Tuesday, March 31, 2020 01:52 PM

एजुकेशन ट्रैक पर ऐतिहासिक शहर नूरपुर

ऐतिहासिक शहरों में शुमार नूरपुर आज शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमा रहा है। कांगड़ा जिला का यह शहर क्वालिटी एजुकेशन देने में माहिर है। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहा यह शहर आज एजुकेशन हब बनकर उभरा है। यहां के स्कूलों ने ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे नूरपुर में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रहे हैं हमारे संवाददाता — बलजीत चंबियाल

नूरपुर शहर प्रदेश के ऐतिहासिक शहरों में से एक है और यह शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है, जिससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों व लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस शहर में निजी व सरकारी स्कूल दोनों हैं, जिनकी संख्या लगभग आठ है। शहर के आसपास भी काफी स्कूल हैं, जिसमें ब्लॉक नूरपुर के तहत लगभग 19 गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आठ गवर्नमेंट हाई स्कूल, दस गवर्नमेंट मिडल स्कूल और 88 गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल हैं। यहां निजी स्कूलों की भी काफी संख्या है, जिससे बच्चों को घरद्वार शिक्षा ग्रहण करने की सुविधा मिल रही है। नूरपुर शहर में चार निजी स्कूल हैं, जिसमें नूरपुर पब्लिक स्कूल, आदर्श भारतीय पब्लिक स्कूल, फ्यूचर फाउंडेशन स्कूल आदि शामिल हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में बीटीसी राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नूरपुर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक ब्वायज स्कूल नूरपुर व दो प्राइमरी स्कूल शामिल हैं। निजी स्कूलों के खुलने का एकमात्र उद्देश्य बच्चों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे हैं। यही कारण है कि निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या प्रति वर्ष बढ़ती जा रही है और लोगों का भरोसा भी इन स्कूलों पर बढ़ता जा रहा है।

अच्छी है स्कूलों की स्थिति

शहर में लगभग आठ स्कूल हैं और गांवों में इनकी संख्या काफी है, जिसमें अकेले सरकारी स्कूलों की संख्या सौ से ज्यादा है, जबकि इस संख्या में निजी स्कूलों को जोड़ा जाए, तो संख्या दोगुनी हो सकती है। शहरों के स्कूलों की स्थिति ओवरआल बेहतर है। यहां विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में भी स्कूलों की स्थिति अच्छी है।

...शैक्षणिक माहौल ने  बनाया शिक्षा का हब

नूरपुर क्षेत्र शिक्षा का केंद्र बनकर ऐसे ही नहीं उभरा है, इसकी वजह इस क्षेत्र का शैक्षणिक माहौल का बेहतर होना है। नूरपुर क्षेत्र में भारी संख्या में स्कूल हैं और यहां के स्कूलों का एकमात्र लक्ष्य है कि विद्यार्थी बेहतर पढ़ाई कर होनहार बनें। सरकारी के अलावा निजी स्कूलों का इस बात पर ध्यान रहता है कि बच्चे ऊंचे मुकाम पर पहुंच अपना व अपने स्कूल का नाम रोशन करें। नूरपुर क्षेत्र के तहत पड़ते कई स्कूल छात्रों व अभिभावकों की पहली पसंद बने हुए हैं। यहां काफी संख्या में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

शिक्षकों की कमी नहीं है

नूरपुर शहर में नूरपुर पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1040 है, जिसमें 44 अध्यापक हैं। यहां ट्रांसपोर्ट की भी बेहतर व्यवस्था है। अगर निजी व सरकारी स्कूलों की स्थिति की तुलना करनी हो, तो यह थोड़ा मुश्किल भरा कार्य है, क्योंकि दोनों क्षेत्रों के स्कूल छात्रों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने को प्रयासरत है। शहरी स्कूलों में अध्यापकों की संख्या काफी बेहतर है और यहां स्वीकृत पदों के हिसाब से अध्यापकों की संख्या लगभग पूरी है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में कमी नहीं आ रही। सरकारी स्कूलों में यह स्थिति सुखद है।

शिक्षाविद क्या कहते हैं

निजी स्कूलों में भी कोई कमी नहीं

नूरपुर शिक्षा का केंद्र बनकर उभरा है, क्योंकि शहर में शिक्षा का विजन व सोच अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा है। शिक्षा का केंद्र होने की वजह से अभिभावक यहां अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने, उन्हें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्य देने के लिए स्कूल प्रयासरत हैं। निजी स्कूल आज शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाइयां छू रहे हैं

