Wednesday, May 27, 2020 12:07 AM

एचपीयू में 80 पर चर्चा

किताबी ज्ञान तो हर रोज़ कक्षाओं में...तो प्रैक्टिकल नॉलेज लैबोरेट्री में मिल जाएगी, लेकिन हर अपडेट से वाकिफ होने के लिए जरूरी है तो ‘चर्चा’, जो सेमिनार, संगोष्ठी किसी भी रूप में हो सकती है। जो सिर्फ पाठ्यक्रम से ही संबंधित न होकर ज्वलंत मुद्दों व शोध के महत्त्वपूर्ण विषयों पर भी केंद्रित हो। और विश्वविद्यालय स्तर पर तो यह होना बेहद लाजिमी है। प्रदेश-देश और विदेश के हजारों बच्चों का कल संवार रहे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 27 विभागों में पांच साल में क्या कुछ हुआ... दखल की इस कड़ी में बता रही हैं, हमारी संवाददाता... मोनिका बंसल।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हर साल 25 से ज्यादा विषयों पर छात्रों के साथ इंटरएक्शन प्रोग्राम व सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। पांच साल में भी एचपीयू में कई सेमिनार, संगोष्ठियां आयोजित हुई। खास बात यह रही कि अलग-अलग विषयों पर आयोजित इन चर्चाओं से संबधित विषयों में देश-विदेश के स्कॉलर व बड़े-बड़े विशेषज्ञों ने यहां आकर अपने अनुभव छात्रों के साथ सांझा किए। 22 जुलाई, 1970 से शुरू हुए इस विश्वविद्यालय में करीब 27 विभाग हैं। इन विभागों में छात्रों के लिए समय-समय पर सेमिनार का आयोजन किया जाता है, जिससे कि छात्रों को अपने विषय के बारे में विस्तार से और अधिक जानकारी हो सके। एचपीयू में पांच साल में 80 से ज्यादा विषयों पर चर्चा हो चुकी है। हालांकि कई ऐसे भी विभाग हैं, जहां नाममात्र के ही सेमिनार हो पाए हैं। इसकी एक वजह यह भी देखी जा रही है कि छात्रों को सेमिनार व संगोष्ठी के बारे में जागरूकता कम रही है। आकंड़ों पर गौर करें, तो एचपीयू में साल में 22 से 23 विभिन्न विषयों में संगोष्ठियां व सेमिनार आयोजित की जाती हैं। सेमिनार के माध्यम से छात्रों के साथ चर्चा करने के लिए इन कार्यक्रमों की यह संख्या बहुत ही कम है। विशेषज्ञ भी यह मानते हैं कि हर महीने एक संगोष्ठी एक विभाग में होनी चाहिए। बावजूद इसके गिने-चुने विभागों में ही छात्रों को विभिन्न विषयों में विशेषज्ञों को सुनने व उन्हें समझने का मौका मिला।

बजट की कमी

अहम यह है कि बजट की कमी आड़े आने की वजह से ही विश्वविद्यालय में पांच वर्षों से इतनी कम संगोष्ठियां व सेमिनार आयोजित हुए। यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि पांच साल में विश्वविद्यालय में जो भी संगोष्ठियां हुईं, उनके विषय बड़े अहम रहे। इससे पीजी व पीएचडी कर रहे छात्रों को काफी कुछ नया सीखने को मिला। पांच साल में प्रदेश विश्वविद्यालय में लगभग 80 से ज्यादा विषयों पर बातचीत हुई है।

