Tuesday, July 14, 2020 02:24 PM

एसीएस रामसुभग सिंह बेकसूर, मिली क्लीन चिट

शिमला - एचपीटीडीसी की इकाइयों के लीज मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव रामसुभग सिंह को क्लीन चिट दी गई है। मामले में विधानसभा सत्र के बीच पर्यटन विभाग से हटाए गए रामसुभग सिंह को पूरी तरह से बेकसूर पाया गया है। मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यटन निदेशालय से काम के दबाव में गलती से ई-मेल भेज दी गई थी। इस बारे में एसीएस रामसुभग सिंह को न तो सीसी में रखा गया और न ही उन्हें इसकी जानकारी थी। उल्लेखनीय है कि पर्यटन विभाग ने एचपीटीडीसी की घाटे में चल रही 15 इकाइयों को लीज पर देने का प्रस्ताव तैयार किया था। विधानसभा सत्र से ठीक पहले निगम के इन होटलों की सूची राज्य सरकार की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई थी। इसके बाद विपक्ष ने सरकार पर जबरदस्त तरीके से हमला किया था। आनन-फानन में राज्य सरकार ने एसीएस रामसुभग सिंह को विधानसभा सत्र के बीच हटाकर विपक्ष को शांत करवाया था। मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र के दौरान यह ऐलान किया था कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि एचपीटीडीसी की इकाइयों को अपलोड करने के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी। बहरहाल विपक्ष के दबाव में आकर सरकार ने एसीएस रामसुभग सिंह को पर्यटन विभाग से हटा दिया था। चूंकि मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी की जांच रिपोर्ट में अब रामसुभग सिंह बेकसूर निकले हैं। राज्य सरकार में नंबर दो पॉजिशन पर सेवारत एसीएस रामसुभग सिंह अगले मुख्य सचिव पद के प्रबल दावेदार हैं। इस कारण अब यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि एचपीटीडीसी लीज मामले में कहीं उन्हें षडयंत्र का शिकार तो नहीं किया गया है?

एक फाइल के दस्तावेज बदले

पुख्ता सूचना के अनुसार लोकसभा चुनाव के दौरान एचपीटीडीसी की संपत्तियों से जुड़ी एक फाइल के दस्तावेज पर्यटन निदेशालय में बदले गए हैं। एसीएस रामसुभग सिंह के कार्यालय से भेजी गई फाइल के दस्तावेज बदल दिए गए थे। यह पुष्टि निदेशालय के अधिकारियों ने मुख्य सचिव डा. बाल्दी के समक्ष भी की है। इन खुलासों के बाद यह आशंका भी उठ रही है कि पर्यटन विभाग के निचले अधिकारियों ने ही रामसुभग सिंह के साजिश का ताना-बाना तो नहीं बुना था।