Tuesday, June 02, 2020 09:55 AM

ओलावृष्टि से बागबानों को 200 करोड़ की चपत, महामारी के दौर में डबल मार, केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद में हिमाचल

महामारी के दौर में डबल मार, केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद में हिमाचल

शिमला - हिमाचल प्रदेश में बारिश व ओेलावृष्टि ने किसानों व बागबानों की कमर तोड़ कर रख दी है। राज्य के कुछ जिलों को छोेड़कर शेष में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रदेश में ओलावृष्टि से बागबानी, खुंब व फ्लोरिकल्चर को 200 करोड़ का नुकसान आंका गया है। शिमला जिला में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। शिमला जिला में अकेले बागबानी को 82.22 करोड़ का नुकसान हुआ है। मंडी जिला में भी 37.24 करोड़ और कुल्लू में 36.15 करोड़ से ज्यादा का नुकसान फलों को हुआ है। प्रदेश में इस बार मौसम में करवट का क्रम जारी है। विंटर सीजन के दौरान जहां जमकर बर्फबारी हुई थी। वहीं इसके बाद भी बारिश व ओलावृष्टि होती रही। मार्र्च व अप्रैल माह के दौरान बारिश अंधड़ और ओलावृष्टि ने जमकर कहर बरपाया। बागबानी विभाग ने फलों को हुए नुक्सान की रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र को भेज दी है। अब सूबे के बागबान नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार पर नजरें लगाए बैठे हैं। प्रदेश के 10 जिलों में सबसे ज्यादा सेब की ही खेती हो रही है, इसलिए नुकसान भी सबसे ज्यादा सेब को ही बताया जा रहा है। इसके अलावा आम, चेरी, प्लम, खुमानी, नाशपाती, आड़ू की फसल को भी ओलावृष्टि ने काफी नुकसान पहुंचाया है। महामारी के दौरान हुए नुकसान से किसान व बागबान चिंतित हैं। बागबानी विभाग के निदेशक एमएम शर्मा निदेशक ने बताया कि बागबानी विभाग ने विभिन्न फलों व खुंब को ओलावृष्टि व तूफान के कारण हुए नुकसान का आकलन कर लिया है। अब तक फलों को 200 करोड़ का नुकसान हो चुका है। शिमला जिला में सेब को सबसे ज्यादा और अन्य जिला में आम, आड़ू, प्लम, बादाम, खुमानी को काफी नुकसान हुआ है।