Thursday, December 03, 2020 07:13 AM

ऊना की दूब में उगा मरहम

जिन रास्तों पर निकल कर कभी हिमाचल ने मंजिलें मापीं, वे आज चिन्हित करते हैं कि पांव में घाव अब रिसते हैं। देश-विदेश में अपने लिए जगह बना पाए हिमाचली अब लौटने का एक हिसाब मात्र रह गए और यह इसलिए कि कोरोना  ने जगत के निर्धारित रास्ते बदल दिए। गौर करें कि कोरोना संकट के दौरान हिमाचल के सरोकार भी अब रक्षात्मक कवच पहनकर चुगली कर रहे हैं कि फलां घर का मुंडा बिगड़ गया है या होम क्वारंटीन की जद में आए परिवार ने किस तरह कोई सीमा तोड़ दी। ऐसे में आते-जाते लोगों के कदमों की आहट से निकलती जिंदगी की आहें सुनी जा सकती हैं, लेकिन कहीं चौकस दूब बन कर मरहम हाजिर है। यह जिक्र इस बार ऊना का होगा, जो हिमाचल में सबसे अधिक आने जाने वालों की खबर रखता है। ऊना रेलवे स्टेशन, मैहतपुर बैरियर और जिला प्रशासन इस समय हिमाचल के लिए एक कर्मठ पारी के बीच अपनी उपस्थिति का जोरदार प्रदर्शन भी हैं। मुंबई, कर्नाटक-गोवा से आती हुई ट्रेन जब ऊना रेलवे स्टेशन पर हिसाब देती है, तो अब तक बत्तीस सौ यात्री अपनी थकान भूल चुके होते हैं। कुछ इसी तरह मैहतपुर का बैरियर सड़क मार्ग से लौटे करीब साठ हजार हिमाचलियों का प्रवेश कराता है। यह दौर जारी है और कल कोई किसी और ट्रेन से जब वापस लौटेगा, तो ऊना का प्रशासन, पुलिस बंदोबस्त और चिकित्सा विभाग की तैयारियां इसकी सूचना देंगी। दरअसल ऊना के प्रशासनिक इंतजाम बता रहे हैं कि देश के हालात क्या हैं और किस तरह बेहतर हो सकता है हिमाचल। बेशक पहले आगुंतक को देखते ही प्रवेश और दिल के द्वार बिना शर्त खुल गए, लेकिन अब ऊना प्रशासन एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत हर आने वाले की  तहकीकात में पसीना बहा रहा है। जाहिर है इस दौर ने ऊना की प्रशासनिक व्यवस्था को जिला की परिपाटी से कहीं आगे खड़ा कर दिया है, लिहाजा आने वाले समय में यह समझना होगा कि प्रदेश की हैसियत में इस जिला की भौगोलिक स्थिति का कितना महत्त्व है। यह विकास के गणित में भी स्पष्ट है कि हिमाचल के अधिकांश भागों के लिए ऊना रेल परियोजना तथा सड़क संपर्क कितनी अहमियत रखता है। प्रदेश के कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर, कुल्लू, चंबा और लाहुल-स्पीति तक पहुंचने के लिए ऊना की राहों का स्पर्श अगर आज एक अनिवार्यता है, तो कल इस अनुभव से सीखना होगा। कोरोना की जंग फिर से हिमाचल की भौगोलिक समीक्षा में इस तर्क को हकदार बना रही है कि ऊना रेल परियोजना का अंदरूनी हिमाचल की ओर मुड़ना कितना आवश्यक है। यही एकमात्र रेल संभावना है जो कल कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर व मंडी जिलों को आसानी से जोड़ सकती है। इसी तरह ऊना के सड़क  संपर्क से चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी व कुल्लू जिला जुड़कर दो तिहाई हिमाचल का प्रतिनिधित्व कर पाएंगे। प्रदेश में कोरोना की दस्तक में भले ही बाहर से लौटे लोगों की गिनती हो रही है, लेकिन यह मंजर हमारे आसपास ही ठहर रहा है। इस सारे दस्तूर में बेरोजगारी लौट रही है, तो कोरोना काल के बाद हिमाचल की तस्वीर भी बदलेगी। कोई अभी यह कबूल नहीं करेगा कि जो लौट के आया है, एक दिन फिर से लौट जाएगा। बसों के थमे पहिए फिर सफर पर निकलेंगे या तमाम पर्यटक वाहन पुनः मैहतपुर बैरियर पर आकर सुखद संदेश देंगे। कोरोना काल में हिमाचल की तस्वीर देखनी हो, तो अचानक देश के विभिन्न हिस्सों से ऊना पहुंच रही रेलगाडि़यों से उतरते युवाओं में हमें फिर से नए संघर्ष की इत्तला मिलेगी। ऊना तसदीक कर रहा है कि गोवा में हिमाचल को किस तरह रोजगार मिलता है। कर्नाटक के आईटी सेक्टर की क्षमता में कितना हिमाचल समाहित है या मुंबई की आर्थिकी का प्रदेश के बच्चों से क्या रिश्ता है। उनके पास इस बार कोई उपहार नहीं, बस घर तक पहुंचने का इंतजार है। कम से कम क्वारंटीन के बाद फिर से हिमाचल की गोदी में अपनी हकीकत कोे अंगीकार करने का समय तो आएगा।