अरविंद कुमार डोगरा, स्कूल निदेशक

बेहतरीन काम कर रहा शिक्षा विभाग

विद्यार्थियों ही नहीं, बल्कि समाज के समुचित विकास में भी शिक्षा का विशेष महत्त्व है, क्योंकि शिक्षा ही विद्यार्थियों में नई सोच व नए आयाम स्थापित कर सकती है। इसी तरह शिक्षित समाज ही देश को तरक्की व नई राह दिखा सकता है। शिक्षा विभाग शिक्षण संस्थानों में सबके लिए शिक्षा अभियान के तहत सरकारी व पब्लिक स्कूलों व कालेजों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने को प्रयासरत है

चंद्ररेखा शर्मा, प्रिंसीपल

जल्द सुधारनी होगी शिक्षा व्यवस्था

शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने लंबी उड़ानें तो भरी हैं, लेकिन वास्तव में कई बार शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठते देखे जा सकते हैं। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में आने वाली गिरावट के पीछे कई कारण हैं और समय रहते यदि इस पर ध्यान न दिया गया, तो वह दिन दूर नहीं, जब हम शिक्षा के शिखर से ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो जाएंगे। इसके लिए अभिभावकों-छात्रों और शिक्षकों को एक साथ काम करना होगा

नरेश कुमार, जिला अध्यक्ष, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ

गुणवत्ता में गिरावट की वजह यह भी

धड़ल्ले से खुलते स्कूलों ने भी शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट लाई है। जितनी संख्या में स्कूल खुलते हैं, उतनी अध्यापकों की भर्तियां नहीं हो पाती, जिसका परिणाम यह हुआ कि स्कूलों में अध्यापकों  की कमी हो गई। प्राथमिक पाठशालाओं में विद्यार्थी कम होने से एक अध्यापक के सहारे पांच कक्षाओं को छोड़ दिया। माध्यमिक स्कूलों में अब छात्र संख्या के आधार पर अध्यापकों की तैनाती की जा रही है। भाषा अध्यापक, संस्कृत और कला अध्यापक के पद माध्यमिक स्कूलों से खत्म किए जा रहे हैं, जबकि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक स्तर से पढ़ाने की कवायद हो रही है

देवराज डढवाल, प्रवक्ता क्या कहते हैं अभिभावक

क्या कहते हैं अभिभावक

बच्चों को मिल रही क्वालिटी एजुकेशन

नूरपुर शहर के स्कूल बच्चों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जो कि आज के समय की मुख्य मांग है। स्कूल सिद्धांतपूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए बच्चों में अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्य विकसित कर रहे हैं। तरह-तरह की गतिविधियां बच्चों के हर तरह के विकास में मदद कर रहे हैं

गौरव महाजन, अभिभावक

पढ़ाई के लिए बेस्ट हैं नूरपुर के इंस्टीच्यूट

नूरपुर के स्कूल पढ़ाई के लिए बेस्ट हैं। विद्यालयों की बिल्डिंग पूरी तरह सुरक्षित है और यहां पढ़ाई के साथ-साथ शैक्षिणिक गतिविधियां भी करवाई जाती हैं। स्पोर्ट्स, भाषण प्रतियोगिता, वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए बच्चे हमेशा आगे रहते हैं। यही नहीं, स्कूलों में अन्य शैक्षणिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं

गीता शर्मा, अभिभावक

सरकारी विद्यालयों में बेहतर हैं हालात

सरकारी स्कूलों में शिक्षा आज भी निजी स्कूलों की अपेक्षा बहुत बेहतर है। इन शिक्षण संस्थानों में कार्यरत स्टाफ काफी पढ़ा-लिखा और अनुभवी होता है। निजी स्कूलों में अभिभावक जितना ध्यान अपने बच्चों की हर गतिविधि पर रखते हैं, उतना सहयोग सरकारी स्कूलों में नहीं देते। अगर इसी तरह का सहयोग वे सरकारी स्कूलों में भी दें, तो इन स्कूलों से भी और बेहतर परिणाम आ सकते हैं

सुनील पिंटू, एसएमसी प्रधान

अच्छा है यहां के गवर्नमेंट स्कूल का स्तर

नूरपुर क्षेत्र में सरकारी स्कूलों का स्तर बहुत अच्छा है। यहां बच्चों के पूर्ण व्यक्तित्व के विकास की ओर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। इन स्कूलों के सभी विषयों के अध्यापक बड़े अनुभवी व गुणी होते हैं। लोगों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं और उन पर पूरा ध्यान दें

मधु बाला, अभिभावक

प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार कर रहे कोचिंग सेंटर

नूरपुर क्षेत्र में विभिन्न जगह छात्रों को बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के तरीके बताने, कोचिंग देने व उन्हें अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के गुर सिखाने के लिए कई कोचिंग सेंटर खुले हैं। यहां बच्चों को ट्यूशन के अलावा बेहतर गुणवत्ता की शिक्षा देने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।

बच्चों को आगे बढ़ाना चाहते हैं अध्यापक...

