Monday, April 06, 2020 06:36 PM

उद्यमी बोले, कैसे बनाएं सेनेटाइजर

कोरोना से लॉकडाउन के बाद बद्दी फार्मा हब पर बड़ा असर; कारोबारी बोले, पुलिस नहीं कर रही सहयोग

बीबीएन - कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन के बीच जंहा दवा निर्माण को आवश्यक सेवा अधिनियम में रखा गया है लेकिन एशिया के फार्मा हब बददी में प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट गाईड लाईन जारी न करने के कारण फार्मा उद्यमियों को दर दर भटकना पड रहा है। दवा उद्यमियों व सेनिटाइजर निर्माताओं का कहना है कि सरकार दवा व सेनिटाइजर निर्माण जारी रखने के आदेश दे रही है लेकिन पुलिस प्रशासन उन्हें सहयोग नही कर रहा है। जिससे उन्हें उद्योग चलाने में दिक्कत आ रही हैए हालात ये है कि ये उद्यमी परमिशन के चक्कर मे ही उलझ कर रह गए है।  यंहा उल्लेखनीय है कि सरकार ने दवा उद्योगों को जीवन रक्षक उत्पाद बनाने के कारण उद्योग चलाने में छुट दे रखी है जबकि बाकी उद्योग पूर्णतयरू बंद हैं।  प्रदेश सरकार ने कफर्यू लगाने से पहले साफ निर्देश दिये थे कि फार्मा फूड व इनसे जुडे पैकिंग व मोल्डिंग के उद्योग 24 घन्टे कार्य कर सकते हैं। लॉक डाउन तक तो यह निर्देशों की पालना होती रही लेकिन जैसे ही क्फर्यू लगा तो फार्मा उद्योंगो पर मुसिबतों का पहाड़ टूट पड़ा। फार्मा उद्योगपतियों एचडीएमए के संरक्षक सतीश सिंगलाए लघु उद्योग भारती फार्मा विंग के प्रदेश कमेटी चेयरमैन चिरंजीव ठाकुरए हरीश कुमारए पंकज गुप्ताए सुरेश कुमार आदि का कहना है कि हिमाचल में साथ लगते राज्यों की तरह ऑनलाईन परमिशन की सुविधा नहीं है। उद्योगपतियो को उपमंडल कार्यालय नालागढ़ या तहसील बद्दी में जाकर अनुमति लेनी पड रही है लेकिन हर चौराहे पर खड़ी पुलिस उन्हें कार्यालय ही पहुंचने नहीं दे रही है। उन्होने कहा कि जब प्रदेश का राज्य स्तरीय ड्रग कंट्रोलर कार्यालय बददी में है तो सरकार को उनको अनुमति देने के लिए अधिकृत करना चाहिए क्योंकि इसके कारण से उनके कार्यालयों में सिर्फ भीड बढ रही है जबकि राज्य ड्रग कंट्रोलर खाली बैठे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख यमन्त्री फार्मा व फूड उद्योगों को चलाने की अपील कर रहे हैं लेकिन दूसरी ओर पुलिस फार्मा उद्योगों के बढ़ते कदमों को रोक रही है जो कि जीवन रक्षक दवाईयों का निर्माण करती है। पुलिस के खौफ  के चलते कोई भी वर्कर उद्योग परिसर तक नहीं पहुंच पा रहा है और जो आता है तो पुलिस उसको रोक कर वापिस भेज देता है और उनके वाहनों को भी बिना वजह तंग किया जाता है और जब्त कर लिया जाता है। ये ही नहीं जिन उद्योगों को अनुमति मिल भी रही है उसे मानने से साफ मना कर दिया जाता है, दवा व फूड उद्योगपतियों का कहना है कि उपमंडल प्रशासन और पुलिस विभाग के आपसी तालमेल न होने का खामियाजा फार्मा उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि भारत सरकार द्वारा फार्मा के कच्चे माल व तैयार माल की सप्लाई के लिए एयर ट्रांसपोर्ट की सुविधा प्रदान की गई है। लेकिन एयरपोर्ट  मोहाली पंजाब में होने के कारण वहां तक पहुचना भी नामुमकिन है। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उद्योगपतियों को एसडीएम व एसपी द्वारा एक लिखित निर्देश जारी किए जाऐं जिससे कि फार्मा उद्योग सुचारू रूप से चलते रहें तथा अकस्मात जरूरत पड़ने पर काम आ सकें या इसके लिए प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर को अधिकृत किया जाए।