एथलेटिक्स में हमीरपुर जिला

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

हमीरपुर एथलेटिक्स संघ एकमात्र ऐसा खेल संघ है, जिसमें केवल पूर्ण एथलीट ही पदाधिकारी व सदस्य हैं।  इस संघ के लाइफ अध्यक्ष प्रो. डीसी शर्मा हैं, जो स्वयं शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक रहे हैं तथा बाद में कालेज प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वर्षों उनकी देखरेख में यह संघ आगे बढ़ा है...

मई, 11 व 12 को राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के परिषद में बने लाल सिंथैटिक ट्रैक पर जिला हमीरपुर से लगभग 1300 धावक व धाविकाओं  ने विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लेकर कीर्तिमान स्थापित किया। पिछले वर्ष भी आयोजित हुई जिला एथलेटिक्स प्रतियोगिता में एक हजार के आसपास  प्रतियोगियों ने शिरकत की थी। इस प्रतियोगिता में अंडर-10 वर्ष व 12 वर्ष आयु वर्ग के बालक व बालिकाओं के लिए 30 मीटर व 40 मीटर की दौड़ के साथ-साथ खड़े होकर लंबी कूद की प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। इससे जहां बच्चों में एथलेटिक्स के प्रति रुझान बढ़ता है, वहीं पर स्पीड जैसे महत्त्वपूर्ण मोटर क्वालिटी को विकसित करने में सहायता भी सही उम्र से मिलना शुरू हो जाती है।

हमीरपुर एथलेटिक्स संघ एकमात्र ऐसा खेल संघ है, जिसमें केवल पूर्ण एथलीट ही पदाधिकारी व सदस्य हैं।  इस संघ के लाइफ अध्यक्ष प्रो. डीसी शर्मा हैं, जो स्वयं शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक रहे हैं तथा बाद में कालेज प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वर्षों उनकी देखरेख में यह संघ आगे बढ़ा है। इस समय पंकज भारतीय  संघ के मुखिया हैं तथा संदीप डढवाल सचिव के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पहली बार पंकज भारतीय की टीम ने इस प्रतियोगिता को दो दिनों का किया, क्योंकि एक दिन में इतने प्रतिभागियों से समयानुसार प्रतियोगिता खत्म नहीं करवाई जा सकती थी। लगभग पचास पूर्ण धावकों व अन्य तकनीकी अधिकारियों ने सफलतापूर्वक इस प्रतियोगिता को पूरा करवाया। वैसे तो इस प्रतियोगिता में कई भविष्य के धावक-धाविकाएं अपनी-अपनी स्पर्धाओं में अपना श्रेष्ठ देते नजर आए, मगर अंडर-16 आयु वर्ग में सौ व दो सौ मीटर की दौड़ में दिव्य का प्रदर्शन पिछले वर्ष के मुकाबले काफी सुधरा नजर आया। यह सीजन की पहली प्रतियोगिता है। इस वर्ष आगे वाली प्रतियोगिताओं में उसके प्रदर्शन में और अधिक सुधार देखा जाएगा। अंडर-16 बालक वर्ग में कोस्तव डीकोस्टा से भी भविष्य में काफी उम्मीद की जा सकती है। सौ मीटर में 11ः02 सेकंड में दौड़ कर इस धावक ने इस वर्ष की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक के नजदीक प्रदर्शन की उम्मीद जगा दी है। इस समय हमीरपुर के सिंथैटिक ट्रैक पर कई शारीरिक शिक्षक, पूर्ण एथलीट व प्रशिक्षक सैकड़ों धावक-धाविकाओं  को ट्रेनिंग दे रहे हैं। प्रो. पवन वर्मा जो स्थानीय महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा का प्राध्यापक हैं, अपनी बेटी दिव्य सहित और दर्जन पर धावक-धाविकाओं को ट्रेनिंग दे रहा है। राज्य खेल विभाग का एथलेटिक कोच राजेंदर धीमान भी एक गु्रप को प्रशिक्षण दे रहा है। पूर्व एथलीट अनिल शर्मा जो टीजीटी के पद पर शिक्षा विभाग में कार्यरत है, रोज शाम को कई दर्जन धावक-धाविकाओं को ट्रेनिंग देता देखा जा सकता है। राजनीश शर्मा यह भी पूर्ण एथलीट है और शिक्षा विभाग में टीजीटी के पद पर कार्यरत है। इस शिक्षक ने भी अपने शिक्षण कार्यक्रम को पूरा कर बचे समय में कई राज्य पदक विजेता धाविकाओं को तैयार किया है। डीएवी स्कूल हमीरपुर के शारीरिक शिक्षक तरपरिष्ट को भी हर दिन दर्जनों धावक-धाविकाओं के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिंथैटिक ट्रैक में देखा जा सकता है। हिम अकादमी के शारीरिक शिक्षक पीयूस तथा अन्य शारीरिक शिक्षक भी अपने-अपने स्कूलों में धावक-धाविकाओं को प्रशिक्षण देते देखे जा सकते हैं। हमीरपुर में पहली बार कुलवीर ठाकुर ने जो उस समय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कक्ड़यार में टीजीटी के पद पर कार्यरत था गैर शारीरिक शिक्षक होते हुए भी एथलेटिक्स प्रशिक्षण स्कूल के बाद देकर कक्ड़यार स्कूल को एथलेटिक्स स्कूल को एथलेटिक्स में काफी पदक दिलाए थे। इस समय भी यह स्कूल शारीरिक शिक्षक नीरज शर्मा के प्रशिक्षण में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमीरपुर में एथलेटिक्स की शुरुआत तत्कालीन एनआईएस प्रशिक्षक अजीत सिंह सोहता ने तकनीकी रूप से की थी, उसी अस्सी के दशक में विजय कुमार हिमाचल एथलेटिक्स में चमकता हुआ सितारा रहा है। उसके समकालीन केहर सिंह पटियाल तथा वीरेंद्र वर्मा साई में आज प्रशिक्षक हैं। वैसे तो साठ के दशक में शुरू हुए राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के प्रथम प्राचार्य प्रो. वारपूते एथलेटिक्स के नजदीक रहे हैं। मगर राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर ने पहली बार 1989 में अंतर महाविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता की विजेता ट्रॉफी जीती है। हमीरपुर जिला एथलेटिक्स के वर्तमान सचिव संदीप डढवाल ने दो रिले सहित पांच पदक जीतकर अपना महत्त्वपूर्ण कप्तान का रोल अदा किया था।