विश्वविद्यालय में अब तक हुए कुछ सेमिनार

  1. 27 सितंबर, 2016 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के व्यवसायिक अध्ययन संस्थान के एमटीए व बीटीए के छात्रों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
  2. 2 अक्तूबर, 2016 को विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केंद्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
  3. 6 अक्तूबर, 2016 को आजीवन अध्ययन विभाग द्वारा अनुसंधान क्रियाविधि विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।
  4. 7 अक्तूबर, 2016 को प्रख्यात कवि, लेखक और चिंतक आरए लखनपाल के काव्य संग्रह ड्रिफ्ट वुड का विमोचन किया।
  5. 14 अक्तूबर, 2016 को दृश्य एवं श्रव्य कला संकाय और प्रतिभा सपंदन सोसायटी के संयुक्त तत्त्वावधान में तीसरी परमहंस योगानंद अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
  6. 24 अक्तूबर, 2016 को काशी विद्यापीठ वाराणसी में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड अर्थशास्त्र परिषद के वार्षिक अधिवेशन में कुलपति ने समापन भाषण दिया।
  7. 16 नवंबर, 2016 को पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसका विषय विपरीत परिस्थितियों में रिपोर्टिंग मीडिया की चुनौती था।
  8. 17 नवंबर, 2016 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र में व्याख्यान माला के दौरान कुलपति ने व्याख्यान दिया।
  9. 28 नवंबर, 2016 को विश्वविद्यालय दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा आयोजित जन्मशति समारोह के विशेष व्याख्यान भारतीय चिंतन परंपराओं के विस्तार में दीनदयाल उपाध्याय का योगदान विषय पर कुलपति ने व्याख्यान दिया।
  10. 26 नवंबर, 2016 को विश्वविद्यालय में योग विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान योग एवं अध्यात्मिकता विषय पर कुलपति ने व्याख्यान दिया।
  11. 9 दिसंबर, 2016 को राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में एक संगोष्ठी में मुख्यातिथि के रूप में कुलपति ने भाग लिया।
  12. 10 दिसंबर, 2016 को विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यशाला मानव अधिकारों के रूझान और चुनौतियों की गतिशीलता विषय पर कुलपति ने व्याख्यान दिया।
  13. 17 दिसंबर, 2016 को राजभवन में कैशलेस प्रणाली से संबंधित कार्यशाला में भाग लिया।
  14. 19 दिसंबर, 2016 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं

मुक्त अध्ययन केंद्र इक्डोल में ओडीएल तथा एसएलएम विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम विषय पर कुलपति ने व्याख्यान दिया।

  1. 13 जनवरी, 2017 को नई दिल्ली के आईपीएफ सम्मेलन कक्ष में इंडियन पॉलिसी फाउंडेशन द्वारा रोल ऑफ थिंक टेकन्स इन इंडिया विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में कुलपति ने भाग लिया।
  2. 8 मार्च, 2017 को महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में कुलपति ने बतौर मुख्यातिथि उद्बोधन दिया।
  3. 15 व 16 मार्च 2017 को दीन दयाल उपाध्याय पीठ एवं राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वावधान में एकात्म मानववाद और नीति निर्माण विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देश भर के जाने माने शिक्षाविद ने भाग लिया।
  4. 17 मार्च, 2017 को एचपीयू के भौतिकी विभाग में दो दिवसीय भौतिकी विज्ञान की सीमा पर एक कार्यशाला में मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया।
  5. 21 मार्च, 2017 को राजभवन में जल संरक्षण अभियान विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई।
  6. 24 मार्च, 2017 को एचपीयू के गणित विभाग ने एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसी दिन जैव प्रोद्योगिकी विभाग ने जैव प्रोद्योगिकी दिवस समारोह का आयोजन किया।
  7. 28 से 30 मार्च, 2017 को संगीत एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में त्रिदिवसीय संगीत संगम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सात्विक वीणा के अविष्कारक सलिल भट्ट तथा पदमश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम नृत्य की विश्व विख्यात नृत्यांगना ने अपनी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया।
  8. 29 मार्च, 2017 को विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
  9. 21 अप्रैल, 2017 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्त्वावधान में भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

27 विभाग... कुछ ही एक्टिव

एचपीयू के 27 विभागों में नाममात्र में ही चर्चा की गई हैं। हालांकि एचपीयू के साइंस विभाग में छात्रों के लिए ऐसे प्रोग्राम करवाए जाते हैं। मात्र एक विभाग में चर्चाएं न होने से छात्रों को कई महत्त्वपूर्ण विषयों की जानकारी नहीं मिल पाती। एलएलबी कानून की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को हर विषय फिर वह कानून से जुड़ा हो या अर्थव्यवस्था से, ऐसे विषयों में नए बदलाव होते रहते हैं, लेकिन जब चर्चाएं ही कम हों, तो छात्रों तक पहुंचने वाली महत्त्वपूर्ण जानकारी नहीं मिल पाती। एचपीयू को चाहिए कि वह प्रत्येक विभाग में ऐसा अनिवार्य किया जाए। साथ ही छात्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बाहरी राज्यों से पढ़ रहे कई छात्र

