Monday, April 06, 2020 05:35 PM

ऊपरी हिमालय खंड को कहा जाता है अल्पाइन पर्वतीय खंड

हिमाचल का भौगोलिक परिचय  भाग-11

ऊपरी हिमालय-खंड को अल्पाइन पर्वतीय खंड भी कहा जाता है। इसमें चंबा का पांगी क्षेत्र, लाहौल-स्पीति और किन्नौर शामिल किए जा सकते हैं। यह हिमाचल प्रदेश का  पूर्वी-उत्तरी भाग है जिसमें अधिकतया अनुसूचित जनजातियों के लोग बसते हैं। इसमें जनसंख्या का घनत्व अति कम है और मुख्य आबादी समुद्रतल से 2400 मीटर से 3600 मीटर के बीच बसती है ...

गतांक से आगे

मध्य-हिमालय खंड  : इस खंड में चंबा, चंबा का ऊपरी भटियात क्षेत्र, चुराह व भरमौर, मंडी के ऊहल, चच्योट और करसोग के क्षेत्र सिरमौर का गिरी-पार का क्षेत्र, कुल्लू-मनाली का क्षेत्र, कांगड़ा के बड़ा भंगाल का क्षेत्र और शिमला जिले के सारे क्षेत्र आते हैं। इस खंड में जनसंख्या का घनत्व निम्न हिमालय क्षेत्र की तुलना में कम है और जैसे-जैसे हम पूर्व की ओर ऊपर की ओर बढ़ते जाते हैं, यह घनत्व कम होता जाता है। इस खंड के आबादी वाले क्षेत्र की ऊंचाई समुद्रतल से 1050 और 2400 मीटर के मध्य उठती है। इस क्षेत्र की अधिकतम ऊंचाई 1500 मीटर से 4500 मीटर तक है। इस खंड में लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और बागबानी दोनों हैं। कृषि में मक्की, गंदम, जौं आदि बोए जाते हैं। परंतु ये फसलें कम मात्रा में होती हैं। मुख्य फसल आलू है, जो इस क्षेत्र की नगदी फसल भी है। बागबानी के क्षेत्र में मुख्य बागीचे सेब के हैं- यद्यपि आड़ू, पलम, नाशपाती, बादाम आदि में पर्याप्त मात्रा में लगाए जाते हैं। यह सारा खंड हरे-भरे वनों से भरा है, जिनमें देवदार, कैल, रई, बान, बुरांस के वृक्ष मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त जंगल कई प्रकार की जड़ी-बुटियों से भरपुर हैं। इस खंड के क्षेत्रों में चारागाह भी पर्याप्त हैं। यह अधिकतया पहाड़ी क्षेत्र हैं, जिसमें कई सुंदर और उपजाऊ घाटियां भी हैं, परंतु उनकी लंबाई, चौड़ाई की अपेक्षा कम है। इस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से 100 सेंटीमीटर तक होती है।

ऊपरी हिमालय-खंड: इसे अल्पाइन पर्वतीय खंड भी कहा जाता है, इसमें चंबा का पांगी क्षेत्र, लाहौल-स्पीति और किन्नौर शामिल किए जा सकते हैं। यह हिमाचल प्रदेश का पूर्वी-उत्तरी भाग है, जिसमें अधिकतया अनुसूचित जनजातियों के लोग बसते हैं। इसमें जनसंख्या का घनत्व अति कम है और मुख्य आबादी समुद्रतल से 2400 मीटर से 3600 मीटर के बीच बसती है और वह भी सतलुज, चंद्रभागा, स्पिति, बास्पा आदि नदियों और उसकी सहायक घाटियों में। हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में अनेक दर्रें हैं। इन दर्रों का मौसम, पर्यावरण तथा आर्थिक दृष्टि से अपना एक महत्त्व है।                  - क्रमशः