उसके बाद अब अगले तीन दशकों तक हमीरपुर का एथलेटिक्स में दबदबा कायम है। राज्य स्तर से ऊपर उठकर पहली बार पुष्पा ठाकुर ने अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय तथा वरिष्ठ राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पदक जीतकर हमीरपुर एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम लिखा लिया। कई बार एशिया तथा ओलंपिक के लिए लगे प्रशिक्षण शिविरों तक पहुंचने वाली इस धाविका को प्रदेश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार परशुराम अवार्ड भी मिला है। 1992-93 से लेकर 2012-13 तक हमीरपुर के धावक व धाविकाओं ने लगभग तीन दर्जन पदक राष्ट्रीय खेल, वरिष्ठ राष्ट्रीय व अंतर विश्वविद्यालय व राष्ट्रीय महिला एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में जीते हैं। संजो देवी, मंजु कुमारी, रीता कुमारी, प्रोमिला, ज्योति, सोनिका शर्मा व रिशु ठाकुर ने महिला वर्ग तथा दिनेश कुमार ने पुरुष वर्ग में हमीरपुर  के मिट्टी के ट्रैक पर प्रशिक्षण प्राप्त कर यह गौरव हिमाचल को दिलाया है। इसे भी परशुराम अवार्ड से नवाजा गया है।

आजकल यह स्टार धाविका कुल्लू जिला में हिमाचल वन विभाग में रेंज आफिसर के पद पर कार्यरत है। हमीरपुर का इतिहास वर्तमान धावक-धाविकाओं के लिए प्रेरणादायी है। देखते हैं प्रो. प्रेम कुमार धूमल की देन सिंथैटिक ट्रैक पर हमीरपुर के प्रशिक्षक अपने ट्रेनी को किस तरह इस विश्व स्तरीय सुविधा का लाभ दिलाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे को ऊपर उठाते हैं।

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