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हजारों की संख्या में छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अधिकतर छात्र बाहरी राज्यों व दूरदराज से आकर विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाने वाले अधिकतर विषय ऐसे रहते हैं, जिनमें चर्चा की आवश्यकता अधिक रहती है। खासतौर पर जो छात्र रिसर्च या एमफिल, पीएचडी कर रहे हैं, उन छात्रों के लिए प्रत्येक विषय पर समय-समय पर चर्चा होती रहनी चाहिए, लेकिन एचपीयू में कुछेक विभागों में छात्रों के लिए ऐसे आयोजन होते हैं। समय-समय पर हर विभाग में बातचीत होने से छात्रों, खासतौर पर जो रिसर्च कर रहे हैं, उन्हें रिसर्च वर्क में भी काफी सहायता मिलती है।

हर डिपार्टमेंट में सेमिनार अनिवार्य नहीं

एचपीयू में कुछ विभागों में होने वाले सेमिनार में छात्रों की कम सहभागिता देखने को मिलती है। इसका एक बड़ा क ारण यह है कि छात्रों को सेमिनार के महत्त्व की कोई जानकारी नहीं है और न ही वह इसके लिए जागरूक हैं। साथ ही एचपीयू में भी प्रत्येक विभाग में सेमिनार अनिवार्य नहीं है। इसके लिए एचपीयू को प्रत्येक विभाग साइंस से लेकर आर्ट्स तक प्रत्येक विषय में ज्वलंत मुद्दों पर यदि मंथन हो, तो छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित कर पाएंगे। इसके लिए आने वाले समय में एचपीयू यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रों को सेमिनार व संगोष्ठियों के आयोजनों में और विकास करेगा।

हर अपडेट पर सेमिनार जरूरी

एचपीयू से एमफिल जूलॉजी कर रहे विकास राणा का कहना है कि जूलॉजी विषय में सेमिनार आदि होना जरूरी होता है। यदि इस विषय में चर्चाएं हों, तो छात्रों को प्रैक्टिकल करने में भी काफी सहायता होती है। एचपीयू में जिस हिसाब से सेमिनार होने चाहिए, उसके मुताबिक कम होते हैं। ऐसे में छात्र संगठन आगे आते हैं और छात्रों के लिए महत्त्वपूर्ण विषयों पर संगोष्ठी करवाते हैं। हाल ही में आर्टिकल-370, हर कोई इसके बारे में विस्तार से जानना चाह रहा था। ऐसे में एचपीयू को खासतौर पर एलएलबी, एलएलएम के छात्रों के लिए इस तरह की न्यू अपडेट्स और महत्त्वपूर्ण विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए थे, लेकिन इस तरफ एचपीयू कम ध्यान दे रही है। ऐसे में छात्रों तक कई महत्त्वपूर्ण विषयों से संबंधित जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती। हालांकि एचपीयू सेमिनार करवाता है, लेकिन बहुत कम छात्र उस का लाभ उठा पाते हैं।

आर्ट्स-एमसीए में तो कभी हुआ ही नहीं कुछ ऐसा

एचपीयू के अधिकतर ऐसे विभाग भी हैं, जहां आज तक कोई ऐसा प्रोग्राम करवाया ही नहीं गया है। एचपीयू के आर्ट्स व एमसीए जैसे विभागों में चर्चाओं का आयोजन एचपीयू नहीं करवा पा रही है, जिससे  इन विषयों के छात्रों को चर्चाओं से मिनले वाली जानकारी भी नहीं मिल पाती। साथ ही छात्रों को कुछ अलग करने व सोचने की क्षमता का भी विकास नहीं हो पाता है। चर्चाएं छात्रों का मानसिक विकास व किसी महत्त्वपूर्ण विषय की जड़ तक पहुंचने में सहायक होती हैं। यही कारण है कि आज जो छात्र बड़ी-बड़ी रिसर्च कर रहे हैं, उन्हें उनके रिसर्च विषय की पूरी जानकारी होती है।

