Monday, August 03, 2020 05:52 PM

एचपीयू के छात्रों ने खोजे 16 मेडिसिनल प्लांट

जल्द हिमाचल सरकार को सौंपेंगे रिपोर्ट, केंद्र ने 24 पौधे खोजने के दिए थे निर्देश

शिमला  - हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद को लेकर 16 मेडिसिनल प्लांट मौजूद हैं। इससे आयुर्वेदिक तरीके से लोगों का इलाज संभव है। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों ने राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर इन मेडिसिनल प्लांट की खोज की है। अब इन 16 मेडिसिनल प्लांट पर एचपीयू के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधकर्त्ता रिसर्च करेंगे।  बता दें कि केंद्र के नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड की ओर से हिमाचल को 24 मेडिसिनल प्लांट तलाशने के निर्देश दिए थे। प्रदेश विवि के शोध छात्रों का दावा है कि उन्होंने 16 मेडिसिनल प्लांट को आइडेंटिफाई कर दिया है। एचपीयू के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के छात्रों का मानना है कि भले ही 16 मेडिसिनल प्लांट हिमाचल में उपलब्ध हों, लेकिन वे भी खतरे में हैं। यानी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से अगर मरीजों का इलाज करना है, तो इन दवाई युक्त पौधों का संरक्षण व संवर्धन करना बेहद जरूरी है। छात्रों का मानना है कि वे कई जिलों में गए और जड़ी-बूटियों से संबधित पौधों को आइडेंटिफाई किया। शोधकर्ताओं ने माना कि हिमाचल में कई ऐसे महत्त्वपूर्ण मेडिसिनल प्लांट हैं, जो कैंसर और कई ऐसी बीमारियों को ठीक कर सकते हैं, जिन्हें होम्योपैथी डाक्टर ने भी मना कर दिया हो। बायोटेक्नोलॉजी विभाग के शोध छात्रों के अनुसार, उन्होंने जगह-जगह पर जाकर कई ऐसी जड़ी-बूटियों को खोजा, जिसकी महत्ता आयुर्वेद के क्षेत्र में काफी अहम है। छात्रों ने यह भी साफ किया है कि हिमाचल में अगर इन प्लांट के संवर्धन के लिए कार्य किया जाता है, तो आने वाले समय में हिमाचल में ही आयुर्वेद की कई दवाइयां बन पाएंगी। बता दें कि एचपीयू प्रदेश सरकार को भी मेडिसिनल प्लांट की रिपोर्ट जल्द सौंपेगा। एचपीयू के छात्रों ने पौधों पर रिसर्च जारी रखा है। उन्होंने जड़ी-बूटियों के सैंपल भी भरे हैं। हिमाचल में अगर इन सभी मेडिसिनल प्लांट पर कार्य किया जाता है, तो कम खर्च में हिमाचल के मरीजों का कैंसर और ब्लड व हाई प्रेशर की बीमारी को आसानी से दूर किया जा सकता है।

इकलौते किन्नौर में प्राकृतिक जड़ी-बूटियां सलामत

शोध करने वाले छात्रों ने लाहुल-स्पीति, किन्नौर, सोलन और शिमला के क्षेत्रों में जाकर जड़ी-बूटियों की तलाश की। अभी तक प्रदेश में केवल किन्नौर जिला में ही प्राकृतिक रूप से होने वाली जड़ी-बूटियां सलामत हैं। अहम यह है कि आज के दौर में जिस तरह से होम्योपेथिक दवाइयां का असर होना बंद हो गया है। वहीं दूसरी ओर दवाइयों के सैंपल भी बार-बार फेल हो रहे हैं। इसको लेकर अब आयुर्वेद से इलाज करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। आयुर्वेद मेडिसिनल प्लांट जिस तरह से खत्म होते जा रहे हैं, इससे आने वाले समय में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।