Sunday, March 24, 2019 04:45 PM

एक साल बाद भी बाहरी वाहनों से टैक्स नहींं

धर्मशाला—नगर निगम धर्मशाला के दूसरे वित्तिय वार्षिक बजट से कारपोरेशन की आय विभिन्न स्त्रोतों से बढ़ाने की सभी योजनाएं धड़ाम हो गई हैं।  प्रदेश के दूसरे नगर निगम धर्मशाला के पेश किए गए अपने तीसरे वार्षिक वित्त बजट 2019-20 की हालत देखी जाए, तो कारपोरेशन ही हालत आगे दौड़ और पीछे छोड़ वाली नजर आ रही है। एमसी धर्मशाला ने अपना तीसरा नया बजट सोमवार को प्रस्तुत किया, लेकिन पिछले वित्तिय वर्ष में निर्धारित खर्च और कार्य अब तक पूरी तरह से पेंडिंग ही चल रहे हैं। नगर निगम ने अपने बजट में अनुमानित  की गई धनराशि का प्रयोग उन कार्यों के लिए किया ही नहीं है। एमसी धर्मशाला बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से एक साल बाद भी सेनिटेशन टैक्स वसूल नहीं कर पाई है, जिससे निगम ने सेनिटेशन से इनकम के नाम पर एक करोड़ रुपए वसूलने का लक्ष्य भी हवा-हवाई ही रह गया है।  इसके अलावा भी पिछले वित्तिय वर्ष की कई अहम योजनाएं अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।  नगर निगम धर्मशाला ने दूसरे वित्तिय वार्षिक बजट में सभी संसाधनों से 95 करोड़ 11 लाख 94 हजार 908 रुपए आय का लक्ष्य निर्धारित किया था। वहीं, 73 करोड़, 48 लाख 50 हज़ार 918 रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन बजट सत्र 2018-19 में प्रस्तावित सबसे अहम योजना ही अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।  प्रस्ताव के तहत बाहरी राज्यों से आने वाले छोटे वाहनों को 60 और बड़े वाहनांे को 120, 150 व 200 रुपए चुकाने का प्लान बनाया गया था। लेकिन पूरा एक साल बितने के बाद भी एमसी की योजना बजट की फाइलों में ही गुम होकर रह गई है। इसके अलावा भी एमसी ने शहर में शराब सेस और इंटरटनमेंट टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन वह अब तक सरकार की हरी झंडी न मिलने के कारण अधर में ही लटका हुआ है। वहीं, नगर निगम धर्मशाला में शामिल किए गए नए क्षेत्रों में तीन वर्षों के बाद भी कोई टैक्स नहीं लग पाया है।  महापौर देवेंद्र जग्गी ने बताया कि  नगर निगम धर्मशाला का वार्षिक बजट  में हुए फैसलों पर सरकार की सहमति नहीं मिल पाई है, जिसके कारण कुछेक कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। लेकिन जल्द ही कार्याें को ज़मीनी स्तर पर शुरू किया जाएगा। अभी तक पंचायतों से एमसी में शामिल क्षेत्रों में प्रॉपटी सर्वे भी नहीं हो पाया है। अब मई माह में प्रॉपटी टैक्स  के लिए अस्समेंट शुरू की जाएगी। इसके अलावा पार्किंग, खस्ताहाल शौचालय को सुधारने और नए टायलट बनाने की योजना भी अधर में लटकी हुई है।