Monday, September 16, 2019 07:56 AM

उड़ान योजना से कर्ज में फंसी सरकार

11 करोड़ 57 लाख की देनदारी, अनियमित उड़ानों के चलते पूरा नहीं हो रहा पैसा

शिमला - केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश में शुरू की गई उड़ान योजना राज्य सरकार के गले की फांस बन गई है। आलम यह है कि न तो केंद्र की इस योजना को बंद किया जा सकता है और न ही इससे लोगों को ही पूरी तरह से लाभ मिल पा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस योजना के तहत अनियमित हवाई उड़ानों के चलते सारी दिक्कत हो रही है, जिस कारण सरकार पर 11 करोड़ 57 लाख 86 हजार 391 रुपए की देनदारी हो गई है। बताया जा रहा है कि अनियमित उड़ानों के चलते पैसा पूरा नहीं हो रहा है, वहीं   शिमला के जुब्बड़हट्टी में जो स्टाफ है, उसका भी भारी-भरकम खर्चा सरकार को वहन करना पड़ रहा है। यहां पर सीआईएसएफ के जवान सुरक्षा के लिहाज से तैनात हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार ने यहां पर केंद्रीय बल के बजाय हिमाचल पुलिस के जवानों को तैनात करने की मांग उठाई है, ताकि उन पर होने वाला खर्च कम हो सके। राज्य सरकार एक एग्रीमेंट के तहत हर महीने यहां तैनात सुरक्षा कर्मियों के वेतन और यहां के दूसरे अन्य खर्चों के लिए 60 लाख रुपए जारी करती है, जो वर्ष  2017 से नहीं दिया जा सका है। इसके साथ यहां पर सबसिडी की सीटों में भी बढ़ोतरी की मांग प्रदेश सरकार ने की है। प्रदेश सरकार को उड़ान-एक योजना में दी जा रही सेवाओं के बदले में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को पैसा देना होता है, जिनकी 11 करोड़ से ज्यादा की राशि लंबित हो गई है, जो सरकार अभी तक नहीं दे पाई है। बताया जाता है कि खराब मौसम के कारण समय पर उड़ानें नहीं हो रही हैं। पिछले करीब तीन सप्ताह से एक भी उड़ान इस सेवा के तहत हिमाचल के लिए नहीं हो सकी है। इसके अलावा पायलट की भी कमी पेश आ रही है। नियमित उडानें न हो पाने के कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें या तो अपनी फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ रही है, जिसके चलते लोग सड़क मार्ग से जाने को मजबूर हैं। ऐसे में इस मामले को प्रदेश सरकार ने केंद्र से उठाया है।  राज्य सरकार ने केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिख कर शिमला के लिए नियमित उड़ानें शुरू करने को कहा है, वहीं  जुब्बड़हट्टी पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों को हटा कर वहां पर हिमाचल पुलिस के जवानों को तैनात किए जाने की मंजूरी देने की मांग की है। प्रदेश सरकार ने अपने सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए प्रदेश को उसके द्वारा मांगी जा रही छूट देने का आग्रह किया है।