नूरपुर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है और यहां चल रहे विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों के अध्यापक वर्ग अपने स्कूल के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बेहतर कार्य करने व सफलताओं के शिखर पर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत से पढ़ाई करवाते हैं और जो विद्यार्थी उनके कहे अनुसार अनुसरण करते हैं, वे हमेशा जीवन में ऊंचे मुकामों पर पहुंचते हैं। स्कूल चाहे सरकारी हो या निजी, अध्यापकों का बस एक ही लक्ष्य होता है कि उनके द्वारा पढ़ाए जा रहे विद्यार्थी हमेशा आगे बढ़ें और इनके लिए वह जी-जान से पढ़ाई करवाते हैं।

शिक्षा पर चर्चा के लिए होनी चाहिए मीटिंग

इतिहास के प्रवक्ता कुलवीर सिंह का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विद्यर्थियों, उनके अभिभावकों व अध्यापकों की एक महीने में एक बैठक होनी चाहिए, जिसमें शिक्षा पर चर्चा होनी चाहिए। इन तीन कडि़यों में बेहतर तालमेल से शिक्षा में काफी सुधार लाया जा सकता है।  किसी भी एक कड़ी के कमजोर होने से शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में छात्रों से भी बेहतर शिक्षा के सुझाव लिए जाने चाहिए। उन्हें प्रार्थना सभा या कक्षा में सप्ताह में एक दिन किसी भी विषय पर चर्चा करनी चाहिए। शिक्षा में सुधार के लिए विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों व सरकार को आगे आना चाहिए। स्कूल शुरू होने व छुट्टी के समय छात्रों को समय पर पहुंचाने व वापस घर पहुंचाने की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यार्थियों को बाहरी शरारती तत्त्वों से दूर रखने के लिए यह एक उचित प्रयास सिद्ध हो सकता है। आमतौर पर स्कूलों में छुट्टी होने पर कुछ विद्यार्थी बाहरी शरारती तत्त्वों के चंगुल में आकर बुरी आदतों में पड़ जाते हैं और उनका नैतिक स्तर कमजोर होता जाता है। स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाना चाहिए, जिससे छात्रों के व्यवहार व शिष्टाचार में सुधार आ सकता है। विद्यालयों में आधारभूत कमियां दूर की जानी चाहिए। स्मार्ट कक्षाओं को और बेहतर बनाया जाना चाहिए। पाठ्यक्रम उच्च स्तर का होना चाहिए और अध्यापकों को शिक्षा इस तरह देनी चाहिए, जिसमें बच्चों में पढ़ने की प्रेरणा में वृद्धि हो। अध्यापकों का विद्यार्थियों को पढ़ाते समय व्यवहार दोस्ताना होना चाहिए। बच्चों को नकल से दूर रखना चाहिए और यह बच्चों का मानसिक विकास रोकती है।

नूरपुर किले में है यह स्कूल

नूरपुर शहर में एक ऐतिहासिक स्कूल है, जो किले में स्थित है और इस स्कूल की मुख्य इमारत, प्रिंसीपल आफिस सहित स्कूल कार्यालय, लाइब्रेरी व छात्रों के लिए कुछ कमरे बने थे, ये कई सालों से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और पुरातत्त्व विभाग के तहत होने की वजह से इसकी आज तक रिपेयर नहीं हो सकी। दसवीं शताब्दी में बने ऐतिहासिक किले में बना स्कूल 1869 में एमबी प्राथमिक विद्यालय बना, 1892 में एमबी मिडल स्कूल व 1926 में डीबी मिडल स्कूल और 1928 में बीडी हाई स्कूल के रूप में पदोन्नत हुआ। 1964 राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल व 1986 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बना। वर्तमान में इस स्कूल में प्रधानाचार्य के अलावा 13 प्रवक्ता, एक डीपीई, पांच टीजीटी, चार सी एंड वी, चार वोकेशनल टीचर, दो कम्प्यूटर टीचर व एक पंजाबी शिक्षक, एक सहायक लाइब्रेरियन, एक प्रयोगशाला सहायक है। स्कूल में लगभग 12 कमरे और करीब 300 बच्चे हैं। यहां कई साल से एक इमारत क्षतिग्रस्त है, जो कि अभी तक नहीं बनी, जिससे विद्यर्थियों व स्टाफ को पढ़ाई में असुविधा होती है। स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि स्कूल की स्थिति बारे विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया  गया है।