Monday, June 01, 2020 02:30 AM

कई चेहरे हुए बेनकाब

- राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा

लॉकडाउन से मजदूरों, दिहाड़ीदारों और अन्य प्रवासी लोगों का पलायन भी सरकारीतंत्र में फैले भ्रष्टाचार का ही नतीजा है। खास तौर पर सांसदों, विधायकों, पार्षदों और छुटपुट प्रधानों की आम लोगों के प्रति बेरुखी का चेहरा बेनकाब हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की नीतियों और योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना इनकी ही जिम्मेदारी होती है। अगर इन सभी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो प्रवासी पलायन का मन नहीं बनाते। कुछ समृद्ध लोगों का गरीबों की योजनाओं पर कुंडली मारने से इनका बेईमानी और अनैतिकता का चेहरा बेनकाब हुआ है। लॉकडाउन ने हर वर्ग की आर्थिक स्थिति को खराब किया। ऐसे में प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया और इन्हें मजबूर होकर अपने घरों को वापस, राज्यों सरकार की इनके प्रति लचर व्यवस्था के कारण लौटना पड़ा।