Thursday, July 16, 2020 08:30 PM

एक महीना और लड़ेंगे कोरोना से जंग

30 मई को सेवानिवृत्त होने वाले डाक्टरों ने कोरोना महामारी के चलते मानव सेवा में लगाया मन

गगरेट-कोरोना वायरस के चलते सेवानिवृत्ति लेकर घर जा आराम की जिंदगी जीने की बजाय एक कुशल योद्धा के तौर पर इस महामारी से दो-दो हाथ करने का निर्णय लिया। प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना काल में 30 जून तक दिए गए सेवा विस्तार॒को स्वीकार कर यह योद्धा लगातार मोर्चे पर डटा हुआ है। इनके साथ एक और योद्धा हैं, जो 30 मई को सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन उन्हें भी ललक है मानव सेवा की, कोरोना वायरस को हराने की, इसलिए वह भी 30 जून तक सेवाएं देंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढेड़ा राजपूतां में मेडिकल अफसर तैनात डा. जगदीश सिंह कोरोना काल में ऐसे कर्मवीर के रूप में उभरे हैं, जो कोरोना वायरस को हराने के लिए जी जान से जुट गए। यह योद्धा सुबह नौ बजे अपने अस्पताल में ओपीडी में सेवाएं देने के लिए जुट जाता है और उसके बाद सिविल अस्पताल गगरेट पहुंच कर कोरोना वायरस से इसकी जंग शुरू हो जाती है। गगरेट क्षेत्र में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने के बाद से ही डा. जगदीश सिंह लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं। कोरोना वायरस संक्रमित मरीज की कांटैक्ट हिस्ट्री तैयार करनी हो या फिर संदिग्ध मरीजों के पास जाकर जानकारियां जुटानी हों, तो सबसे पहले डा. जगदीश ही उन तक पहुंचते हैं। यह अकेले ही इस जंग में शरीक नहीं हैं, बल्कि इनका बड़ा बेटा सूरज सिंह भी डाक्टर है और इन दिनों अमृतसर में कोरोना वॉरियर के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है तो इनका छोटा बेटा तारा कुलतार सिंह भी डाक्टर है और इन दिनों कोरोना वारियर के रूप में तरनतारन में तैनात हैं। कोरोना वायरस के विरुद्ध इस जंग में जो दूसरा नाम है, वह स्वास्थ्य पर्यवेक्षक कुलदीप सिंह हैं। यह भी कोरोना के विरुद्ध छिड़ी इस लड़ाई में मोर्चे पर डटे हुए हैं और ये भी तीस मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन मानव जीवन पर छाए इस संकट के बीच इन्हें भी चैन की जिंदगी बिताना नागवार है। इसलिए ये भी तीस जून तक सेवाएं देंगे।