जहां जरूरी होगा, जरूर करेंगे

एचपीयू में पांच साल के मुताबिक जितनी भी चर्चाएं हुई हैं, उन्हें देखते हुए आने वाले समय में भी हर विभाग में ऐसे आयोजनों में बढ़ावा किया जाएगा। एचपीयू में अलग-अलग विषयों पर चर्चाओं को बढ़ावा देने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को लाभ पहुंचे। साथ ही छात्रों की अधिक से अधिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

चर्चाएं तो होती हैं, पर कुछ ही विषयों पर

एचपीयू में पीएचडी कर रहे अधिकतर छात्रों ने बताया कि एचपीयू चर्चाएं तो करवाती है, लेकिन कुछ ही विषयों पर, जबकि एचपीयू में कुछेक विषय ऐसे भी हैं, जिन पर समय-समय पर बात होती रहनी चाहिए। एचपीयू में आर्ट्स विभाग में बहुत कम सेमिनार होते हैं, जिससे छात्रों को काफी महत्त्वपूर्ण विषयों व न्यू अपडेट्स की कम और समय पर जानकारी नहीं मिल पाती है। एचपीयू में पीएचडी कर रहे छात्रों के लिए सेमिनार अनिवार्य न होने से काफी विषयों की महत्त्वपूर्ण जानकारी से छात्र वंचित रह जाते हैं।

कई बार छात्र संगठन करते हैं आयोजन

कई बार तो एचपीयू के छात्र संगठन छात्रों के लिए विशेष संगोष्ठियों व सेमिनार का आयोजन करते हैं। अभी हाल ही में एचपीयू की एबीवीपी इकाई द्वारा आर्टकिल-370, जो कि बहुत चर्चा का विषय रहा है। इसे देखते हुए एबीवीपी ने एचपीयू में छात्रों को जागरूक व अधिक जानकारी देने के लिए आर्टिकल-370 पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया, जिससे हजारों छात्रों को काफी लाभ मिला। इसके साथ ही छात्रों ने भी अपनी सहभागिता बढ़चढ़ कर दी।

रिसर्च प्रोग्राम पर पड़ता है सीधा असर...

कुछ विभागों में सेमिनार न होने का सीधा असर छात्रों के रिसर्च प्रोग्राम पर पड़ता है। ऐसे में पीएचडी के गिने-चुने छात्रों को ही एचपीयू में होने वाली चर्चाओं का लाभ मिल पाया है। चर्चाओं से पीएचडी कर रहे विषय की अधिक जानकारी भी मिलती है व रिसर्च वर्क में भी चर्चाएं काफी सहायक रहती हैं। साथ ही शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रत्येक विषयों पर चर्चाएं होनी जरूरी रहता है, जबकि एचपीयू में इस और कुछ कम ही ध्यान दिया जा रहा है।

जागरूक ही नहीं छात्र

टूरिज्म में पीएचडी कर रह रोहित का मानना है कि यदि एचपीयू में सेमिनार हों, तो इससे छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव होता है। प्रशासन चर्चाओं का आयोजन कई विषयों पर करवाता रहता है। बावजूद इसके छात्रों तक पहुंचने वाली कई महत्त्वपूर्ण जानकारी, जो सेमिनार व संगोष्ठी के माध्यम से ही छात्रों तक पहुंच पाती है, वह नहीं मिल पाती। इसका एक कारण यह भी है कि अधिकतर छात्र सेमिनार में अपनी सहभागिता सुनिश्चित नहीं करते। न ही स्टूडेंट सेमिनार के प्रति जागरूक होते है। इसके लिए जरूरी है कि एचपीयू प्रत्येक विषय पर सेमिनार अनिवार्य करे। पॉलिटिकल साइंस, आर्ट्स, साइंस, टूरिज्म, इकोनॉमिक्स जैसे विषयों पर समय-समय पर सेमिनार न हों, तो छात्रों को जानकारी नहीं मिल पाती। साथ ही पीएचडी कर रहे छात्रों के लिए चर्चाओं का होना बहुत जरूरी रहता है।