Saturday, July 04, 2020 05:40 PM

ऑनलाइन पढ़ाई… बीमारी ने जकड़े लाड़ले

घंटों फोन पर आंखें गड़ाए रखने से बच्चों के सिरदर्द व आंखों में जलन का शिकार हो रहे छात्र,  भविष्य पर संकट

बरठीं-एक ओर जहां मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई करार देने वाली सरकारों ने अभिभावकों व बच्चों को व्यस्त करने का रास्ता निकाल लिया है, वहीं दूसरी ओर मोबाइल पर घंटों नजरें गड़ाए रखने से दिमागी दबाव ने बच्चों को अस्वस्थ कर दिया है। गौर रहे जिस मोबाइल फोन को घातक करार देते हुए इसके प्रयोग पर पाठशालाओं में बाकायदा लिखित सरकारी आदेशानुसार पूर्ण प्रतिबंध होता था तथा बच्चों को सजाएं दी जाती थीं। पाठशालाओं में कई अध्यापकों की कमेटियां बनाकर इसी काम में  लगाया जाता था। फोन को जब्त कर लिया जाता था। आज उसी मोबाइल से बच्चों के भविष्य को संवारने का सपना संजोया जा रहा है, जो कि कहां तक उपयोगी व तर्कसंगत होगा, सोचनीय विषय है।  मात्र दो माह के दौरान मोबाइल से हो रही इस पढ़ाई के आंकड़ों पर गौर फरमाई जाए, तो औसतन बच्चे सिर दर्द, आंखों में जलन के साथ आंखों की दर्द व मानसिक दबाव के आगोश में जा चुके हैं। गौर करने योग्य बात है कि जो छोटे बच्चे अभी ऐलिमेंटरी स्तर तक हैं और उन्हें दिन में चार-चार घंटों तक मोबाइल पर नजरें गड़ाए रहना पडे़, तो वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनका क्या हाल होगा। शिक्षा के इस आधुनिक स्वरूप के विपरित परिणाम की अभिभावकों ने भी कडे़ शब्दों में भर्त्सना की है। अभिभावकों के साथ बुद्धिजीवी वर्ग के दर्जनों लोगों ने कहा कि सरकार का इस दिशा में प्रारंभिक कदम तो सही माना पर इस कदम को तथ्यों व धरातल की कसौटी पर अंतिम कदम करार नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने भविष्य में इस दिशा में बडे़ पैमाने पर समुचित समग्र ढांचे के सृजन करने पर बल दिया है। साथ सरकार से मांग की कि आधुनिक शिक्षा की इस दिशा में व्यापक स्तर पर सुधार अमल में लाए जाएं, ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सकें।

माइग्रेन का डर

स्वास्थ्य जगत से जुडे़ सक्षम जानकारों की मानें तो बच्चों को छोटी सी उम्र में बीमारियों के गर्त में धकेलने के पीछे बुद्धिजीवियों का हाथ माना जाएगा, क्योंकि बच्चों पर मोबाइल के विपरित परिणामों से होने वाले रोगों के अगर आंकड़े निकाले जाएं तो अधिकतर प्रतिशतता बच्चों की होगी और वह भी माइग्रेन, आंखों के रोग व डिप्रेशन जैसे रोग ही मुख्य होंगे।

ऑनलाइन शिक्षा बिना नेटवर्क कैसे संभव

अभिभावक जोरावर सिंह, रमेश कुमार, रामपाल, रीना कुमारी, सोहन लाल, मीना कुमारी, बाबू राम, दिनेश कुमार भुट्टो, किशोरी लाल, अश्वनी कुमार, राकेश मेहता व अंजना  कुमारी सहित अन्य ने कहा कि सरकार व शिक्षा विभाग मोबाइल के माध्यम से केवल मात्र अध्यापकों द्वारा होम वर्क देने के नाम को ऑनलाइन शिक्षा करार नहीं दे सकती, क्योंकि ऑनलाइन शिक्षा के लिए समुचित ढांचे का होना अत्यंत आवश्यक होता है, जो कि एक छोटे सी मोबाइल स्क्रीन व बिना नेटवर्क के कैसे संभव हो सकता है।