मुझे उसे अमलीजामा पहनाने का ढंग आता है, वे आध्यात्मिक व्यक्ति होते हुए उस पर अमल भी करते थे। बिहार में मतदान केंद्रों पर कब्जा करने की घटनाएं आम हुआ करती थीं, शेषन महोदय ने पुख्ता प्रमाण मिले तो चुनाव रद्द कर दिया। यद्यपि उनकी छवि एक सख्त अधिकारी की थी परंतु उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। नरसिहंराव के प्रधान मंत्री काल में उन पर अंकुश लगाने के लिए दो और चुनाव आयुक्त एम एस गिल व जीवीजी कृष्णामूर्ति की नियुक्ति करके इसे बहुसदयीय बनाया परंतु श्री शेषनके निर्णय ही अधिकतर सर्वमान्य हुए व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री गिल ने भी माना कि उनके द्वारा खीचीं गई रेखा हमारे लिए दिशा निर्देश का कार्य कर रही है। सचमुच उनकी कार्य पद्धति चुनाव आयोग की जीवन रेखा थी। उन्होंने प्रमाणित किया कि चुनाव आयोग स्वायत्त संस्था है। उन्होंने मतदान पेटियों पर कब्जा करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों का प्रावधान किया। उन्होंने उन राजनीतिज्ञों का पर्दाफाश किया जो चुनाव में सरकारी मशीनरी का गलत प्रयोग करते थे। चुनाव के समय उन घोषणाओं पर प्रतिबंध लगाया जो कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने वाली हो। शराब की चुनाव के समय बिक्री, धर्म के नाम पर प्रचार, बिना लाइसेंस के बंदूक इत्यादि रखना भी उन्होंने प्रतिबंधित किया। उन्होंने पंजाब का चुनाव हिंसा के कारण रद्द कर दिया। मतदाता पहचान पत्र व चुनाव अधिकारियों को चाय पानी का खर्चा देना श्री शेषन के निर्णय हैं। उनको दोनों बार चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। हजारे के शब्द दोहराने पड़ेंगे कि यदि मैं चुनाव लड़ूं तो मेरी जमानत जब्त हो जाएगी, संविधान निर्माता डा. अंबेडकर भी चुनाव हार गए थे। शेषन, पुलिस अधिकार किरण बेदी व मुबई निगम के अधिकारी श्री खैरनार बड़े सिद्धांत प्रिय व्यक्तित्व थे, परंतु श्रीमति किरण बेदी ने भी चुनाव लड़ा तो वह भी चुनाव हार गईं यह है राजनीति। उनके द्वारा किए गए कार्य अविस्मर्णीय रहेंगे। उनका नाम स्वतंत्र भारत की लोकतंत्र की नींव मजबूत करने वालों में एक महान पुरुष के रूप में लिया जाएगा। वे सचमुच में इतिहास रच गए। ऐसे लोगों की मृत्यु नहीं होती, वे अपने आदर्शों के कारण अमर रहते हैं।