Tuesday, September 17, 2019 04:16 PM

एचपीयू…ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट मांगेंगे वापस

शिमला -हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एक साल पहले छीने हुए ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट को वापस पाने के लिए एचपीयू एक बार फिर से केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार के समक्ष इस मामले को उठाने जा रहा है। इस बार एचपीयू अपने काम के आधार पर इस ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट को वापस से एचपीयू को देने की मांग उठाएगा। इसके लिए पूरा प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है, जिसे सितंबर महीने के अंत में या अक्तूबर महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इस प्रस्ताव में एचपीयू एक साल में ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट को दिए गए प्रोजेक्ट्स पर कितना काम किया गया और किस तरह का काम किया गया है, इस बारे में सरकार को बताएगी। केंद्र ने एचपीयू से इस शोध संस्थान को लेकर प्रदेश सरकार को दे दिया था और वर्तमान में प्रदेश का जनजातीय केंद्र इस संस्थान को चला रहा है। हालांकि इस शोध संस्थान को एचपीयू से वापस लिए जाने और सरकार को दिए जाने के बाद कितना कार्य किया गया, इसकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। गौर हो कि अगर एचपीयू को यह रिसर्च सेंटर मिल जाता है, तो इससे रिसर्च का लेवल एचपीयू बढ़ाएगा, वहीं छात्रों को राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में शोध के लिए भेजा जाएगा। अहम यह है कि एचपीयू प्रशासन ने इस बार भी शोध के कार्यों में विकास करने के लिए बजट का ज्यादा प्रावधान भी किया है। वहीं, शोध करने वाले छात्रों को पढ़ाने व उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए बाहर से शोध विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। इस रिपोर्ट को आधार बनाकर एचपीयू प्रशासन एक बार फिर से केंद्र के जनजातीय मंत्रालय को अनुरोध करने जा रहा है कि एचपीयू को यह ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट दोबारा से दिया जाए, जिससे कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों और वहां के लोगों के जीवन पर और बेहतर शोध कार्य किया जा सके। इससे पहले भी इस मांग को एचपीयू केंद्र और प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठा चुका है, लेकिन इसका एचपीयू को कोई लाभ नहीं मिल पाया है। गौर हो कि भले ही अब संस्थान एचपीयू के पास न रहा हो, लेकिन ट्राइबल स्टडी विभाग के तहत भी एचपीयू ने इन प्रोजेक्टस पर काम कर पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली है। एचपीयू ट्राइबल स्टडीज के निदेशक प्रोफेसर चंद्र मोहन परशिरा का कहना है कि इसी कार्य की रिपोर्ट देने के साथ ही एचपीयू प्रदेश के जनजातीय केंद्र के एक वर्ष में किए गए कार्य का आकलन करने का अनुरोध भी केंद्र से करेगी। बता दें कि एचपीयू को अगर यह संस्थान वापस मिलता है, तो ट्राइबल स्टडीज में डिप्लोमा कर रहे छात्रों को ट्राइबल पर शोध के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट मिल पाएंगे। वहीं एचपीयू के पास शोध कार्य करने के लिए एक्सपर्ट हैं, जिनकी सरकार के पास उपलब्धता नहीं है, ऐसे में एचपीयू के शोध कार्य में गुणवत्ता आएगी। फिलहाल प्रदेश विश्वविद्यालय ने केंद्र से इस रिसर्च सेंटर को वापस लेने के लिए पूरा प्लान तैयार कर दिया है। अब एचपीयू की मांग पर यह मिलता है, या नहीं यह देखना अहम होगा। दरअसल केंद्र सरकार ने इसे एचपीयू से तभी छीना था, क्योंकि उस समय इस सेंटर में रिसर्च का लेवल ठीक नहीं था। केंद्र सरकार ने जनजातीय रिसर्च सेंटर में शोध के कार्यों में विकास करने के बारे में भी निर्देश जारी किए थे, लेकिन बजट की कमी की वजह से एचपीयू प्रशासन शोध को बेहतर नहीं बना पाया था। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इसे एचपीयू से वापस लेकर सरकार को दे दिया था।

विश्वविद्यालय में बाहर से आएंगे विशेषज्ञ

प्रदेश विश्वविद्यालय में शोध कार्यों के विकास के लिए अब बाहर से विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा। ये विशेषज्ञ एचपीयू में आएंगे और शोध को बेहतर करने के लिए क्या कार्य करने चाहिएं, इस बारे में बताएंगे। जानकारी के अनुसार एचपीयू अपने शोध वर्क को सरकार को भी रिकॉर्ड के जरिए सौंपेगा।