Wednesday, April 24, 2019 05:44 AM

कचनार के फूलों से सराबोर हुआ टीहरा

टीहरा—वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही क्षेत्र में फलदार पौधों पर फूल आना शुरू हो गए हैं। चारों ओर विभिन्न प्रकार के पौधों पर फूल ही फूल नजर आ रहे हैं। वहीं, टीहरा क्षेत्र इन दिनों कचनार के फूलों से सराबोर है। चारों ओर खेतों में और घासनियों में खड़े कचनार के पेड़ फूलों से लबालब भरे हुए हैं। क्षेत्र के लोग इन दिनों कचनार की सब्जी और उसके फूलों के रायते का भरपूर आनंद उठा रहे हैं। वहीं जहां जिस क्षेत्र में कचनार के पेड़ नहीं पाए जाते हैं, उन क्षेत्रों में रह रहे लोग अपने रिश्तेदारों से कचनार मंगवा रहे हैं, ताकि वे लोग भी इसके स्वाद का आनंद उठा सकें। यही नहीं, कचनार के फूलाों का रास्ता व परांठे तथा भल्ले भी खाने में बड़े स्वादिष्ट व गुणकारी होते हैं। आजकल क्षेत्र में चल रहे नवरात्र के उपलक्ष्य में यज्ञों में भी कचनार के फूलों के रायते को तवज्जो दी जा रही है। बता दें कि टीहरा क्षेत्र में कचनार की भारी पैदावार होती है चारों ओर कचनार के फूलों के हरे-भरे पेड़ नजर आ रहे हैं। भारी मात्रा में कचनार क्षेत्र में पाए तो जाते हैं, लेकिन इसकी क्षेत्र में मार्केटिंग नहीं हो पा रही है। यदि इसकी क्षेत्र में उचित मार्केटिंग की व्यवस्था की जाए तो क्षेत्र के लोग कचनार बेच कर अपनी आर्थिकी को भी मजबूत कर सकते हैं। कई क्विंटल कचनार वैसे ही बर्बाद हो जाता है। मार्च अप्रैल और मई माह में लोग कचनार की सब्जी का पूरा आनंद उठाते हैं। कचनार और इसके फूलों की सब्जी बड़ी स्वादिष्ट व स्वास्थ्य वर्धक होती है, वहीं कचनार का अचार भी डाला जाता है, जो बेहद स्वादिष्ट होता है। क्षेत्र में कचनार के पेड़ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं और यहां तक कि बंदर भी कचनार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं,  जिससे इस सब्जी के लिए लोगों  को भारी राहत मिल रही है। कचनार के फूलों को सुखाने के बाद पीसकर सेवन करने से यह गले की बीमारियों का उपचार भी देता है और गले में व मुंह में होने वाले छालों को भी ठीक करता है। कचनार के पेड़ की जड़ों को पीसकर इनका सेवन करने से छाले एकदम ठीक हो जाते हैं इसके साथ ही अनेक रोगों के लिए कचनार एक रामबाण औषधि है । क्षेत्र के लोग कचनार के फूलों को सुखाकर भी रख लेते हैं, जिसका बाद में ऑफ   सीजन में  अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। आयुर्वेदिक स्वास्थ्य अधिकारी डा. राजेंद्र पाल राणा का कहना है कि कचनार में अनेक गुण पाए जाते हैं। इसके पेड़ का हर भाग औषधीय गुणों से भरपूर होता है। गले संबंधी रोगों के लिए यह बहुत ही गुणकारी है।