Friday, September 20, 2019 12:54 AM

ऑक्सीजन सिलेंडर घोटाले की जांच शुरू

गृह विभाग ने दी जांच को मंजूरी, विजिलेंस कभी भी दर्ज कर सकता है एफआईआर

शिमला - भाजपा चार्जशीट में ऑक्सीजन गैस सिलेंडर घोटाले के लगे आरोपों की जांच आरंभ हो गई है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। विजिलेंस ने इस मामले पर जांच शुरू करने के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी थी, जिसे हरी झंडी मिल गई है। ऐसे में विजिलेंस कभी भी एफआईआर दर्ज कर सकती है। चार्जशीट में आरोप लगे थे कि सिंगल टेंडर कर चहेती कंपनी से ही ऑक्सीजन गैस सिलेंडर आपूर्ति के लिए एग्रीमेंट किया गया था। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने भाग लिया था, लेकिन तकनीकी छंटनी के दौरान दो कंपनियों को डिसक्वालिफाई कर दिया गया और एक कंपनी के नाम बिड खोलने का निर्णय लिया गया। बीजेपी चार्जशीट में यह भी आरोप लगे हैं कि डी टाइप ऑक्सीजन गैस सिलेंडर मंडी से शिमला पहुंचाने के बाद 205 रुपए प्रति सिलेंडर मिलता रहा, जबकि पूर्व सरकार के समय जिस कंपनी को टेंडर दिया गया था, वह कंपनी आईजीएमसी में ही 255 रुपए प्रति सिलेंडर के हिसाब से सप्लाई कर रही थी। भाजपा चार्जशीट में आरोप हैं कि आईजीएमसी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई कर रही पूर्व कंपनी के साथ 15 साल के लिए टेंडर करवाए गए थे। बावजूद इसके 45 रुपए अधिक सिलेंडर के हिसाब से खरीदने का निर्णय पूर्व सरकार ने लिया था। यहां तक कि पर्चेज कमेटी भी दो-दो बनी थीं। टेंडर में ऐसी भी शर्तें थी कि पांच साल बाद पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष कीमत बढ़ने से डी-टाइप ऑक्सीजन गैस सिलेंडर 15 वर्ष बाद 425 रुपए में मिलेगा। ऐसे में विजिलेंस ने भाजपा चार्जशीट में लगे इन आरोपों को खंगालने के लिए जांच खोल दी है। भाजपा ने चार्जशीट में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के खिलाफ  कई संगीन आरोप लगाए हैं।

घटिया दवाई सप्लाई की भी होगी तफ्तीश

पूर्व की वीरभद्र सरकार के समय हुए घटिया दवाई घोटाले की भी जांच विजिलेंस करेगी। वर्ष 2013 में पांच और 2014 में दो कंपनियों में घटिया दवाइयों के सैंपल पकड़े गए। इस दौरान सात ड्रग सैंपल फेल पाए गए। भाजपा चार्जशीट में आरोप लगे हैं कि पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश के बाहर पांच राज्यों की लैब में पूरे प्रदेश के 421 सैंपल और हिमाचल प्रदेश की लैब में 133 सैंपल फेल हुए थे।